| कक्षा 10वीं के बिहार मेट्रिक बोर्ड की अंतिम परीक्षा में पिछले कई वर्षों से पूछे गए भौतिक विज्ञान के अध्याय-02, प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light) के सभी महत्वपूर्ण एवं बार-बार पूछे जाने वाले सब्जेक्टिव वायरल प्रश्न इस अध्याय में शामिल किए गए हैं इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी छात्र के इस अध्याय का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न न छूट और वह परीक्षा में बेस्ट स्कोर प्राप्त कर सके इसीलिए क्लास 10th के सभी विद्यार्थी को सलाह दी जाती है कि वे इस अध्याय को बार-बार अभ्यास और पुनरावृति अवश्य करें ताकि वह परीक्षा में अच्छे से अच्छे अंक हासिल कर सके! |
| प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light) |
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| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. किस लेंस को अपसारी लेंस कहते हैं?[2014AI, 2017AI] उत्तर – अवतल लेंस 2. लेंस सूत्र क्या है?[2017C] उत्तर – 3. स्नेल के नियम को लिखें।[2013A, 2015AI, 2016AI6] उत्तर – आपतन कोण की ज्या(sin i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या(sin r) का अनुपात सदैव एक नियतांक होता है अर्थात 4. किस लेंस को अभिसारी लेंस कहते हैं?[2015AI] उत्तर – उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस कहते हैं । 5. उत्तल लेंस के सामने वस्तु कहाँ रखने पर प्रतिबिम्ब वस्तु के बराबर आकार का बनेगा?[2015AI] उत्तर – फोकस दूरी की दोगुनी दूरी(2F₁ ) पर या वक्रता केंद्र पर 6. 25 cm फोकसान्तर वाले अवतल लेंस की क्षमता कितनी है?[2015C] उत्तर – – 4D 7. जल का अपवर्तनांक कितना है?[2015C] उत्तर – 1.33 8. कौन-सा लेंस में वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार का प्रतिबिम्ब बनता है?[2014AI] उत्तर – उत्तल लेंस 9. एक लेंस की क्षमता + 5D है वह किस प्रकार का लेंस है?[2014AI] उत्तर – उत्तल लेंस 10. किसी उत्तल लेंस द्वारा वस्तु का आभासी एवं आवर्धित प्रतिबिम्ब बनाने हेतु वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?[2014AI] उत्तर – फोकस एवं लेंस के बीच। 11. लेंस की क्षमता का S.I. मात्रक क्या है?[2013A] उत्तर – डायोप्टर 12. 10 मीटर फोकसान्तर वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात करें।[2013C] उत्तर – – 0.1D 13. प्रकाश के अपवर्तन के कितने नियम हैं?[2012A] उत्तर – प्रकाश के अपवर्तन के दो नियम हैं। 14. 2 मीटर फोकसान्तर वाले उत्तल लेंस की क्षमता ज्ञात करें।[2012A] उत्तर – 0.5D लघु उत्तरीय प्रश्न 1. एक लेंस में प्रकाश-किरण किस प्रकार गमन करती है? एक आरेख द्वारा व्यक्त करें।[2023AI] उत्तर – किसी लेंस(उत्तल या अवतल लेंस) में समानांतर आने वाली प्रकाश की किरणें लेंस से अपवर्तन के बाद एक बिन्दु पर मिलती है या मिलती हुई प्रतीत होती है । 2. अवतल लेंस को अपसारी लेंस क्यों कहा जाता है?[2023AII] उत्तर – अवतल लेंस को अपसारी लेंस इसलिए कहा जाता है, क्योंकि लेंस के प्रधान अक्ष के समांतर आने वाली सभी किरणें लेंस से अपवर्तित होने के बाद फैल जाती है इसलिए अवतल लेंस को अपसारी लेंस कहा जाता है । 3. उत्तल लेंस में वस्तु का आभासी एवं आवर्धित प्रतिबिम्ब हेतु वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए? सचित्र बताएँ।[2021AI] उत्तर – उत्तल लेंस में वस्तु का आभासी एवं आवर्धित प्रतिबिम्ब हेतु वस्तु की स्थिति लेंस के फोकस(F) और प्रकशीय केंद्र के बीच होनी चाहिए । 4. पानी में रखा सिक्का उठा हुआ दीखता है । क्यों?[2021AI, 2025AII] उत्तर – पानी में रखा हुआ सिक्का उठा हुआ दिखाई देता है, इसका कारण प्रकाश का अपवर्तन है जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो अभिलंब से दूर हट जाती है जिसके कारण बाहर से देखने पर हमें सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है । 