| कक्षा 10th के बिहार मेट्रिक बोर्ड की फाइनल परीक्षा में पिछले कई वर्षों से पूछे गए भौतिक विज्ञान (Physics) अध्याय-05 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव(Magnetic Effects Of Electric Current) के सभी महत्वपूर्ण एवं बार-बार पूछे जाने वाले सब्जेक्टिव वायरल प्रश्न इस अध्याय में शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी छात्र एवं छात्राओं को इस अध्याय का कोई भी महत्वपूर्ण प्रश्न न छूटे और वह परीक्षा में बेस्ट स्कोर प्राप्त कर सके इसीलिए क्लास 10th के सभी विद्यार्थी को सलाह दी जाती है कि वे इस अध्याय को बार-बार अभ्यास और पुनरावृति अवश्य करें ताकि परीक्षा में अच्छे से अच्छे अंक हासिल कर सके! |
| Quick Recap:– 👉🏿 चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का मात्रक ऑस्टेंड है। 👉🏿 चुंबक के सजातीय ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण और विजातीय ध्रुवों के बीच आकर्षण होता है। 👉🏿 किसी चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसके बल का संसूचन किया जा सकता है, चुंबकीय क्षेत्र कहा जाता है। 👉🏿 चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के उत्तर ध्रुव से प्रकट होती हैं तथा दक्षिण ध्रुव पर विलीन हो जाती हैं। 👉🏿 चुंबकीय क्षेत्र वह क्षेत्र है जिसमें चुंबकीय बल की पहचान की जा सकती है। 👉🏿 चुंबक पत्थर एक प्रकार का लौह अयस्क है जिसे मैग्नेटाइट कहते हैं। यह प्राकृतिक चुंबक है। 👉🏿 चुंबक के दो गुण हैं – लौह वस्तुओं को आकर्षित करना और स्वतंत्र अवस्था में उत्तर दक्षिण में सजना। 👉🏿 वह प्रक्रम जिसके द्वारा किसी चालक में परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र में धारा प्रेरित होती है, वैद्युत चुंबकीय प्रेरण कहलाता है। 👉🏿 विद्युत मोटर एक ऐसी युक्ति है जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरित करती है। 👉🏿 दो क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं। अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. चुंबक के कितने ध्रुव होते हैं?[2016C] उत्तर– दो 2. विद्युत मोटर में ऊर्जा का रूपांतरण कैसे होता है? [2016A] उत्तर– विद्युत मोटर में विद्युत ऊर्जा का रूपांतरण यांत्रिक ऊर्जा में होता है। 3. दिष्ट धारा(DC) के कुछ स्रोतों के नाम लिखें[2012A] उत्तर– दिष्ट धारा के कुछ स्रोतों के नाम निम्नलिखित हैं। बैटरी, सेल, डीसी जनरेटर 4. प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करने वाले कुछ स्रोतों के नाम लिखें[2013C, 2016AI] उत्तर– AC डायनेमो 5. डायनेमो किस सिद्धांत पर कार्य करता है?[2016C] उत्तर– विद्युत चुंबकीय प्रेरण 6. डायनेमो में ऊर्जा का कैसा रूपांतरण होता है?[2014C] उत्तर– यांत्रिक ऊर्जा का रूपांतरण विद्युत ऊर्जा में 7. विद्युत धारा उत्पन्न करने की युक्ति को क्या कहते हैं?[2013C] उत्तर– जनरेटर या विद्युत जनित्र लघु उत्तरीय प्रश्न 1. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव को दिखाने हेतु एक प्रयोग का वर्णन करें[202AI] उत्तर– विद्युत धारा के चुम्बकिय प्रभाव को प्रदर्शित करने के लिए एक सीधा चालक तार, बैटरी, कुंजी(स्विच) तथा चुम्बक सुई (कम्पास) लिया जाता है चालक तार को कम्पास के ऊपर समानांतर रखा जाता है और उसे बैटरी से जोड़ दिया जाता है। जब स्विच खुला रहता है, तब कम्पास की सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थिर रहती है जैसे ही स्विच बंद कर किया जाता है और तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है। कंपास की सुई अपनी स्थिति से विचलित हो जाती है स्विच खोलने पर सुई पुनः अपनी मूल स्थिति में आ जाती है। इस प्रयोग से सिद्ध होता है कि विद्युत धारा प्रवाहित करने वाले चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है यही विद्युत धारा का चुम्बकिय प्रभाव कहलाता है। 