कक्षा 10वीं विज्ञान (Science) भौतिक विज्ञान (Physics) अध्याय-01 प्रकाश का परावर्तन (Reflaction of Light) वायरल Subjective प्रश्न मैट्रिक बोर्ड परीक्षा

कक्षा 10वीं विज्ञान (Science) भौतिक विज्ञान (Physics) अध्याय-01 प्रकाश का परावर्तन (Reflaction of Light) वायरल Subjective प्रश्न मैट्रिक बोर्ड परीक्षा

1. प्रकाश ( Light):-

उत्तर – प्रकाश (light) ऊर्जा (energy) का वह रूप है जिसकी सहायता से हम वस्तुओं को देखते हैं ।
या
प्रकाश वह कारक है जिसकी सहायता से हम किसी वस्तु को देखते है ।

प्रकाश (Light) की विशेषताएं:-

⏩ प्रकाश ऊर्जा(Energy) का एक रूप है ।
⏩निर्वात (Vacuum) में प्रकाश की चाल सबसे अधिक होती है ।
⏩निर्वात मे प्रकाश की चाल 3×10⁸ m/s या 3×10⁵ km/s होता है ।
⏩प्रकाश हमेश सीधी रेखा(Straight Line) में गमन करती(चलती) है ।
⏩प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है ।
⏩प्रकाश एक विद्युत चुम्बकीय तरंग(Electromagnetic wave) है ।
⏩ यह एक अनुप्रस्थ तरंग(Transverse wave) है ।

2. प्रकाश स्त्रोत (Light Source) –

उत्तर – जिस वस्तु से प्रकाश निकलता है , उसे प्रकाश स्त्रोत कहते है ।

3.प्रकीर्णन (Scattering) –

उत्तर – प्रकाश जब सूक्ष्मकणों पर पड़ता है तो वे कण उनपर पड़नेवाले प्रकाश की कुछ ऊर्जा का आवशोषित कर फिर उसे चारों ओर विकसित करते है । इस प्रक्रिया को प्रकीर्णन कहा जाता है ।

4. प्रकाश की किरण (Ray of Light) –

उत्तर – एक सरल रेखा पर चलने वाले प्रकाश को प्रकाश की किरण कहते हैं ।

5.किरण आरेख –

उत्तर – प्रकाश किरणों का पथ दर्शानेवाले चित्रों को किरण-आरेख कहा जाता है ।

6. प्रकाश पुंज या प्रकाश का किरणपुंज (Beam of light) क्या है? ये कितने प्रकार के होते हैं? [2016C, 2025AII]

उत्तर – प्रकाश की किरणों के समूह को प्रकाश का किरणपुंज कहते है ।

किरणपुंज के मुख्यतः तीन प्रकार होते है:-

1. अपसारी किरणपुंज (Diverging beam)
2. समांतर किरणपुंज (Parallel beam)
3. अभीसरी किरणपुंज (Converging beam)

(1). अपसारी किरणपुंज (Diverging beam) –

उत्तर – इस प्रकार के किरणपुंज में प्रकाश की किरणें एक बिंदु-स्त्रोत से निकलकर फैलती चली जाती है ।

(2). अभिसारी किरणपुंज (Converging beam)–

उत्तर – इस प्रकार के किरणपुंज में प्रकाश की किरणें एक बिंदु पर आकर मिलती है या मिलती हुई प्रतीत होती है ।

(3). समांतर किरणपुंज (Parallel beam)–

उत्तर – इस प्रकार के किरणपुंज में प्रकाश की किरणें एक दूसरें के समांतर होती है ।

• पारदर्शी पदार्थ (Transparent Medium)–

उत्तर – वे पदार्थ जिनसे होकर प्रकाश आसानी से पार कर जाता है , पारदर्शी पदार्थ कहलाते है ।
जैसे – काँच, पानी हवा(वायु) आदि

• पारभाषी पदार्थ ( Translucent Medium )–

उत्तर – वे पदार्थ जो उनपर पड़नेवाले प्रकाश के एक छोटे-से भाग को ही अपने में से होकर जाने देते है, परभाषी पदार्थ कहलाते है ।
जैसे – घिसा हुआ काँच, तेल लगा कागज आदि

• अपारदर्शी पदार्थ ( Opaque Medium )–

उत्तर – वे पदार्थ जो प्रकाश को अपने में से होकर नहीं जाने देते, अपारदर्शी पदार्थ कहलाते है ।
जैसे – लकड़ी , लोहा आदि

⏩परावर्तन के नियमों को समझने के लिए कुछ बिंदुओं को जानना बेहद जरूरी है:-

▶️आपतित किरण (Incident ray)-किसी सतह पर पड़नेवाली किरण को आपतित किरण कहते है ।
▶️आपतन बिंदु (Point of incidence)-जिस बिंदु पर आपतित किरण सतह से टकराती है उसे आपतन बिंदु कहते है ।
▶️परावर्तित किरण (Reflected ray) – जब प्रकाश की किरण किसी परावर्तक सतह से टकराकर वापस लौटती है, तो लौटने वाली किरण को परावर्तित किरण कहते हैं ।
▶️अभिलंब (Normal) – किसी समतल सतह के किसी बिंदु पर खींचे हुए लंब को उस बिंदु का अभिलंब कहते है ।
▶️आपतन कोण (Angle of incidence) – आपतित किरण और अभिलंब के बीच बने कोण को आपतन कोण कहते हैं । इसे ∠i से सूचित किया जाता है ।
▶️परावर्तन कोण (Angle of reflection) – परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच बने कोण को परावर्तन कोण कहते है । इसे ∠r से सूचित किया जाता है ।
⬇️

⏩प्रकाश के परावर्तन के नियमों को लिखें और इसे किरण आरेख से दर्शायें। [2017AII, 2018AII, 2022AII]

उत्तर – जब प्रकाश की किरण किसी चिकनी(चमकीली) सतह से टकराती है और उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं ।
किरण आरेख :-

प्रकाश के परावर्तन के नियम:-

प्रकाश के परावर्तन के दो नियम है:-
(i) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब तीनों एक ही समतल में होते है ।
(ii). आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है ।
∠i = ∠r

• प्रतिबिंब (Image) –

उत्तर – किसी बिंदु-स्त्रोत से आती प्रकाश की किरणें दर्पण से परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती है या जिस बिंदु पर मिलती हुई प्रतीत होती है । उसे उस बिंदु-स्त्रोत का प्रतिबिंब कहते है ।

• प्रतिबिंब (Image) कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर – प्रतिबिंब दो प्रकार के होते है –
1.वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image)
2.आभासी या काल्पनिक प्रतिबिंब (Virtual or Imaginary Image)

1.वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image):–

उत्तर – किसी बिंदु-स्त्रोत से आती प्रकाश की किरणें दर्पण से परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर वास्तव में मिलाती है, उसे उस बिंदु-स्त्रोत का वास्तविक प्रतिबिंब कहते है ।
नोट – वास्तविक प्रतिबिंब वस्तु की अपेक्षा हमेशा उलटा होता है । वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है ।

2. आभासी या काल्पनिक प्रतिबिंब (Virtual or Imaginary Image):–

उत्तर – किसी बिंदु-स्त्रोत से आती प्रकाश की किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु से आती हुई प्रतीत होती है । उसे उस बिंदु-स्त्रोत का आभासी प्रतिबिंब कहते है ।
नोट – आभासी प्रतिबिंब वस्तु की अपेक्षा हमेशा सीधा होता है । लेकिन आभासी प्रतिबिंब को पर्दे पर नहीं प्राप्त किया जा सकता है ।

• दर्पण कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर – दर्पण दो प्रकार के होते हैं
1. समतल दर्पण ( Plain mirror )
2. गोलीय दर्पण (Spherical mirror )

⏩ समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की विशेषताऍ –

उत्तर – समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की विशेषताऍ निम्नलिखित है–
1. प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है ।
2. प्रतिबिंब वस्तु की अपेक्षा सीधा बनता है ।
3. प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकर के बराबर होता है ।
4. प्रतिबिंब पार्श्विक रूप से उलटा होता है ।
5. प्रतिबिंब अभासी होता है ।
6. प्रतिबिंब दर्पण से उतना ही पीछे बनता है जितना वस्तु दर्पण से आगे रहता है ।
7. समतल दर्पण का आवर्धन +1 होता है ।
नोट – समतल दर्पण पर लंबवत पड़नेवाली प्रकाश की किरण परावर्तन के बाद उसी पथ पर वापस लौट जाती है ।