5. प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक को काँच की प्लेट में प्रवेश करता है । काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s है। [2020AI] उत्तर – काँच का अपवर्तनांक = 1.5 निर्वात में प्रकाश की चाल = 3 × 10⁸ m/s सूत्र से, काँच का अपवर्तनांक = 1.5 = v = v = v = 2 × 10⁸ m/s 6. उत्तल लेंस के 2F या वक्रता केंद्र पर रखे बिम्ब के प्रतिबिम्ब बनने का रेखा चित्र खींचें तथा प्रतिबिम्ब की प्रकृति, आकार और स्थान बतावें।[2018AI, 2020AI] | उत्तर – (i) प्रतिबिम्ब की स्थान(स्थिति) – यह प्रतिबिम्ब लेंस के दायीं ओर 2F पर ही बनता है। लेंस से वस्तु की दूरी = लेंस से प्रतिविम्ब की दूरी। (ii) प्रतिबिम्ब की प्रकृति – प्रतिबिम्ब वास्तविक है। (iii) प्रतिबिम्ब का आकार – प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के आकार के बराबर है । 7. उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस क्यों कहा जाता है?[2016AI, 2020AII] उत्तर – उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस इसलिए कहा जाता है, क्योंकि लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली सभी आपतित किरणें लेंस से अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के एक बिंदु पर मिलती है इसीलिए उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस भी कहा जाता है । 8. अपवर्तनांक की परिभाषा करें हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है । इस कथन का क्या अभिप्राय है? [2019AI] उत्तर – किन्ही दो माध्यमों(हवा और काँच) के लिए आपतन कोण की ज्या(sini) तथा अपवर्तन कोण की ज्या(sinr) का एक नियतांक अनुपात होता है जिसे अपवर्तनांक कहते हैं इसे म्यू(μ) द्वारा सूचित किया जाता है । हीरे का अपवर्तनांक :– हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है इस कथन का यह अभिप्राय है कि प्रकाश हीरे में निर्वात की अपेक्षा 2.42 गुणी धीमी चाल से चलती है । 9. प्रकाश का अपवर्तन क्या है? इसके नियमों को लिखें।[2016AI, 2019AI, 2024AII] उत्तर – प्रकाश का अपवर्तन :– जब प्रकाश की किरणें एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश पाती है तो इसके मार्ग में विचलन होता है । इस परिघटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं । हवा माध्यम से प्रकाश की किरणें काँच माध्यम में प्रवेश करती हैं तो यह अभिलंब की ओर मुड़ जाती है । प्रकाश के अपवर्तन के नियम :– प्रकाश के अपवर्तन के दो नियम है (i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिन्दु से खींचा गया अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं। (ii) आपतन कोण की ज्या(sini) और अपवर्तन कोण की ज्या(sinr) का अनुपात एक स्थिरांक(नियतांक) होता है । इस स्थिरांक को पहले माध्यम की सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहा जाता है । अपवर्तन के दूसरे नियम को स्नेल का नियम भी कहा जाता है । 10. उत्तल लेंस और अवतल लेंस में सचित्र अंतर स्पष्ट करें।[2015AI] उत्तर – उत्तल(अभिसारी) लेंस और अवतल(अपसारी) लेंस में निम्नलिखित अंतर है |
| उत्तल(अभिसारी) लेंस | अवतल(अपसारी) लेंस |
|---|---|
| (i) जिस लेंस का किनारे वाले भाग पतला और बीच वाले भाग मोटा हो उसे उसे उत्तल लेंस कहते हैं | (i) जिस लेंस का किनारे वाले भाग मोटा और बीच वाले भाग पतला हो उसे उसे अवतल लेंस कहते हैं |
| (ii) उत्तल लेंस के द्वारा वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बनता है | (ii) अवतल लेंस के द्वारा केवल आभासी प्रतिबिंब बनता है |
| (iii) उत्तल लेंस में प्रतिबिंब वस्तु से छोटा , बड़ा और बराबर बनता है | (iii) अवतल लेंस में प्रतिबिंब हमेशा वस्तु से छोटा बनता है |
| (iv) उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है | (iv) अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है |