2. दो चुंबक क्षेत्र रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करती?[2019AII] उत्तर– दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं, अगर वह ऐसा करें तो इसका अर्थ होगा की कटान बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ हैं जो कि भौतिक रूप से संभव नहीं है। 3. किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ खींचे [2018AI] उत्तर– ![]() 4. किसी क्षैतिज संचरण तार में पूर्व से पश्चिम की दिशा की ओर विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है इसके ठीक नीचे के किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी [2018] उत्तर– विद्युत धारा पूरब से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। दक्षिण हस्त अंगूष्ठ नियम के लागू करने पर हमें तार के नीचे किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा उत्तर से दक्षिण की ओर प्राप्त होती है। तार के ठीक ऊपर किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर है। 5. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों को लिखे [2018AII, 2024AI] उत्तर– चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों निम्नलिखित हैं। a. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र होती है। b. किसी बिंदु पर क्षेत्र रेखा की स्पर्शरेखा उसे बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती है। c. दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती है। d. जहाँ क्षेत्र रेखाएँ अधिक सघन (पास-पास) होती है वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है। e. ध्रुवों के निकट क्षेत्र रेखाएँ अधिक सघन होती है इसलिए वहाँ चुंबकीय क्षेत्र सबसे अधिक मजबूत होता है। f. क्षेत्र रेखाओं की संख्या चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का संकेत देती है। 6. विद्युत चुंबक कैसे कार्य करता है?[2025AII] उत्तर– जब किसी तार की कुंडली(Coil) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है यदि इस कुंडली के भीतर नरम लोहे(Soft Iron) का क्रोड रखा जाए तो वह चुंबकित हो जाता है और एक शक्तिशाली विद्युत चुंबक बन जाता है जब विद्युत का प्रवाह बंद हो जाता है, तो चुंबकीय क्षेत्र गायब हो जाता है तथा चुंबकत्व समाप्त हो जाता है। 7. परिनालिका किसे कहते हैं? परिनालिका का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाएं[2013A] उत्तर– जब एक लंबे विद्युतरोधित चालक तार को सर्पिल रूप में इस प्रकार लपेटा जाए कि तार के फेरे एक-दूसरे से अलग तुरंत अगल-बगल हो, तो इस प्रकार की व्यवस्था को परिनालिका कहते हैं। परिनालिका का स्वच्छ नामांकित चित्र ![]() 8. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव से संबंधित दक्षिण हस्त अंगूठा का नियम लिखे [2014AI, 2021AI] उत्तर– यदि आप अपने दाहिने हाथ में विद्युत धारावाही चालक(तार) को इस प्रकार पकड़ते हैं कि आपका अंगूठा विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करता है, तो आपकी मुड़ी हुई उंगलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाती है। 9. फ्लेमिंग के वाम हस्त(बायाँ हाथ) नियम को लिखें[2019AII] उत्तर– यदि हम अपने बाएँ हाथ के अंगूठे, तर्जनी(First Finger) और मध्यमा(Middle Finger) को इस प्रकार फैलाएँ कि तीनों एक-दूसरे के लंबवत हो, तो तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र(Magnetic Field) की दिशा को दर्शाती है, मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा(Electric Current) की दिशा को दर्शाती है और अंगूठा चालक पर लगने वाले बल(Force) की दिशा को दर्शाता है। याद करने का सबसे आसान ट्रिक F-B-I F-(Force-बल)- अँगूठा(Thumb) B-(Magnetic Field-चुम्बकीय क्षेत्र)-तर्जनी(First Finger) I-(Current-विद्युत धारा)-मध्यमा(Middle Finger) ![]() 10. फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त(दायाँ हाथ) के नियम लिखें[2018AII, 2022AII] उत्तर– अपने दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अंगूठे को इस प्रकार फैलाए की ये तीनों एक दूसरे के परस्पर लम्बवत हों यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर संकेत करती है तथा अंगूठा चालक की गति की दिशा की ओर संकेत करता है तो मध्यमा चालक में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा दर्शाता है। ![]() 11. मैक्सवेल के दक्षिण हस्त(दायाँ हाथ) के नियम लिखिए या मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम लिखिए उत्तर– यदि धारावाही तार को दाएं हाथ की मुट्ठी में इस प्रकार पकड़ा जाए कि अंगूठा धारा की दिशा की ओर संकेत करता हो तो हाथ की उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताएगी इसे मैक्सवेल के दक्षिण हस्त के नियम कहते हैं। ![]() 12. विद्युत मोटर के सिद्धांत को लिखें[2020AII] उत्तर– जब किसी कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडली पर एक बल युग्म कार्य करने लगता है यह बल कुंडली को उसकी धुरी के चारों और घूमाने का प्रयास करता है यदि कुंडली स्वतंत्र हो तो वह घूमने लगती है यही विद्युत मोटर का सिद्धांत है। 13. एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में एक चालक लूप को घूर्णित करने पर किस प्रकार की धारा चलेगी? [2023AII] उत्तर– एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में एक चालक लूप को घूर्णित करने पर उसमें प्रत्यावर्ती धारा(AC) उत्पन्न होती है। 14. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण से आप क्या समझते हैं?[2021AII, 2025AI] उत्तर– जब चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन से चालक में धारा उत्पन्न होती है तो इसे विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं। 15. धातु के आवरण वाले साधित्रों को भू-संपर्क करना क्यों आवश्यक है? [2023AII] उत्तर– धातु के आवरण (मेटल बॉडी) वाले विद्युत साधित्रों (जैसे-प्रेस, प्रिज्म, गीजर आदि) को भू-सम्पर्कित करना सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है, जिसे विद्युत साधित्रों को छुने पर झटका नहीं लगता है। 16. डायनेमो क्या है? इसका क्या उपयोग है?[2025AII] उत्तर– विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करने वाला एक ऐसा संसाधन जिसमें यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है डायनेमो कहलाता है। डायनेमो का क्या उपयोग a. साइकिल की लाइट जलाने के लिए b. बिजली उत्पादन लिए जनरेटरों में c. छोटे विद्युत उपकरणों को चलाने में 17. विद्युत फ्यूज क्या है? यह किस मिश्रधातु का बना होता है? [2017AI] उत्तर– विद्युत फ्यूज एक ऐसी युक्ति है जो विद्युत परिपथ में जुड़े उपकरणों को नष्ट होने से बचाता है, यह उच्च प्रतिरोध एवं कम गलनांक वाले तार का बना होता है। जब कभी भी विद्युत परिपथ में अचानक धारा का मान बढ़ जाता है, तो यह फ्यूज गल जाता है जिसके कारण विद्युत धारा का संपर्क अन्य उपकरणों से टूट जाता है और यह उपकरण क्षतिग्रस्त होने से बच जाते हैं। विद्युत फ्यूज सामान्यतः टिन और सीसा की मिश्रधातु से बना होता है। 18. विद्युत परिपथ में फ्यूज तार क्यों लगाए जाते हैं?[2026AI] उत्तर– विद्युत परिपथ में फ्यूज तार एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण के रूप में कार्य करता है। जब किसी कारण से परिपथ में अत्यधिक विद्युत धारा बहती है, तो यह तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है। इससे महंगे बिजली के उपकरण जलने या आग लगने जैसी दुर्घटनाओं से सुरक्षित रहता हैं। इसलिए विद्युत परिपथ में फ्यूज तार लगाए जाते हैं। 19. फ्यूज तार लगाने के मुख्य कारण को लिखें उत्तर– फ्यूज तार लगाने के मुख्य कारण निम्न है 1. अतिभारण(Overloading) से बचाव:– जब एक ही सॉकेट में कई भारी उपकरण (जैसे हीटर, एसी) एक साथ चलाए जाते हैं, तो क्षमता से अधिक बिजली खींचने पर फ्यूज तार पिघल कर कनेक्शन काट देता है। 