⏺️गोलीय दर्पण ( Spherical Mirror )क्या है? और ये कितने प्रकार के होते हैं? [2020AII, 2016C]

उत्तर – गोलीय दर्पण उस दर्पण को कहते है जिसकी परावर्तक सतह किसी खोखले गोले का एक भाग होता है ।

गोलीय दर्पण कितने प्रकार के होते है?

उत्तर – गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते है|
1. अवतल दर्पण ( Concave Mirror )
2. उत्तल दर्पण ( Convex Mirror )

⏩अवतल दर्पण(Concave Mirror):–

उत्तर – जिस गोलीय दर्पण का परावर्तक सतह(पृष्ठ) अंदर की ओर धंसा(झुका) हो उसे अवतल दर्पण कहते हैं ।
या
जिस गोलीय दर्पण का उठा हुआ भाग कलई(रजतित) किया हुआ हो उसे अवतल दर्पण कहते हैं ।

⏩उत्तल दर्पण(Convex Mirror):–

उत्तर – जिस गोलीय दर्पण का परावर्तक सतह(पृष्ठ) बाहर की ओर उठा(उभरा) हो उसे उत्तल दर्पण कहते हैं ।
या
जिस गोलीय दर्पण का धंसा हुआ भाग कलई(रजतित) किया हुआ हो उसे उत्तल दर्पण कहते हैं ।

⏩गोलीय दर्पण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुएं:–

▶️ध्रुव ( Pole )– गोलीय दर्पण के मध्यबिंदु को दर्पण का ध्रुव कहते है | इसे P से सूचित किया जाता है ।
▶️वक्रता-केंद्र (Centre of Curvature)– गोलीय दर्पण जिस गोले का भाग होता है उसके केंद्र को दर्पण का वक्रता-त्रिज्या कहते हैं | इसे C से सूचित किया जाता है ।
▶️वक्रता-त्रिज्या ( Radius of curvature ) – गोलीय दर्पण जिस गोले का भाग होता है उसकी त्रिज्या को दर्पण की वक्रता-त्रिज्या कहते हैं | इसे R से सूचित किया जाता है ।
▶️प्रधान या मुख्य अक्ष ( Principal axis )– गोलीय दर्पण के ध्रुव से वक्रता केंद्र को मिलनेवाली सरल रेखा को दर्पण का प्रधान या मुख्य अक्ष कहते है ।
▶️दर्पण का द्वारक ( Aperture of mirror ) – दर्पण के परावर्तक सतह (पृष्ठ, तल) के व्यास को दर्पण का द्वारक कहते हैं ।
▶️फोकस दूरी ( Focal length ) – ध्रुव से फोकस की बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते है इसे f से सूचित किया जाता है ।
▶️वस्तु की दूरी (distance of the Object) – वस्तु से ध्रुव की बीच की दूरी वस्तु की दूरी कहलाता है इसे u से सूचित किया जाता है ।
▶️प्रतिबिंब की दूरी (distance of the image) – प्रतिबिंब से ध्रुव की बीच की दूरी प्रतिबिंब दूरी कहलाती है इसे v से सूचित किया जाता है ।

गोलीय(अवतल, उतल) दर्पणों के लिए किरण आरेखों की बनावट:-

नीचे अवतल तथा उत्तल दर्पणों के द्वारा बनने वाले वस्तु का प्रतिबिंब के लिए कुछ किरण आरेख का नियम(Rule) दिया जा रहा है उनमें से आप किन्हीं दो किरण आरेखों को उपयोग करके वस्तु का प्रतिबिम्ब बना सकते हैं ।