| 11. सरल सूक्ष्मदर्शी क्या है? किरण आरेख खींचिए।[2015C, 2024AII] उत्तर – जब उत्तल लेंस के फोकस के अंदर किसी वस्तु को रखा जाता है तो वस्तु का सीधा और बड़ा प्रतिबिम्ब बनता है । इस उत्तल लेंस को आवर्धन ग्लास या सरल सूक्ष्मदर्शी कहा जाता है। 12. दिए गए उत्तल लेंस, अवतल लेंस एवं काँच की एक वृत्ताकार पट्टिका के सतहों को छुए बिना उसकी पहचान कैसे करेंगे?[2014AI] उत्तर – उत्तल लेंस, अवतल लेंस और काँच की वृताकार पट्टिका को बिना हुए पहचान का सबसे आसान तरीका किताब के अक्षरों का उपयोग करेंगे । प्रत्येक को बारी-बारी से अक्षरों के ऊपर रखेंगे । यदि अक्षर बड़े और आवर्धित दिखाई दे तो वह उत्तल लेंस होगा । यदि अक्षर छोटा और सीधा दिखाई दे तो वह अवतल लेंस होगा । और अगर अक्षर वास्तविक आकार का ही दिखाई दे तो वह कांच की पट्टिका होगी । इसी तरह से उत्तल लेंस, अवतल लेंस एवं काँच की एक वृत्ताकार पट्टिका के सतहों को छुए बिना उसकी पहचान करेंगे । 13. पार्श्विक विस्थापन से आप क्या समझते हैं?[2014AI] उत्तर – काँच की आयताकार सिल्ली से प्रकाश के अपवर्तन में आपतित किरण और निर्गत किरण की बीच लम्बवत दूरी को पार्श्विक विस्थापन कहते है । 14. काँच की आयताकार सिल्ली में अपवर्तन के दो किरणों के नामांकित चित्र खींचें।[2011A] उत्तर – 15. उत्तल लेंस के किन्हीं दो उपयोगों को बताएँ।[2022AII] उत्तर – उत्तल लेंस का उपयोग निम्नलिखित है (i) उत्तल लेंस का उपयोग दीर्घ दृष्टि दोष वाले व्यक्ति के चश्मे में किया जाता है (ii) उत्तल लेंस का उपयोग सरल सूक्ष्मदर्शी में किया जाता है (iii) उत्तल लेंस का उपयोग छपाई के छोटे-छोटे अक्षरों को पढ़ने में किया जाता है (iv) उत्तल लेंस का उपयोग फोटोग्राफिक कैमरा में प्रकाश को फोकस करके वास्तविक छवि बनाने के लिए किया जाता है 16. लेंस की क्षमता(शक्ति) से आप क्या समझते हैं? इसका SI मात्रक लिखें।[2024AII] उत्तर – लेंस के फोकस दूरी के व्युत्क्रम या विलोम को लेंस की क्षमता कहते हैं । लेंस की क्षमता का S.I मात्रक m‾¹ होता है । Note :- डाइऑप्टर(D) लेंस की क्षमता का S.I मात्रक नहीं है । बल्कि डाइऑप्टर(D) लेंस की क्षमता का प्रचलित(Popular) मात्रक है, S.I मात्रक नहीं 17. निरपेक्ष अपवर्तनांक किसे कहते हैं[2025AI] उत्तर – किसी माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की चाल तथा उस माध्यम में प्रकाश की चाल का अनुपात होता है। किसी पदार्थ में प्रवेश करते समय प्रकाश कितना मुड़ता है, इसकी माप यह करता है। 18. आवर्धन(Magnification) से आप क्या समझते हैं? [2017A, 2023AII] उत्तर – प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई के अनुपात को आवर्धन कहते हैं । आवर्धन को m से सूचित किया जाता है यदि वस्तु की ऊँचाई h और प्रतिबिंब की ऊँचाई h’ हो, तो लेंस का आवर्धन m = Note:– ▶️ Some Important जिन्हें याद रखना बहुत जरूरी है ● विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल भिन्न-भिन्न होती है। ● प्रकाश निर्वात या शून्य (या मुक्त आकाश) में सबसे तीव्र गति, लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड (300,000 km/s) से चलता है। ● पानी में प्रकाश की चाल लगभग दो लाख पच्चीस हजार किलोमीटर प्रति सेकंड (225,000 km/s) है ● काँच में इसकी चाल लगभग दो लाख किलोमीटर प्रति सेकंड (200,000 km/s) है। ● वायु की अपेक्षा पानी सघन (optically denser) माध्यम है । ● पानी की अपेक्षा वायु विरल (optically rarer) माध्यम है । ● पानी की अपेक्षा काँच सघन माध्यम है ● काँच की अपेक्षा पानी विरल माध्यम है। ● जिस माध्यम का प्रकाशीय घनत्व जितना ही अधिक होता है उसमें प्रकाश की चाल उतनी ही कम होती है । ● प्रकाश की किरण वायु (विरल माध्यम) से काँच (सघन माध्यम) में जाने पर अभिलंब की ओर मुड़ जाती है । ● प्रकाश