| कक्षा 10वीं के बिहार मेट्रिक बोर्ड की फाइनल परीक्षा में पिछले कई वर्षों से पूछे गए भौतिक विज्ञान (Physics) अध्याय-04 विद्युत धारा(Electric Current) के सभी महत्वपूर्ण एवं बार-बार पूछे जाने वाले सब्जेक्टिव वायरल प्रश्न इस अध्याय में शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी छात्र एवं छात्राओं को इस अध्याय का कोई भी महत्वपूर्ण प्रश्न न छूटे और वह परीक्षा में बेस्ट स्कोर प्राप्त कर सके इसीलिए क्लास 10th के सभी विद्यार्थी को सलाह दी जाती है कि वे इस अध्याय को बार-बार अभ्यास और पुनरावृति अवश्य करें ताकि परीक्षा में अच्छे से अच्छे अंक हासिल कर सके! |
| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. विद्युतीय आवेश का S.I. मात्रक क्या है?[2017A, 2017C] उत्तर– कूलॉम 2. सरल सेल में धन ध्रुव का काम कौन करता है?[2015A] उत्तर– ताँबा का प्लेट 3. विद्युत धारा का S.I. मात्रक क्या है?[2012A, 2014A, 2015C] उत्तर– एम्पियर 4. विभव और विभवान्तर का S.I. मात्रक क्या है?[2014C] उत्तर– वोल्ट 5. ओम के नियम का गणितीय मान क्या है?[2016AI] उत्तर– धारा = वोल्ट/प्रतिरोध 6. विद्युत धारा के किस प्रभाव से बिजली घंटी कार्य करती है? [2016AII] उत्तर– विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव से 7. प्रतिरोध का S.I. मात्रक क्या है?[2016AII] उत्तर– प्रतिरोध का S.I मात्रक ओम है। 8. एमीटर को किस क्रम में जोड़ा जाता है?[2015AI] उत्तर– एमीटर को श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है। 9. ओम के नियम में किसका मान अचर है?[2011A, 2015AII] उत्तर– ताप का 10. एमीटर को विद्युत परिपथ के समांतर क्रम में जोड़ा जाता है या श्रेणी क्रम में?[2014AII] उत्तर– एमीटर को विद्युत परिपथ के श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है। 11. एलुमिनियम धातु के एक प्रमुख मिश्र धातु का नाम लिखें।[2016AI] उत्तर– एलुमिनियम का प्रमुख मिश्रधातु ड्यूरलुमिन है। 12. विद्युत बल्ब में किस तार का उपयोग किया जाता है?[2016C] उत्तर– टंगस्टन तार का 13. विद्युत हीटर में तार की कुंडली किस तत्व की बनी होती है?[2014AI] उत्तर– नाइक्रोम 14. ओम के नियम में किसका मान अचर होता है?[2015AII] उत्तर– ओम के नियम में ताप अचर रहता है। 15. विद्युत हीटर में विद्युत धारा के किस प्रभाव का उपयोग होता है?[2015AI] उत्तर– विद्युत हीटर में विद्युत धारा के उष्मीय प्रभाव का उपयोग होता है। 16. विद्युतधारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित एक उपकरण का नाम बताइए।[2015C] उत्तर– विद्युत हीटर 17. विद्युत बल्ब पर 100W – 220V अंकित है । बल्ब से प्रवाहित विद्युत धारा का मान बतावें।[2016A] हल:- W = 100 V = 220v विद्युत धारा(I) = = = 18. विद्युत ऊर्जा का मात्रक क्या है?[2013A] उत्तर– विद्युत ऊर्जा का मात्रक किलोवाट-घंटा है। 19. विद्युत शक्ति का S.I. मात्रक क्या होता है?[2011A] उत्तर– विद्युत शक्ति का S.I. मात्रक वाट होता है। लघु उत्तरीय प्रश्न 1. एम्पीयर की परिभाषा दें।[2021AII, 2024AI] उत्तर– जब किसी चालक से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उसे 1 एम्पियर कहते हैं । यह विद्युत-धारा का S.I मात्रक है। 2. विद्युत धारा की प्रबलता की परिभाषा दें।