•Rule No – 01:-

मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश की किरण :–

⏩मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश की किरण दर्पण से परावर्तन के बाद :-

a.यदि दर्पण अवतल हो, तो वह फोकस(F) से हो कर जाएगी



b.यदि दर्पण उत्तल हो, तो वह फोकस(F) से आती हुई प्रतीत होगी


•Rule No – 02

⏩फोकस(F) की दिशा में आने वाली (आपतित) प्रकाश की किरण :-

फोकस की दिशा में आने वाली प्रकाश की किरण दर्पण से परावर्तन के बाद (दर्पण अवतल हो या उत्तल) वह मुख्य अक्ष के समांतर हो जाएगी।

• Rule No – 03

⏩वक्रता-केंद्र(C) की दिशा में आने वाली (आपतित) प्रकाश की किरण :-

वक्रता-केंद्र की दिशा में आने वाली प्रकाश की किरण दर्पण से परावर्तन के बाद(दर्पण अवतल हो या उत्तल) वह किरण उसी पथ पर (दिशा में) लौट जाएगी।

•Rule No – 04

⏩ध्रुव(P) की दिशा में आने वाली (आपतित) प्रकाश की किरण:-

ध्रुव(P) की दिशा में आने वाली प्रकाश की किरण मुख्य अक्ष के साथ (i) कोण बनाएगी (दर्पण अवतल हो या उत्तल) और दर्पण से परावर्तन के बाद भी किरण मुख्य अक्ष के साथ (i) के बराबर (r) कोण बनाती हुई निकल जाएगी।

⏩अवतल दर्पण तथा उत्तल दर्पण के कुछ मुख्य बिन्दुएं जिन्हें जानना बहुत जरूरी है:-

⏩दर्पण अवतल हो या उत्तल ऊपर चित्र में दिखाया गया है

P – दर्पण का ध्रुव
C – दर्पण का वक्रता केंद्र
F – दर्पण फोकस या मुख्य फोकस
f – दर्पण का फोकस दूरी
R – दर्पण का वक्रता त्रिज्या
v – प्रतिबिंब की दूरी
u – वस्तु की दूरी
PC – दर्पण का मुख्य अक्षय या प्रधान अक्ष
AB – मुख्य अक्ष पर रखी वस्तु
AˈBˈ – मुख्य अक्ष पर बना वस्तु का प्रतिबिंब

नोट–सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव(P) से मापी जाती है

वस्तु(बिम्ब) की दूरी हमेशा ऋणात्मक ( – ) होती है चाहे दर्पण अवतल हो या चाहे दर्पण उत्तल हो

▶️अवतल दर्पण में वस्तु(बिम्ब) की दूरी , प्रतिबिंब की दूरी और फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक ( – ) होता है
▶️उत्तल दर्पण में वस्तु(बिम्ब) की दूरी ऋणात्मक ( – ) ,प्रतिबिंब की दूरी और फोकस दूरी धनात्मक ( + ) होता है
▶️दर्पण अवतल हो या उत्तल वस्तु (AB) की ऊँचाई हमेशा धनात्मक ( + ) होता है
▶️अवतल दर्पण में प्रतिबिंब(AˈBˈ) की ऊँचाई ऋणात्मक (–) और धनात्मक ( + ) दोनों होता है (इसके लिए दर्पण का केस पढ़ना होगा)
▶️उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब की ऊँचाई हमेशा धनात्मक ( + ) होता है

अवतल दर्पण के सामने विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तु के प्रतिबिंब

⏩ जब वस्तु अनंत पर स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज(आकार) बताएं –

स्थिती(स्थान) –प्रतिबिंब फोकस(F) पर बनेगा
प्रकृति –प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा बनेगा
साइज(आकार) –प्रतिबिंब वस्तु से बहुत ही छोटा(बिन्दु के आकार का) बनेगा

⏩ जब वस्तु C के परे [अनंत और अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र(C) के बीच स्थित] हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज (आकार) बताएं –

स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब वक्रता केंद्र(C) और फोकस(F) के बीच बनेगा |
प्रकृति – प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा बनेगा |
साइज(आकार) –प्रतिबिंब वस्तु से छोटा बनेगा

⏩ जब वस्तु अवतल दर्पण के वक्रता-केंद्र(C) पर स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज (आकार) बताएं –