2. लघुपथन(Short Circuit) से सुरक्षा:– यदि कभी तारों के खराब इन्सुलेशन के कारण पेज और न्यूट्रल तार आपस में सीधे टकरा जाते हैं, तो अचानक बहुत अधिक करंट बहने लगता है फ्यूज तार तुरंत पिघलकर उपकरणों को खराब होने से बचाता है। 3. उपकरण का बचाव:– यह सर्किट को ब्रेक करके टीवी, फ्रिज और कंप्यूटर जैसे महंगे उपकरणों को हाई-वोल्टेज या पावर सर्ज से बचाता है। 20. फ्यूज तार के प्रमुख विशेषताओं को लिखें। उत्तर– फ्यूज तार के प्रमुख विशेषता निम्न है। 1. इसका गलनांक(Melting Point) कम होता है। 2. इसका विशिष्ट प्रतिरोध(Resistivity) अधिक होता है। 3. अधिक धारा प्रवाहित होने पर यह शीघ्र गर्म होकर पिघल जाता है। 4. यह विद्युत परिपथ को ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा प्रदान करता है। 4. सामान्यत: यह टीन और सीसे के मिश्रधातु से बनाया जाता है। 5. यह घरों में 220 वोल्ट(V) पर 5 एम्पियर(A) का फ्यूज व्यवहार किया जाता है। 21. घरेलू विद्युत परिपथ में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है? [2019AI] उत्तर– घरेलू विद्युत परिपथ में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग नहीं किया जाता है। क्योंकि यदि एक बल्ब या उपकरण खराब हो जाए तो सभी उपकरण बंद हो जाते हैं साथ ही प्रत्येक उपकरण को पूरी विद्युत शक्ति नहीं मिलती है और उन्हें अलग-अलग चालू या बंद भी नहीं किया जा सकता है। इसलिए घरों में समांतर क्रम संयोजन का उपयोग किया जाता है। 22. प्रत्यावर्ती धारा(AC) में कौन-सी दो कमियाँ होती है? उत्तर– प्रत्यावर्ती धारा(AC) की कमियाँ निम्नलिखित हैं। 1. इसे सीधे बैटरी में संग्रहित नहीं किया जा सकता। 2. कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए इसे दिष्ट धारा(DC) में बदलना पड़ता है। 3. प्रत्यावर्ती धारा(AC) से विद्युत झटका का खतरा अपेक्षाकृत अधिक होता है। 4. इसकी दिशा और परिमाम लगातार बदलते रहते हैं, जिससे कुछ विशेष कार्यों में इसका उपयोग कठिन होता है। 23. लघुपथन किसे कहते हैं? उत्तर– कई कारणों से कभी-कभी विद्युतमय तार (लाल तार) और उदासीन (काला तार) आपस में सट जाते हैं जिसके कारण परिपथ का प्रतिरोध सुन हो जाता है और धारा बहुत तेजी से बहने लगती है इस लघुपथन कहा जाता है। 24. अतिभारण से आप क्या समझते हैं? उत्तर– जब किसी विद्युत परिपथ में आवश्यकता से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो इसे अतिभारण कहते हैं। 25. भू-संपर्क तार क्या है? इसका क्या कार्य है? [2019AI] उत्तर–यह एक ऐसी युक्ति है जिसे भूमि के अंदर स्थित धातु के प्लेट से संयोजित किया जाता है ताकि व्यक्ति को तीव्र विद्युत आघात से बचाया जा सके इस तार पर प्रायः हरा विद्युतरोधी आवरण होता है। संपर्क तार का कार्य:– भू-संपर्क तार का कार्य व्यक्ति को विद्युत आघात से बचाना किसी विद्युत परिपथ में भू-संपर्क तार को सुरक्षा उपाय के रूप में प्रयोग किया जाता है। 26. विद्युत मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है? उत्तर– विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक् परिवर्तन का कार्य करता है विभक्त वलय के कारण प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद विद्युत धारा की दिशा बदलती रहती है जिसके कारण कुंडली तथा धुरी का निरंतर घूर्णन होता रहता है, यदि विद्युत मोटर में विभक्त वलय न लगाया जाए तो मोटर आधा चक्कर घूमकर रुक जाएगी। 27. विद्युत मोटर क्या है? [2015AI, 2016AI, 2019AII, 2022AI] उत्तर– विद्युत मोटर एक ऐसा उपकरण है जो विद्युत ऊर्जा को है यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है यह चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल के सिद्धांत पर कार्य करता है उसे विद्युत मोटर हैं। 28. प्रत्यावर्ती धारा(AC) और दिष्ट धारा(DC) में अंतर स्पष्ट करें [2017AII, 2020AII, 2022AII]] उत्तर– प्रत्यावर्ती धारा(AC) और दिष्ट धारा(DC) में निम्नलिखित अंतर है। |