[2014AI, 2015AII, 2019AI, 2021AI, 2026AI] या विद्युत धारा क्या है? इसका समीकरण एवं मात्रक लिखें। [2014AI, 2015AII, 2019AI, 2021AI, 2026AI] उत्तर– किसी चालक से प्रवाहित विद्युत-धारा की प्रबलता उस चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित आवेश का परिमाण है। यदि एक(1) सेकंड में एक(1) कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस अनुप्रस्थ कार्ड से प्रवाहित धारा का मान 1 एम्पियर होता है एम्पियर विद्युत-धारा का S.I मात्रक है। या किसी चालक तार में प्रवाहित होने वाले आवेश की प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं विद्युत-धारा का S.I मात्रक एम्पियर होता है। I = 3. उस युक्ति का नाम लिखें जो किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर बनाए रखने में सहायता करती है।[2020AI] उत्तर– विद्युत सेल(Electric Cell) या बैट्री(Battery) वह युक्ति है जो किसी चालक के सिरों पर विभावांतर(Potential Difference) बनाए रखने में सहायता करती है। 4. एमीटर और वोल्टमीटर को विद्युत परिपथ में क्रमशः श्रेणी क्रम और पार्श्व क्रम में क्यों जोड़ा जाता है?[2018AI] उत्तर– एमीटर– परिपथ में एमीटर को श्रेणीक्रम में इसलिए जोड़ा जाता है ताकि संपूर्ण विद्युत धारा इससे होकर प्रवाहित हो सके। वोल्टमीटर– परिपथ में वोल्टमीटर को पार्श्वक्रम में इसलिए जोड़ा जाता है ताकि परिपथ में विद्युत धारा की मात्रा में कमी न आए। 5. विद्युत आवेश क्या है? विद्युत आवेश कितने प्रकार के होते हैं?[2017A] उत्तर– विद्युत आवेश पदार्थ का एक मौलिक गुण है जिसके कारण वह विद्युत एवं चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करता है तथा अन्य आवेशित वस्तुओं पर आकर्षक या प्रतिकर्षण बल लगता है। विद्युत आवेश दो प्रकार के होते हैं। 1. धनात्मक आवेश 2. ऋणात्मक आवेश Note:- समान आवेश(धनात्मक-धनात्मक या ऋणात्मक-ऋणात्मक) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। असमान आवेश(धनात्मक-ऋणात्मक) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। 6. विद्युत विभव से आप क्या समझते हैं, एवं इसका S.I. मात्रक लिखें।[2013A, 2022AI, 2023AII] उत्तर– किसी धन आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य उसे बिंदु का विद्युत विभव कहलाता है। विद्युत विभव का S.I मात्रक वोल्ट होता है। 7. विभवांतर से आप क्या समझते हैं?[2025AI] उत्तर– दो बिंदुओं के बीच प्रति इकाई आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य को विभांतर कहते हैं इसका S.I मात्रक वोल्ट होता है। 8. किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचे जिसमें 2V के तीन सेलों की बैटरी एवं एक 5Ω प्रतिरोधक एक 8Ω प्रतिरोधक और एक 12Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लगकुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों। [2018AII] ![]() 9. ओम के नियम के अध्ययन के लिए एक विद्युत परिपथ खींचे।[2018AI] ![]() 10. ओम के नियम को लिखें।[201AII, 2022AI] उत्तर– अचर ताप पर किसी चालक से प्रवाहित होने वाले विद्युत धारा चालक के सिरों के बीच के विभावांतर का समानुपाती होता है। यदि विद्युत धारा(I) तथा चालक के सिरों के बीच का विभावांतर(V) हो तो ओम के नियम के अनुसार V ∝ I V = IR जहाँ V = विभवांतर(वोल्ट में) I = विद्युत धारा(एम्पियर में) R = नियतांक, जिसे चालक का प्रतिरोध कहा जाता है। 11. प्रतिरोध क्या है? इसका सूत्र एवं S.I. मात्रक लिखें।[2016AII, 2022AII, 2026AI] उत्तर– चालक पदार्थ का वह गुण है जो उस पदार्थ से होकर प्रवाहित होने वाला धारा का विरोध करता है, प्रतिरोध कहलाता है। इसे R अक्षर से सूचित किया जाता है। इसका सूत्र R = प्रतिरोध का S.I मात्रक ओम(Ω) है। 12. ओम के नियम में कौन-सी राशि अचर रहती है जब तापक्रम नियत रहे? व्याख्या करें।