स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब वक्रता केंद्र(C) पर ही बनेगा
प्रतिबिंब की प्रकृति – प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा बनेगा
प्रतिबिंब की साइज(आकार) –प्रतिबिंब वस्तु के आकार के बराबर बनेगा

⏩जब वस्तु अवतल दर्पण के वक्रता-केंद्र(C) और फोकस(F) के बीच स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज (आकार) बताएं –

स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब C के परे [वक्रता केंद्र(C) और अनंत के बीच] बनेगा
प्रकृति – प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा बनेगा
साइज(आकार) –प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा बनेगा

⏩जब वस्तु अवतल दर्पण के फोकस(F) पर स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती(स्थान), प्रकृति एवं साइज(आकार) बताएं –

स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब अनंत पर बनेगा
प्रकृति – प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा बनेगा
साइज(आकार) –प्रतिबिंब वस्तु से बहुत ही बड़ा बनेगा

⏩जब वस्तु अवतल दर्पण के फोकस(F) और ध्रुव(P) के बीच स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती(स्थान), प्रकृति एवं साइज(आकार) बताएं –

स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनेगा
प्रकृति – प्रतिबिंब आभासी(काल्पनिक) और सीधा होगा
साइज(आकार) –प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा होगा

⏩अवतल दर्पण के परिपाटी का निर्देशांक चिन्ह:–

⏩जब वस्तु अनंत पर स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज(आकार) बताएं:–

स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब फोकस(F) पर दर्पण के पीछे बनेगा
प्रकृति –प्रतिबिंब आभासी और सीधा बनेगा
साइज(आकार) –प्रतिबिंब अत्यधिक छोटा, बिन्दु के साइज का बनेगा

उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब का बनना:-

⏩जब वस्तु अनंत और उत्तल दर्पण के ध्रुव(P) के बीच स्थित हो, तो वस्तु(बिम्ब) के प्रतिबिम्ब की स्थिती (स्थान), प्रकृति एवं साइज (आकार) बताएं–
या
⏩उत्तल दर्पण के प्रधान अक्ष पर रखे बिम्ब के प्रतिबिम्ब के लिए एक किरण आरेख खींचें और प्रतिबिम्ब की प्रकृति, आकार एवं स्थान को लिखें–[2019AI]

स्थिती(स्थान) – प्रतिबिंब दर्पण के पीछे (ध्रुव(P) और फोकस(F) के बीच बनेगा
प्रकृति –प्रतिबिंब आभासी और सीधा होगा
साइज(आकार) –प्रतिबिंब वस्तु से छोटा होगा

⏩चिन्ह परिपाटी(निर्देशांक चिन्ह परिपाटी):-
या
गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तन के लिए नई कार्तीय चिह्न परिपाटी दर्शाइए । [2018A]

1.दर्पण के मुख्य अक्ष(principal axis) को निर्देशांक XXˈ अक्ष माना जाता है ।
2. सभी दूरियाँ गोलीय दर्पण के ध्रुव(Pole) से मापी जाती है अर्थात, ध्रुव (P) को मूलबिन्दु(origin) माना जाता है ।

a. बिम्ब(वस्तु) हमेशा दर्पण के बायीं ओर रखा जाता है ।
b. मुख्य अक्ष के समांतर सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव(p) से मापी जाती है ।
c. मूल बिंदु के दाईं ओर की दूरियाँ धनात्मक (+) मानी जाती है ।
d. मूल बिंदु के बाईं ओर की दूरियाँ ऋणात्मक (–) मानी जाती है ।
e. मुख्य अक्ष के लंबवत ऊपर की ओर मापी जाने वाली सभी दूरियाँ धनात्मक (+) मानी जाती है ।
f. मुख्य अक्ष के लंबवत नीचे की ओर मापी जाने वाली सभी दूरियाँ ऋणात्मक (–) मानी जाती है ।

⏩अवतल दर्पण के परिपाटी का निर्देशांक चिन्ह:–

वस्तु की दूरी ( u ) = ऋणात्मक (–ve)
फोकस दूरी ( f ) = ऋणात्मक (–ve)
वस्तु की ऊँचाई ( hₒ ) = धनात्मक (+ve)
वक्रता त्रिज्या ( R ) = ऋणात्मक (–ve)