की किरण कॉच (सघन माध्यम) से वायु (विरल माध्यम) में जाने पर अभिलंब से दूर हट जाती है । ● जब कोई प्रकाश की किरण दो माध्यमों को अलग करनेवाली सतह पर लंबवत पड़ती हो, तो वह बिना मुड़े (अर्थात, बिना अपवर्तन के) सीधी निकल जाती है । ▶️ प्रिज्म से आप क्या समझते हैं? उत्तर – किसी कोण पर झुके दो समतल पृष्ठों के बीच घिरे किसी पारदर्शक माध्यम को प्रिज्म (prism) कहते हैं । ● ∠A को प्रिज्म का अपवर्तक कोण (refracting angle of the prism) या केवल प्रिज्म का कोण (angle of the prism) कहते हैं । ● अपवर्तक कोर के सामने वाले पृष्ठ BC, C’B’ को प्रिज्म का आधार (base) कहते हैं। ▶️ प्रिज़म से होकर प्रकाश का अपवर्तन का किरण आरेख खींचे 1. PQ – आपतित किरण(Incident Ray) 2. EF – अपवर्तित किरण(Refracted Ray) 3. RS – निर्गत किरण(Emergent Ray) 4. BC – प्रिज्म का आधार(Base of the Prism) 5. ∠A – प्रिज्म का कोण(Angle of the Prism) 6. ∠QEN – आपतन कोण(Angle of Incidence) 7. ∠OEF – अपवर्तन कोण(Angle of Refraction) 8. ∠e – निर्गत कोण(Angle of Emergence) 9. ∠ D – विचलन कोण(Angle of Deviation) ▶️ लेंस किसे कहते हैं? उत्तर – लेंस, पारदर्शक पदार्थ का वह टुकड़ा है, जो दो निश्चित ज्यामितीय सतहों से घिरा रहता है । जिसे हम लेंस कहते हैं । Note : –लेंस की दोनों सतहें गोलीय (spherical) या दोनों में एक गोलीय तथा दूसरी समतल (plane) होती है। कुछ लेंसों की सतहें बेलनाकार (cylindrical) भी होती हैं। लेंस दो प्रकार के होते हैं- 1. उत्तल लेंस (convex lens) 2. अवतल लेंस (concave lens) 1. उत्तल लेंस (convex lens) :- जिस लेंस का किनारे वाला भाग पतला और बीच वाला भाग मोटा हो उसे उत्तल लेंस कहते हैं । 2. अवतल लेंस (concave lens) :- जिस लेंस का किनारे वाला भाग मोटा और बीच वाला भाग पतला हो उसे अवतल लेंस कहते हैं । ● लेंस के प्रकाश-केंद्र (optical centre) O से प्रथम मुख्य फोकस F₁ की दूरी को लेंस की प्रथम मुख्य फोकस-दूरी (first principal focal length) कहा जाता है । ● लेंस के प्रकाश-केंद्र O से द्वितीय मुख्य फोकस F₂ की दूरी को लेंस की द्वितीय मुख्य फोकस दूरी (second principal focal length) कहा जाता है। Note:- ● हम द्वितीय मुख्य फोकस F₂ को ही लेंस का फोकस (focus) और द्वितीय मुख्य फोकस-दूरी को ही लेंस की फोकस-दूरी (focal length) कहते हैं। ● फोकस, लेंस के मुख्य अक्ष पर वह बिंदु है जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर किरणपुंज लेंस से निकलने के बाद अभिसरित (उत्तल लेंस में) होती है या जहाँ से अपसरित (अवतल लेंस में) होती हुई प्रतीत होती है। ● लेंस के प्रकाश-केंद्र से उसके फोकस की दूरी को उस लेंस की फोकस दूरी कहते हैं। ▶️ प्रतिबिंब किसे कहते हैं? किसी बिंदु-स्रोत से आती प्रकाश की किरणें लेंस से अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं या जिस बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं उसे उस बिंदु-स्रोत का प्रतिबिंव कहते हैं । प्रतिबिंब दो प्रकार के होते हैं- (i) वास्तविक प्रतिबिंब और (ii) आभासी या काल्पनिक (i) वास्तविक प्रतिबिंब :– किसी बिंदु-स्रोत से आती प्रकाश की किरणें अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर वास्तव में मिलती हैं, उसे उस बिंदु-स्रोत का वास्तविक प्रतिबिंब (real image) कहते हैं। अतः, Note :- वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है । वास्तविक प्रतिबिंब वस्तु की अपेक्षा हमेशा उलटा (inverted) होता है। (ii) आभासी प्रतिबिंब:– किसी बिंदु-स्रोत से आती प्रकाश की किरणें अपवर्तन के बाद जिस बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं, उसे उस बिंदु-स्रोत का आभासी या काल्पनिक प्रतिबिंब (virtual image) कहते हैं । Note :- आभासी प्रतिबिंब को पर्दे पर नहीं प्राप्त किया जा सकता है। आभासी प्रतिबिंव वस्तु