[2024AI] उत्तर– ओम के नियम में जब तापक्रम और अन्य भौतिकअवस्थाएँ नियत रहती है तो चालक का प्रतिरोध अचर रहता है। 13. प्रतिरोध की उत्पत्ति का कारण क्या है?[2023AI] उत्तर– किसी पदार्थ का वह गुण जो उससे होकर धारा के प्रवाह का विरोध करता है, उसे उस पदार्थ का प्रतिरोध कहते हैं प्रतिरोध की उत्पत्ति तब होती है जब किसी चालक से धारा प्रवाहित की जाती है यदि धारा कम प्रवाहित होती है तो प्रतिरोध अधिक तथा जब धारा अधिक प्रवाहित होती है तो प्रतिरोध कम होता है। 14. किसी चालक का प्रतिरोध किन-किन बातों पर निर्भर करता है?[2013C, 2020AII, 2023AII] उत्तर– किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है। 1. चालक की लंबाई पर 2. चालक के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर 3. चालक के पदार्थ की प्रकृति पर 4. तापमान पर 15. विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के क्यों बनाये जाते हैं?[2018АII] उत्तर– विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के बनाये जाते हैं, क्योंकि मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता उनकी अवयवी धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है और उनका उच्च ताप पर शीघ्र ही उपचयन(दहन) नहीं होता है। 16. किसी तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल से कैसे प्रभावित होता है?[2024AII] उत्तर– किसी तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर व्युयत्क्रमानुपाती निर्भर करता है। यदि अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल बढ़ाया जाए तो प्रतिरोध घट जाता है। यदि क्षेत्रफल कम किया जाए तो प्रतिरोध बढ़ जाता है। 17. प्रतिरोधों का समूहीकरण(संयोजन) क्या है? विद्युत परिपथ के साथ वर्णन करें।[2015AI] उत्तर– विद्युत परिपथ में दो या दो से अधिक प्रतिरोधों का एक साथ जोड़ना प्रतिरोधों का संयोजन या समूहीकरण कहलाता है। प्रतिरोध का संयोजन दो प्रकार से किया जाता है 1. समांतरक्रम समूहन 2. श्रेणीक्रम समूहन 1. समांतरक्रम समूहन उत्तर– पार्श्व क्रम (समांतरक्रम) में जुड़े हुए प्रतिरोधकों का समतुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम उन प्रतिरोधकों के अलग-अलग प्रतिरोधकों के व्युत्क्रम के योग के बराबर होता है। ![]() 2. श्रेणीक्रम समूहन उत्तर– श्रेणीक्रम में जुड़े हुए प्रतिरोधकों का समतुल्य प्रतिरोध उन प्रतिरोधकों के अलग-अलग प्रतिरोधकों के योग के बराबर होता है। ![]() R = R₁ + R₂ + R₃ 18. विद्युत बल्ब का नामांकित चित्र बनाइए। [2011A, 2021AII, 2024AII] उत्तर– ![]() 19. विद्युत बल्ब में निष्क्रिय गैस क्यों भरी जाती है?[2015AI, 2022AII, 2025AI] उत्तर– विद्युत बल्ब के अंदर टंगस्टन का फिलामेंट(तंतु) का तार रहता है इस तार का बना कुंडली बल्ब के अंदर उत्पन्न तप के कारण प्रकाश देता है अगर बल्ब में ऑक्सीजन की उपस्थिति होगी तो कुंडली ऑक्सीकृत होकर जल जाएगा और बल्ब फ्यूज हो जाएगा यही कारण है कि बल्ब के अंदर निष्क्रिय गैस भरी जाती है ताकि बल्ब फ्यूज नहीं हो। 20. एक विद्युत लैम्प का अनुमतांक 60W : 220V है, जो विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 100 V से जुड़ा है। लैम्प द्वारा विद्युत आपूर्ति से कितनी धारा ली जाती है?[2019AI] हल:- P = 60W V = 220v P = VI I = = = लैम्प का प्रतिरोध R हो, तो V = 220v I = R = = = = लैम्प द्वारा प्राप्त धारा I हो, तो V = 100v R = = = = = = = 0.124A 21. यदि किसी विद्युत बल्ब के तंतु का प्रतिरोध 1200Ω है तो बल्ब 220V स्रोत से कितनी विद्युत धारा लेगा?