⏩जब प्रतिबिंब वास्तविक तथा उल्टा हो तो:–

प्रतिबिंब की दूरी ( v ) = ऋणात्मक (–ve)
प्रतिबिंब उँचाई ( hᵢ ) = ऋणात्मक (–ve)

⏩जब प्रतिबिंब आभासी तथा सीधा हो तो:–

प्रतिबिंब की दूरी ( v ) = धनात्मक (+ ve)
प्रतिबिंब उँचाई ( hᵢ ) = धनात्मक (+ ve)

⏩उत्तल दर्पण का चिन्ह परिपाटी:–

वस्तु दूरी ( u ) = ऋणात्मक (–ve)
फोकस की दूरी ( f ) = धनात्मक (+ ve)
वस्तु की ऊँचाई ( hₒ ) = धनात्मक (+ ve)
वक्रता त्रिज्या ( R ) = धनात्मक (+ ve)
प्रतिबिंब की दूरी ( v ) = धनात्मक (+ ve)
प्रतिबिंब की उँचाई ( hᵢ ) = धनात्मक (+ ve)

⏩उत्तल दर्पण का उपयोग गाड़ी के साइड मिरर(Side mirror) के रूप में क्यों किया जाता है?

उत्तर:- उत्तल दर्पण के उपयोग गाड़ी के साइड मिरर के रूप में इसलिए किया जाता है, क्योंकि उत्तल दर्पण किसी वस्तु का हमेशा सीधा प्रतिबिंब बनाता है जो वस्तु से छोटा होता है इसका दृष्टि क्षेत्र विस्तृत (फैला) होता है, क्योंकि ये बाहर की ओर वक्रित होता है ।
उत्तल दर्पण में वाहन चालक अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र को देख पता है, इसलिए उत्तल दर्पण का उपयोग गाड़ी के साइड मिरर के रूप में किया जाता है ।

⏩अवतल दर्पण का उपयोग दाढ़ी बनाने में क्यों किया जाता है?
या
कारण बतावें अवतल दर्पण का उपयोग हजामती दर्पण के रूप में क्यों किया जाता है? [2020AII]

उत्तर – अवतल दर्पण का उपयोग हजामती(शेविंग, दाढ़ी बनाने में) दर्पण के रूप में इसलिए किया जाता है क्योंकि जब वस्तु(चेहरा) को अवतल दर्पण के ध्रुव(P) और फोकस(F) के बीच रखा जाता है, तो उसका सीधा, बड़ा और आभासी प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है इससे चेहरे का बाल साफ-साफ और बड़े दिखाई देते हैं, जिससे हजाम को दाढ़ी बनाने में आसानी होती है और कटने का जोखिम कम हो जाता है ।

⏩अवतल दर्पण का उपयोग सोलर कूकर में क्यों किया जाता है? [2020AII]

उत्तर – अवतल दर्पण का उपयोग सोलर कुकर में इसलिए किया जाता है क्योंकि यह सूर्य के समानान्तर आने वाली किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित(एकत्रित) करता है, जिससे उसे बिंदु पर बहुत अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है और भोजन तेजी से पकता है । यह ऊष्मा सोलर कुकर के अंदर रखे काले बर्तन द्वारा अवशोषित कर ली जाती है, जिससे बिना किसी ईंधन के भोजन पकता है ।

⏩गोलीय दर्पण के मुख्य फोकस को परिभाषित करें। [2016C]

उत्तर– गोलीय दर्पण के मुख्य अक्ष के समांतर आपतित प्रकाश की किरण दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के जिस बिंदु पर मिलती है या मिलती हुई प्रतीत होती है उस बिंदु को दर्पण का मुख्य फोकस करते हैं इस F से सूचित किया जाता है ।

⏩उत्तल दर्पण के उपयोगों को लिखें।[2013A, 2015A, 2024AI, 2022AI]