की अपेक्षा हमेशा सीधा (erect) होता है। ▶️ लेंसों के लिए किरण आरेख 1. प्रकाशीय-केंद्र की दिशा में आपतित प्रकाश की किरण ▶️ लेंस के प्रकाशीय-केंद्र की दिशा में आपतित प्रकाश की किरण लेंस से अपवर्तन के बाद बिना विचलित हुए सीधी निकाल जाति है 2. मुख्य अक्ष के समांतर आपतित प्रकाश की किरण जब लेंस उत्तल हो तो ● उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश की किरण लेंस से अपवर्तन के बाद लेंस के फोकस से होकर गुजरती है जब लेंस अवतल हो तो ● अवतल लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली(आपतित) प्रकाश की किरण लेंस से अपवर्तन के बाद लेंस के फोकस से आती प्रतीत होती है 3. फोकस की दिशा में आपतित प्रकाश की किरण ● लेंस के फोकस की दिशा में आपतित प्रकाश की किरण लेंस से अपवर्तन के बाद लेंस के अक्ष के समांतर निकाल जाति है ▶️ उत्तल लेंस में विभिन्न दूरियों पर रखे वस्तु के प्रतिबिंब (Images of Objects Placed at Various Distances from a Convex Lens) 1. जब वस्तु अनंत पर स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज(आकार) बताएं – स्थिती(स्थान) – फोकस(F₂) पर बनेगा प्रकृति – वास्तविक और उलटा बनेगा साइज(आकार) – प्रतिबिंब वस्तु से बहुत ही छोटा बनेगा 2. जब वस्तु अनंत और 2F₁ के बीच स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज (आकार) बताएं – स्थिती(स्थान) – वस्तु का प्रतिबिंब F₂ और 2F₂ के बीच बनेगा | प्रकृति – वास्तविक और उलटा बनेगा | साइज(आकार) – प्रतिबिंब वस्तु से छोटा बनेगा 3. जब वस्तु 2F₁ पर स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज (आकार) बताएं – स्थिती(स्थान) – वस्तु का प्रतिबिंब 2F₂ पर बनेगा | प्रकृति – वास्तविक और उलटा बनेगा साइज(आकार) – प्रतिबिंब वस्तु के आकार के बराबर बनेगा 4. जब वस्तु F₁ और 2F₁ के बीच स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज (आकार) बताएं – स्थिती(स्थान) – वस्तु का प्रतिबिंब 2F₂ और अनंत के बीच बनेगा | प्रकृति – वास्तविक और उलटा बनेगा साइज(आकार) – प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा बनेगा 5. जब वस्तु F₁ पर स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती(स्थान), प्रकृति एवं साइज(आकार) बताएं – स्थिती(स्थान) – वस्तु का प्रतिबिंब अनंत पर बनेगा प्रकृति – वास्तविक और उलटा बनेगा साइज(आकार) – प्रतिबिंब वस्तु से बहुत ही बड़ा बनेगा 6. जब वस्तु लेंस तथा F₁ के बीच स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती(स्थान), प्रकृति एवं साइज(आकार) बताएं – स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब वस्तु के पीछे बनेगा प्रकृति – आभासी(काल्पनिक) और सीधा होगा साइज(आकार) – प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा होगा ▶️ उत्तल लेंस में बने प्रतिबिम्बों की स्थिति, प्रकृति तथा आकार(साइज) |
| बिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F₂ पर | अत्यधिक छोटा | वास्तविक और उलटा |
| 2F₁ तथा अनंत के बीच | 2F₂ तथा F₂ के बीच | छोटा | वास्तविक और उलटा |
| 2F₁ पर | 2F₂ पर | समान आकार का | वास्तविक और उलटा |
| 2F₁ तथा F₁ के बीच | 2F₂ तथा अनंत के बीच | बड़ा | वास्तविक और उलटा |
| F₁ पर | अनंत पर | अत्यधिक बड़ा | वास्तविक और उलटा |
| लेंस तथा F₁ के बीच | वस्तु के पीछे | बड़ा | आभासी और सीधा |
| ▶️ अवतल लेंस से प्रतिबिंब का बनना ● जब वस्तु अनंत तथा लेंस के बीच हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती(स्थान), प्रकृति एवं साइज(आकार) बताएं – स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब लेंस तथा F₂ के बीच बनेगा प्रकृति – आभासी(काल्पनिक) और सीधा होगा साइज(आकार) – प्रतिबिंब वस्तु से छोटा होगा |
| बिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F₂ पर | अत्यधिक(बहुत ) छोटा | आभासी और सीधा |