[2021AI] हल:- R =1200Ω V = 220v = = = 0.8333A 22. 4Ω प्रतिरोध से प्रति सेकेण्ड 100W जूल ऊर्जा उपलब्ध होती है । प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए।[2014AI] या 4 Ω प्रतिरोध के प्रति सेकेण्ड 100 जूल ऊष्मा उत्पन्न होती है। प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर ज्ञात करें।[2021AI] हल:- R = 4Ω H = 100W या P = 100 J/s सूत्र से V² = P × R V² = 100 × 4 V² = 400 V = V = 20v दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1. चालक, अचालक, अर्द्धचालक एवं अतिचालक से आप क्या समझते हैं? सोदाहरण व्याख्या करें।[2017AII7, 2022AII, 2024AI] चालक(Conductor):– जिन पदार्थों से होकर विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होती है उन्हें चालक कहते हैं। मुख्य कारण:- इनमें बहुत अधिक संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉन(Free Electrons) पाए जाते हैं। प्रतिरोध:- इनका विद्युत प्रतिरोध(lResistance) बहुत ही कम होता है। उदाहरण:– चाँदी(Silver):– यह विद्युत का सबसे अच्छा चालक है। ताम्बा(Copper):– बिजली के तारों में सबसे ज्यादा उपयोग होता है। एल्यूमिनियम(Aluminium):– हल्के और सस्ते तारों के लिए उपयोग होता है। अशुद्ध जल/मानव शरीर अचालक या कुचालक(Insulator):– जिन पदार्थों से होकर विद्युत धारा का प्रवाह बिल्कुल नहीं होता है उन्हें अचालक या कुचालक कहते हैं। मुख्य कारण:– इनमें में मुक्त इलेक्ट्रॉन(Free Electrons) नहीं होते हैं, सभी इलेक्ट्रॉन परमाणुओं से मजबूती से बंधे होते हैं। प्रतिरोध:– इनका प्रतिरोध अत्यधिक (लगभग अनंत) होता है। उदाहरण:– सूखी लकड़ी, प्लास्टिक, रबड़, कांच और चीनी मिट्टी अर्द्धचालक(Semiconductor):– ऐसे पदार्थ है जिनकी विद्युत चालकता चालक से कम लेकिन अचालक से अधिक होती है उन्हें अर्धचालक कहते हैं। उदाहरण:– सिलिकॉन:– कंप्यूटर चिप्स और डायोड बनाने में मुख्य रूप से उपयोग होता है। जर्मेनियम:– ट्रांजिस्टर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में प्रयुक्त होता है। गैलियम आर्सेनाइड:– LED और सोलर सेल में उपयोग होता है। अतिचालक(Superconductor):– ऐसे पदार्थ जिसकी विद्युत प्रतिरोधकता एक निश्चित निम्न तापमान(जिसे क्रांतिक तापमान या Critical Temperature कहते हैं ) से नीचे पहुँचने पर शून्य हो जाती है ऐसी अवस्था में विद्युत धारा बिना ऊर्जा हानि के प्रवाहित हो सकती है उसे अतिचालक कहते हैं। उदाहरण:– पारा:– 4.2K (लगभग–268.8º) तापमान पर अतीचालक बन जाता है। सीसा:– 7.25K पर अतीचालक प्रदर्शित करता है YBCO(Yttrium Barium Copper Oxide):– पर यह एक उच्च तापमान अतिचालक है। 2. विद्युत धारा विभवांतर और प्रतिरोध में संबंध बताएं[2011A] उत्तर– ओम के नियम से अचर ताप पर किसी चालक में बहने वाले विद्युत धारा की प्रबलता, चालक के बीच उत्पन्न विभावांतर के समानुपाती होता है। अगर विद्युत धारा I, विभवांतर V है तो I ∝ V जबकि ताप अचर है विद्युत धारा(I) एम्पियर अगर V = I वोल्ट, R = 1Ω तो धारा का मान एक एम्पियर होगी। R को चालक का प्रतिरोध भी कहा जाता है। 3. ओम के नियम को लिखें। इसके सत्यापन के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें।[2013A, 2015C, 2018AI, 2020AI] ओम के नियम– अचर ताप पर किसी चालक से बहने वाली विद्युत धारा चालक में उत्पन्न विभवान्तर के समानुपाती होता है। अगर चालक में बहने वाली विद्युत धारा (I) है और चालक उत्पन्न विभवान्तर V है, तो I ∝ V जबकि ताप अचर है। ओम क नियम को प्रयोग द्वारा प्रमाणित करने के लिए सर्वप्रथम चालक तार, आमीटर, वोल्टमीटर, दाब कुंजी बैटरी, परिवर्तनशील प्रतिरोध इत्यादि लेकर चित्रानुसार सजा दिया जाता है। आमीटर को श्रेणीक्रम तथा वोल्टमीटर को समांतर क्रम में जोड़ा जाता है। अब दाब कुंजी दबाकर बैटरी से धारा प्रवाहित की जाती है । आमीटर (A) से धारा का मान तथा वोल्टमीटर (V) से विभवांतर का मान ज्ञात हो जाता है । परिवर्तनशील प्रतिरोध को स्लाइड पर आगे-पीछे खिसकाकर प्रयोग को बार-बार दुहराया जाता है । अलग-अलग स्थितियों में आमीटर से धारा का मान तथा वोल्टमीटर से विभवांतर का मान ज्ञात कर लिया जाता है। प्राप्त मान को देखने से पता चलता है कि विभवांतर का मान दुगुना होने पर धारा का मान भी दुगुना हो जाता है। जबकि विभवांतर का मान आधा होने पर धारा का मान भी आधा हो जाता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि चालक के सिरों के बीच का विभवांतर उस चालक से प्रवाहित होनेवाली धारा का सीधा समानुपाती होता है। ![]() अब विभवांतर (V) को 𝑥–अक्ष पर तथा धारा (I) को 𝑦–अक्ष पर रखकर एक ग्राफ खींचा जाता है तो एक सरल रेखा के रूप में प्राप्त होती है जो ओम के नियम को साबित करता है। यह सरल रेखा मूल बिंदु से होकर गुजरता है। 4. प्रतिरोध क्या है? किसी कुण्डली का प्रतिरोध आमीटर और वोल्टमीटर की सहायता से ज्ञात करने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें। [2016AII] प्रतिरोध– किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वह विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, प्रतिरोध कहलाता है । प्रतिरोध का S.I मात्रक ओम है। प्रतिरोध (R) = चित्र में एक विद्युत परिपथ दिखाया गया है। प्रतिरोध R के समांतर क्रम में वोल्टमीटर V और श्रेणीक्रम में आमीटर A को परिपथ में दिखाया गया है। W एक चालक तार हैं जो बैटरी से संबंधित है। यहाँ कई सेलों M, N, S, T आदि को श्रेणीबद्ध किया गया है। ताकि आवश्यकतानुसार विद्युत धारा के मान को बढ़ाया जा सके । ![]() W को बारो-बारी से M, N, S, T से सटाकर हरेक अवस्था में आमीटर और वोल्टमीटर नोट किया जाता है । अगर आमीटर का मान I है और वोल्टमीटर का मान V है तो हरेक मान में R = इस प्रकार कुण्डली R का प्रतिरोध हमें प्राप्त हो जाता है। 5. ओम के नियम को लिखें । एमीटर एवं वोल्टमीटर द्वारा इस नियम की जाँच करें।[2013AI] ओम के नियम– अचर ताप पर किसी चालक में बहने वाली विद्युत धारा की शक्ति चालक में उत्पन्न विभवांतर के समानुपाती होता है। मान लिया कि चालक से बहने वाली धारा (I) है और चालक में उत्पन्न विभवांतर V है, तो ओम के नियम से, I ∝ V, जबकि ताप अचर है। V = IR, जहाँ R एक अचर राशि है। इसे चालक का प्रतिरोध कहा जाता है । ![]() जाँच– चित्र में एक विद्युत परिपथ दिखाया गया है । बैटरी, ऐमीटर तथा प्रतिरोधक R श्रेणीक्रम में परिपथ में संयोजित हैं। V वोल्टमीटर को समान्तर क्रम में जोड़ा गया है। विद्युत परिपथ में कुछ प्रतिरोध देकर धारा बहायी जाती है । ऐमीटर तथा वोल्टमीटर का मान नोट किया जाता है। अगर ऐमीटर का मान I₁ और इसके संगत वोल्टमीटर का मान V₁, है, तो ![]() अतः ओम के नियम की सत्यता की जाँच हो जाती है । अगर विभवांतर को 𝑥–अक्ष पर और धारा को 𝑦–अक्ष पर लेकर एक ग्राफ खींचा जाये, तो यह ग्राफ एक सरल रेखा प्राप्त होता है तथा मूल बिंदु से ग्राफ गुजरता है। अतः ओम केनियम की सत्यता की जाँच हो जाती है । 6. प्रतिरोधों के पार्श्वक्रम संयोजन किसे कहते हैं? प्रतिरोध R₁ , R₂ तथा R₃ को पार्श्व क्रम में संयोजित करने पर समतुल्य प्रतिरोध का व्यंजक प्राप्त करें।