उत्तल दर्पण के उपयोग निम्न है:-
1. वाहनों के साइड मिरर के रूप में
2. स्ट्रीट लाइट के परावर्तन के रूप में
3. सड़क के खतरनाक मुद्दों पर सड़क सुरक्षा दर्पण के रूप में
4. आभासी और छोटा प्रतिबिंब बनाने में
5. दुकानों और एटीएम में सुरक्षा दर्पण के रूप में

⏩अवतल दर्पण के उपयोगों को लिखें।[2013A, 2015A, 2024AI, 2022AI]

अवतल दर्पण के उपयोग निम्न है:-
1. दाढ़ी बनाने में
2. मोटरगाड़ी के अग्रदीपों में परावर्तक सतह के रूप में
3. डॉक्टर द्वारा आँख, नाक, गला आदि जाँच(निरीक्षण) करने में
4. सोलर कुकर में
5. सौर भट्ठी में
6. ऑब्जेक्ट को बड़ा दिखाने में
7. दूरदर्शी और सूक्ष्मदर्शी में

⏩हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं? [2013C, 2014C, 2019A, 2020A]

उत्तर– हम वाहनों में उत्तल दर्पण की वरीयता इसलिए देते हैं क्योंकि उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब हमेशा सीधा बनता है । इसका दृष्टि क्षेत्र काफी बड़ा होता है क्योंकि यह दर्पण वाहनों की ओर वक्रित होता है । चालक अपने पीछे के बड़े क्षेत्र का अवलोकन कर पता है । पीछे से आने वाले छोटे-बड़े वाहनों को वह दर्पण में आसानी से देख पता है इसलिए वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्चदृश्य दर्पण के रूप में वरीयता देते हैं ।

⏩आवर्धन किसे कहते हैं? वर्णन करें । [2017AII]

उत्तर– प्रतिबिंब की उँचाई और वस्तु की उँचाई के अनुपात को आवर्धन कहा जाता है | आवर्धन को m से सूचित किया जाता है । यदि वस्तु की ऊँचाई h और प्रतिबिंब की ऊँचाई hˈ है तो आवर्धन (m) = h या (m) = –v u

⏩अवतल दर्पण में R = 2f या f = R 2 सिद्ध करें। [2015A, 2024AII]

मानाकि BBˈ एक अवतल दर्पण है, जिसका P ध्रुव, F मुख्य फोकस तथा C वक्रता केंद्र है, और AB आपतित किरण, B बिंदु से परावर्तित होकर F से गुजरती है, जहाँ CB अवतल दर्पण का अभिलंब है ।
CP = R, PF = f
AB || CP
∠ABC = ∠BCF ——(i) ( एकांतर अंत : कोण )
∠ABC = ∠CBF —–(ii) (परावर्तन के नियम से) (∠i = ∠r)
∴ ∠BCF = ∠CBF { समीकरण (i) और (ii) से }
अत: ΔCBF समद्विबाहु त्रिभुज होगा |
CF = BF (यदि B तथा P एक-दुसरें के बहुत निकट हो)
∴ CF = BF = PF = f
CF + PF = CP
f + f = R
2f = R
R= 2f (Proved)
f = R 2
(फोकस दूरी वक्रता-त्रिज्या की आधी होती है)

⏩किसी उत्तल दर्पण में सिद्ध करें कि R = 2f या f = R 2 जहाँ R दर्पण की वक्रता त्रिज्या है और f दर्पण का फोकसान्तर है। [2015C]

मानाकि MN एक उत्तल दर्पण है जिसका P ध्रुव, F मुख्य फोकस तथा C वक्रता केंद्र है, और AB आपतित किरण, BE परावर्तित किरण है,
जहाँ CQ उत्तल दर्पण का अभिलंब है ।
CP = R, PF = f
परावर्तन के नियम से
∠ABQ = ∠EBQ ——(i) (परावर्तन के नियम से) (∠i = ∠r)
∠CBF = ∠EBQ —–(ii) (सम्मुख कोण से)
समीकरण (i) और (ii) से
∴ ∠ABQ = ∠CBF ———-(iii)
SP || AB
∠ABQ = ∠BCF ———-(iv) ( संगत कोण से)
समीकरण (iii) और (iv) से
∠CBF = ∠BCF
अत: ΔCBF समद्विबाहु त्रिभुज होगा |
CF = BF (यदि B बिंदु, P के बहुत ही निकट हो तो)
B=P होगा
∴ CF = BF = PF = f
PC = PF + CF
R = 2f
R= 2f (Proved)
f = R 2
(फोकस दूरी वक्रता-त्रिज्या की आधी होती है)