| लेंस तथा अनंत के बीच | लेंस तथा F₂ के बीच | छोटा | आभासी और सीधा |
| ▶️ लेंसों के लिए निर्देशांक चिन्ह परिपाटी 1. लेंस के मुख्य अक्ष (principal axis) को निर्देशांक XX’ अक्ष माना जाता है। 2. सभी दूरियाँ लेंस के प्रकाश-केंद्र से मापी जाती हैं, अर्थात प्रकाश-केंद्र को मूलबिंदु (origin) माना जाता है। 3. आपतित प्रकाश (incident light) की दिशा में मापी गई सभी दूरियाँ धनात्मक (positive) होती हैं तथा आपतित प्रकाश की दिशा के विपरीत दिशा में मापी गई सभी दूरियाँ ऋणात्मक (negative) होती हैं। 4. लेंस के मुख्य अक्ष, अर्थात XX’ अक्ष के लंबवत मापी गई दूरियाँ धनात्मक तब होती हैं जब वे अक्ष के ऊपर होती हैं, तथा ऋणात्मक तब होती हैं जब वे अक्ष के नीचे होती हैं। Note :- ● उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है ● अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है ● लेंस अवतल हो या उत्तल वस्तु की दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है ▶️ कुछ महत्वपूर्ण बिंदुऍं जो आने वाले फाइनल मैट्रिक बोर्ड ऑब्जेक्टिव एग्जाम के लिए बहुत ही जरूरी है ● प्रकाश की किरणों के एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाने पर दिशा-परिवर्तन (अर्थात मुड़ने) की क्रिया को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। ● विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल भिन्न-भिन्न होती है। ● प्रकाश निर्वात या शून्य में सबसे तीव्र गति, लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड (300,000 km/s) से चलता है। ● किसी माध्यम का अपवर्तनांक (n) शून्य में प्रकाश की चाल (c) और उस माध्यम में प्रकाश की चाल (cₘ) के अनुपात (ratio) को कहते हैं । किसी माध्यम का अपवर्तनांक (n) = ● यदि एक माध्यम की अपेक्षा दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक अधिक हो, तो दूसरे माध्यम को पहले माध्यम से प्रकाशतः सघन(optically denser) कहा जाता है अथवा पहले माध्यम को दूसरे की अपेक्षा प्रकाशतः विरल (optically rarer) कहा जाता है। ● जिस माध्यम का अपवर्तनांक कम होता है उसमें प्रकाश की चाल अधिक होती है। ● दो माध्यमों के निरपेक्ष अपवर्तनांकों के अनुपात (ratio) को आपेक्षिक अपवर्तनांक (relative refractive index) कहा जाता है। प्रकाश के अपवर्तन के निम्नलिखित दो नियम हैं- 1. आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब और अपवर्तित किरण तीनों एक ही समतल (plane) में होते हैं। 2. किन्हीं दो माध्यमों और प्रकाश के किसी विशेष वर्ण (colour) के लिए आपतन कोण की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक नियतांक होता है। ● द्वितीय नियम को सेल का नियम (Snell’s law) भी कहा जाता है। ● यदि आपतन कोण i हो और अपवर्तन कोण r हो, तो प्रकाश के अपवर्तन के द्वितीय नियम, अर्थात स्नेल के नियम से ● यह नियतांक माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक n₂₁ के बराबर होता है। अतः, ● जब प्रकाश की किरण किसी प्रकाशतः विरल माध्यम से प्रकाशतः सघन माध्यम में जाती है, तो वह अभिलंव की ओर मुड़ जाती है। ● जब प्रकाश की किरण किसी प्रकाशतः सघन माध्यम से प्रकाशतः विरल माध्यम में जाती है, तो वह अभिलंव से दूर हट जाती है। ● जब प्रकाश की किरण दो माध्यमों को अलग करनेवाली सतह पर लंबवत पड़ती है, तो वह बिना मुड़े, अर्थात बिना अपवर्तन के सीधी निकल जाती है। ● काँच की सिल्ली से प्रकाश के अपवर्तन में आपतित किरण और निर्गत किरण के बीच की लंबवत दूरी को पाश्विक विस्थापन (lateral displacement) कहते हैं। ● किसी कोण पर झुके दो समतल पृष्ठों के बीच घिरे किसी पारदर्शक माध्यम को प्रिज्म (prism) कहते हैं। ● प्रकाश का आवागमन प्रिज्म के जिन दो फलकों से होता है, उन्हें प्रिज्म का अपवर्तक पृष्ठ (refracting surfaces) कहते हैं। ● अपवर्तक पृष्ठों के बीच