[2017AII, 2019AI, 2021AII] या सिद्ध करें कि जहाँ R, पार्श्वक्रम में संयोजित प्रतिरोधकों R₁, R₂ और R₃ का समतुल्य प्रतिरोध है । प्रतिरोधों के पार्श्वक्रम(समान्तर क्रम) संयोजन:– जब सभी प्रतिरोधों के पहले छोर को एक साथ तथा दूसरे छोर को एक साथ जोड़ा जाता है तो इस प्रकार के संयोजन को पार्श्वक्रम(समान्तर क्रम) संयोजन कहते हैं। मानाकि परिपथ में तीन प्रतिरोध R₁ , R₂ और R₃ को समांतर क्रम में जोड़ा गया है तथा उनके बीच धारा I₁ , I₂ और I₃ प्रवाहित होती है, तो मुख्य परिपथ में कुल धारा I = I₁ + I₂ + I₃ ![]() ओम के नियम से V = IR I = I = I₁ + I₂ + I₃ दोनों तरफ V कैंसिल करने पर 7. श्रेणीक्रम में संयोजित तीन विभिन्न मान के प्रतिरोधों के समतुल्य प्रतिरोध के लिए व्यंजक प्राप्त करें।[2014C, 2019AI, 2021AII] या सिद्ध करें कि, R = R₁ + R₂ + R₃ जहाँ R, श्रेणीक्रम में संयोजित प्रतिरोधकों R₁, R₂ और R₃ का समतुल्य प्रतिरोध है। मानाकि परिपथ में तीन प्रतिरोध R₁, R₂ और R₃ को णीक्रम में जोड़ा गया है तथा उनके बीच विभवांतर V₁, V₂ और V₃ है और धारा I प्रवाहित होती है। परिपथ में कुल विभवांतर V = V₁ + V₂ + V₃ ![]() ओम के नियम से V = IR V = V₁ + V₂ + V₃ IR = IR₁ + IR₂ + IR₃ IR = I(R₁ + R₂ + R₃) दोनों तरफ I कैंसिल करने पर 8. विद्युत शक्ति क्या है? निगमन करें H = I²Rt जहाँ H, किसी प्रतिरोधक R में विद्युत धारा I द्वारा t समय में उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा है। [2018AII] किसी विद्युत परिपथ में जिस दर से विद्युत ऊर्जा स्थानांतरित होती है उसे विद्युत शक्ति कहते हैं। इसे P से निरूपित करते हैं , P = VI इसका S.I मात्रक वाट(W) है इसका बड़ा मात्रक किलो-वाट(KW) है। सूत्र P = जहाँ, P = विद्युत शक्ति(वाट) W = किया गया कार्य या व्यय हुई ऊर्जा(जूल) t = समय(सेकण्ड) विद्युत शक्ति का एक अन्य सूत्र P = VI जहाँ, V विभवांतर तथा I विद्युत धारा है जूल के ऊष्मा नियम H = I²Rt का निगमन मानाकि किसी प्रतिरोधक R में I धारा t समय तक प्रवाहित होती है। विद्युत कार्य(ऊर्जा) = शक्ति × समय W = Pt ——(i) P = VI P का मान समीकरण (i) में रखने पर W = VIt ——(ii) ओम के नियम से V = IR V का मान समीकरण (ii) में रखने पर W = (IR)It W = I²Rt विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है, इसलिए H = W अतः H = I²Rt जहाँ, H = उत्पन्न ऊष्मा(जूल) I = विद्युत धारा(एम्पियर) R = प्रतिरोध(ओम) t = समय(सेकंड) Note:– किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग (I²) के समानुपाती होता है। प्रतिरोध (R) के समानुपाती होता है। समय (t) के समानुपाती होता है। इसे जूल का ऊष्मा नियम(Joule’s Law of Heating) कहते हैं। 9. जूल के तापन(ऊष्मा) नियम से आप क्या समझते हैं? उत्तर– जब किसी विद्युत चालक (तार) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो उसमें प्रतिरोध के कारण कितनी उष्मा उत्पन्न होती है इसे जूल का ताप(ऊष्मा) नियम कहते हैं। |
Class 10th भौतिक विज्ञान फाइनल मैट्रिक बोर्ड परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण राशियाँ एवं उनके S.I मात्रक तथा प्रतीक
| राशि | S.I मात्रक | प्रतीक |
|---|---|---|
| प्रतिरोध | ओम | Ω |
| विभवांतर | वोल्ट | v |
| विद्युत धारा | एम्पियर | A |
| प्रतिरोधकता | ओम-मीटर | Ω-m |
| शक्ति | वाट | W |
| कार्य | जूल | J |
| ऊर्जा | जूल | J |
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