⏩एक अवतल दर्पण में सिद्ध करें कि 1v + 1u = 1f [2022AI, 2024AII]

मानाकि MN एक अवतल दर्पण है, जिसका P ध्रुव, F मुख्य फोकस तथा C वक्रता केंद्र है, और AQ आपतित किरण, दर्पण से परावर्तन के बाद F से होकर गुजरती है । ΔABC तथा ΔAˈBˈC में
∠ABC = ∠AˈBˈC = 90°
∠ACB = ∠AˈCBˈ (सम्मुख कोण से)
A – A (कोण-कोण समरूपता से )
ΔABC ∼ ΔAˈBˈC
ABAˈBˈ = BCBˈC
जहाँ:- [ BC = PB – PC, BˈC = PC – PBˈ]
का मान रखने पर
ABAˈBˈ = PB – PCPC – PBˈ ———————-(i)
ΔQRF तथा ΔAˈBˈF में
∠QRF = ∠AˈBˈF = 90°
∠QFR = ∠AˈFBˈ (सम्मुख कोण से)
A – A (कोण-कोण समरूपता से )
ΔQRF ∼ ΔAˈBˈF
QRAˈBˈ = RFBˈF
R बिंदु , P के बहुत ही निकट है, तो [ R = P]
जहाँ:- [ QR = AB, RF = PF, BˈF = PBˈ – PF ]
ABAˈBˈ = PFPBˈ – PF —————–(ii)
समीकरण (i) और (ii) से
PB – PCPC – PBˈ = PFPBˈ – PF ——————-(iii)
चिन्ह परिपाटी(Sign Convention) से
PB = – u, PC = – R, PF = – f, PBˈ = – v
PB, PC, PF, PBˈ का मान समीकरण (iii) रखने पर
–u–(–R)–R–(–v) = –f–v–(–f)
–u + R–R + v = –f–v + f
Rf – vf = uv – Rv – uf + Rf
Rf – vf – uv + Rv + uf – Rf = 0
– vf – uv + Rv + uf = 0
– vf – uv + 2fv + uf = 0 [ R = 2f रखने पर ]
– vf – uv + 2vf + uf = 0
– vf + 2vf – uv + uf = 0
vf – uv + uf = 0
vf + uf = uv
uf + vf = uv
दोनों तरफ uvf से भाग देने पर
ufuvf + vfuvf = uvuvf
[अंश और हर को cancel करने पर ]
1v + 1u = 1f
Proof

⏩प्रकाश के परावर्तन के कितने नियम है? [2013C, 2016AI, 2017AII, 2020AII, 2025AII]

उत्तर – दो

⏩मोटा गाड़ी चालक के सामने कौन-सा दर्पण लगा रहता है?[2017AII]

उत्तर – उत्तल दर्पण

⏩किस गोलीय दर्पण में केवल काल्पनिक प्रतिबिम्ब बनता है?[2015AI][2017AII]

उत्तर – उत्तल दर्पण में

⏩अवतल दर्पण के सामने वस्तु को कहाँ रखने पर प्रतिबिम्ब समान साइज का बनेगा? [2014AII]

उत्तर – वक्रता केंद्र (C) पर

⏩गोलीय दर्पण के फोकसान्तर एवं वक्रता त्रिज्या के बीच संबंध है? [2013A]

उत्तर – f = R 2

⏩गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20cm है । इसका फोकसान्तर क्या है? [2012A]

उत्तर – f = 10cm

⏩गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20cm है । इसका फोकसान्तर क्या है? [2012A, 2016C, 2020AII]

उत्तर – f = 10 cm
R = 20 cm
f = R 2
f = 20 2
f = 10 cm

⏩वतल दर्पण में फोकस दूरी (f) और वक्रता त्रिज्या (r) में क्या संबंध है? [2017AII]

उत्तर – f = R 2

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