के कोण को प्रिज्म का अपवर्तक कोण (refracting angle of the prism) या केवल प्रिज्म का कोण (angle of the prism) कहते हैं। ● आपतित किरण तथा निर्गत किरण के बीच के कोण को विचलन का कोण (angle of deviation) कहते हैं। ● अपवर्तक कोण अधिक होने पर विचलन कोण भी अधिक होता है। ● लेंस पारदर्शक पदार्थ का वह टुकड़ा है जो दो निश्चित ज्यामितीय सतहों से घिरा रहता है। लेंस दो प्रकार के होते हैं– 1. उत्तल लेंस (convex lens) 2. अवतल लेंस (concave lens) ● उत्तल लेंस में किनारे की अपेक्षा मध्य का भाग अधिक मोटा होता है तथा अवतल लेंस में मध्य भाग की अपेक्षा किनारे का भाग अधिक मोटा होता है। ● लेंस को घेरनेवाली गोलीय सतह के केंद्र को लेंस का वक्रता-केंद्र (centre of curvature) कहते हैं। ● किसी लेंस का मुख्य अक्ष (principal axis) उसकी सतहों के वक्रता-केंद्रों को मिलानेवाली रेखा होती है। ● किसी पतले लेंस का प्रकाश-केंद्र (optical centre) उसके मुख्य अक्ष पर वह बिंदु है जिससे होकर जानेवाली किरण लेंस से अपवर्तन के बाद बिना विचलन के निकल जाती है। ● उत्तल लेंस, उससे होकर जानेवाली किरणपूंज को अभिसरित (converge) करता है, इसलिए उत्तल लेंस को अभिसारी लेस (diverging lens) भी कहा जाता है। ● अवतल लेंस, उससे होकर जानेवाली किरणपुंज को अपसारित (diverge) करता है, इसलिए अवतल लेंस को अपसारी लेंस (converging lens) भी कहा जाता है। ● उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष पर जिस निश्चित बिंदु F₁ से आती किरणें लेंस से अपवर्तित होकर मुख्य अक्ष के समांतर (parallel) हो जाती हैं, उस बिंदु F₁ को उत्तल लेंस का प्रथम मुख्य फोकस (first principal focus) कहा जाता है। ● किसी अवतल लेंस के मुख्य अक्ष के जिस निश्चित बिंदु F, की दिशा में आपतित किरणें लेंस से अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर निकलती हैं, उस बिंदु F₁ को अवतल लेंस का प्रथम मुख्य फोकस कहते हैं। ● लेंस के प्रकाश-केंद्र से प्रथम मुख्य फोकस की दूरी को लेंस की प्रथम मुख्य फोकस दूरी (first principal focal length) कहा जाता है। ● यदि प्रकाश की किरणें किसी उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आपतित हों, तो वे लेंस से अपवर्तित होकर मुख्य अक्ष पर लेंस के दूसरी ओर स्थित जिस निश्चित बिंदु से होकर जाती है, उस बिंदु को उस उत्तल लेंस का द्वितीय मुख्य फोकस (second principal focus) F₂ कहा जाता है। ● यदि प्रकाश की किरणें किसी अवतल लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आपतित हों, तो अपवर्तित किरणें जिस निश्चित बिंदु F₂ से आती हुई प्रतीत होती हैं, उस बिंदु को अवतल लेंस का द्वितीय मुख्य फोकस कहते हैं। ● लेंस के प्रकाश-केंद्र से द्वितीय मुख्य फोकस की दूरी को लेंस की द्वितीय मुख्य फोकस दूरी (second principal focal length) कहा जाता है। ● द्वितीय मुख्य फोकस F₂ को ही फोकस (focus) F और द्वितीय मुख्य फोकस दूरी को ही फोकस दूरी (focal length) ƒ कहा जाता है । ● फोकस लेंस के मुख्य अक्ष पर वह बिंदु है जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर किरणपुंज लेंस से निकलने के बाद अभिसरित (उत्तल लेंस में) होती है या जहाँ से अपसारित (अवतल लेंस में) होती हुई प्रतीत होती है। ● लेंस के प्रकाश-केंद्र से उसके फोकस की दूरी को उस लेंस की फोकस-दूरी कहते हैं । ● किसी लेंस के सतहों की वक्रता (curvature) जितनी अधिक होगी, अर्थात लेंस जितना मोटा होगा, उसकी फोकस-दूरी उतनी ही कम होगी। ● किसी बिंदु-स्रोत से आती प्रकाश की किरणें लेंस से अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं या जिस बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं, उसे उस बिंदु स्रोत का प्रतिबिंब(image) कहते हैं। प्रतिबिंब दो प्रकार के होते हैं- (i) वास्तविक प्रतिबिंब (ii) आभासी या काल्पनिक प्रतिबिंब ● किसी बिंदु-स्रोत से आती किरणें अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर वास्तव में मिलती हैं, उसे उस बिंदु-स्रोत का वास्तविक प्रतिबिंब (real image) कहते हैं। ● वास्तविक प्रतिबिंब वस्तु की अपेक्षा हमेशा उलटा (inverted) होता है। ● किसी बिंदु-स्रोत से आती किरणें अपवर्तन के बाद जिस बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं, उसे उस बिंदु-स्रोत का आभासी या काल्पनिक प्रतिविंव (virtual image) कहते हैं। ● आभासी प्रतिबिंब वस्तु की अपेक्षा हमेशा सीधा (erect) होता है। ● लेंस के प्रकाश-केंद्र की दिशा में आपतित किरण लेंस से अपवर्तन के बाद बिना विचलित हुए सीधी निकल जाती है। ● उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आनेवाली किरण लेंस से अपवर्तन के बाद लेंस के फोकस से होकर गुजरती है, ● अवतल लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आपतित किरण लेंस से अपवर्तन के बाद लेंस के फोकस से आती प्रतीत होती है। ● जब कोई किरण लेंस के फोकस की दिशा में आपतित होती है तो वह अपवर्तन के बाद लेंस के अक्ष के समांतर निकलती है। ● जब प्रकाश की कोई किरण एक लेंस से गुजरती है तो उसका दो बार अपवर्तन होता है; एक बार उस समय जब किरण लेंस में प्रवेश करती है और दूसरी बार तब जब किरण लेंस से बाहर निकलती है। ● उत्तल लेंस द्वारा किसी वस्तु के वास्तविक और आभासी दोनों ही प्रकार के प्रतिबिंब बनते हैं। ● अवतल लेंस द्वारा किसी वस्तु का सदा आभासी प्रतिबिंब ही बनता है। लेंसों के लिए निर्देशांक चिह्न परिपाटी के अनुसार, 1. लेंस के मुख्य अक्ष को निर्देशांक XX’ अक्ष माना जाता है। 2. सभी दूरियाँ लेंस के प्रकाश-केंद्र से मापी जाती हैं। 3. आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई सभी दूरियाँ धनात्मक (positive) होती हैं तथा आपतित प्रकाश की दिशा के विपरीत दिशा में मापी गई सभी दूरियाँ ऋणात्मक (negative) होती हैं। 4. लेंस के प्रधान अक्ष अर्थात XX’ के लंबवत मापी गई दूरियाँ धनात्मक तब होती हैं जब वे अक्ष के ऊपर होती हैं, तथा ऋणात्मक तब होती हैं जब वे अक्ष के नीचे होती हैं। ● उत्तल लेंस’ की फोकस दूरी धनात्यक (positive) होती है ● अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक (negative) होती है। ● लेंस के लिए वस्तु-दूरी u, प्रतिबिंब दूरी v, और फोकस दूरी f के बीच के संबंध को एक सूत्र से बताया जाता है, जिसे लेंस-सूत्र (lens formula) कहते हैं। लेंस-सूत्र निम्नलिखित हैं- ————————– ● प्रतिबिंब की ऊँचाई h’ और वस्तु की ऊँचाई h के अनुपात को आवर्धन (magnification) m कहा जाता है। अर्थात, m = ● लेंस के लिए वस्तु-दूरी u, प्रतिबिंब-दूरी v और आवर्धन (magnification) m के बीच का संबंध निम्नलिखित है- m = + ● आवर्धन m के मान में ऋणात्मक चिह्न (negative sign) का अर्थ है कि प्रतिबिंब वस्तु के सापेक्ष उलटा बन रहा है अर्थात वास्तविक (real) है और m का धनात्मक (positive) मान आभासी प्रतिबिंब इंगित करता है। ● किसी लेंस की क्षमता (P) उसकी फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम (reciprocal) से मापी जाती है P = ● लेंस की क्षमता का S.I मात्रक m‾¹ होता है। ● 1 डाइऑप्टर (D) उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस-दूरी 1 मीटर (m) हो। ● लेंस की क्षमता का चिह्न वही होता है जो चिह्न उसकी फोकस-दूरी का है। अतः, उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक और अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है। |
| महत्वपूर्ण सूत्र(Important Formula) |
|---|
| n = लेंस का सूत्र- m = m = + लेंस की क्षमता(P) = यदि P₁, P₂, P₃, … क्षमता वाले लेंस एक-दूसरे से सटाकर रखे गए हों, तो (उचित चिह्नों के साथ) संपर्कित लेंसों की कुल क्षमता P = P₁ + P₂ + P₃ + ……… |
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