| S.N | प्रत्यावर्ती धारा(AC) | दिष्ट धारा(DC) |
|---|---|---|
| 01. | धारा के दिशा समय के साथ बदलती रहती है | धारा की दिशा हमेशा एक ही रहती है |
| 02. | धारा का परिमाण लगातार बदलता रहता है | धारा का परिमाण लगभग स्थिर रहता है |
| 03. | इसकी आवृत्ति(Frequency) होती है, भारत में 50Hz | इसकी आवृत्ति(Frequency) 0 Hz होती है |
| 04. | इस ट्रांसफॉर्मर द्वारा आसानी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है | ट्रांसफॉर्मर द्वारा सीधे नहीं बदला जा सकता है |
| 05. | लंबी दूरी तक विद्युत संचरण के लिए अधिक उपयुक्त है | लंबी दूरी के संचरण के लिए कम उपयुक्त है |
| 06. | उत्पादन लागत अपेक्षाकृत कम होती है | उत्पादन लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है |
| 07. | घरेलू एवं औद्योगिक विद्युत आपूर्ति में उपयोगी होती है | बैटरी, सेल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में उपयोग होती है |
| 08. | जनित्र(Alternator) से उत्पन्न की जाती है | सेल, बैटरी या DC जनित्र से प्राप्त होती है |
| 09. | विद्युत हानि कम करके दूर तक भेजी जा सकती है | संचरण में अपेक्षाकृत अधिक हानि होती है |
| 10. | इसका तरंगरूप(Waveform) सामान्यत: साइन तरंग होता है | इसका तरंगरूप(Waveform) सीधी रेखा जैसा होता है |
फाइनल मैट्रिक बोर्ड परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूपांतरण |
| S.No | मुख्य उपकरण | ऊर्जा रूपांतरण |
|---|---|---|
| 01. | विद्युत मोटर/पंखा | विद्युत ऊर्जा को |
| 02. | जनरेटर/डायनमो | यांत्रिक ऊर्जा को |
| 03. | बैटरी | रासायनिक ऊर्जा को |
| 04. | विद्युत बल्ब / LED | विद्युत ऊर्जा को |
| 05. | सौर सेल | सौर ऊर्जा को |
| 06. | पवन चक्की | पवन ऊर्जा को |
| 07. | हीटर /इस्त्री /गीजर | विद्युत ऊर्जा को |
| दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1. धारावाही चालक तार के इर्द-गिर्द चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है इसे दिखाने के लिए ऑर्स्टेन्ड के प्रयोग का वर्णन करें[2019AI, 2025AII] उत्तर– किसी चुम्बकीय पदार्थ में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसके परमाणुओं में चुम्बकत्व का गुण आ जाता है जिससे वह पदार्थ चुम्बकित हो जाता है। ![]() ऑस्टेंड के प्रयोग से धारावाही चालक के अगल-बगल चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है जिसे एक प्रयोग से दिखाया जा सकता है। चित्र में एक मोटे तार को लकड़ी के स्तंभ पर क्षैतिज अवस्था में समायोजित किया गया है। इसके नीचे एक सूई चुम्बक रखा गया है। तार MP को सूई चुम्बक के अक्ष के समानान्तर रखा जाता है। एक बैट्री B और कुंजिका K को मोटे तार से श्रेणीबद्ध जोड़ा जाता है। जब तार से कोई विद्युत धारा का प्रवाह नहीं होता है तो सूई चुम्बक साम्यावस्था में उत्तर-दक्षिण की दिशा में रहता है। अब विद्युत धारा मोटे तार से MP दिशा में प्रवाहित होती है। (i) यदि तार में धारा का प्रवाह M से P की ओर है अर्थात् उत्तर से दक्षिण की ओर है तो तार के नीचे रखे सूई चुम्बक का उत्तरी ध्रुव पश्चिम की ओर विक्षेपित होगा। (ii) अगर सूई को तार के ऊपर रखा जाय और विद्युतधारा उत्तर से दक्षिण की ओर ही प्रवाहित हो तो सूई चुम्बक का उत्तरी ध्रुव पूरब की ओर विक्षेपित होगा। (iii) अगर तार में विद्युत धारा की दिशा पलट दी जाए अर्थात् विद्युत धारा दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित हो तो चुम्बकीय सूई का N ध्रुव में दोनों स्थितियों अर्थात् तार के ऊपर या नीचे रहने पर पूर्व की अपेक्षा पश्चिम की ओर विक्षेप होगा। इसी प्रकार सूई के नीचे रहने पर विक्षेप पूर्व की ओर होगा। चुम्बकीय सूई में विक्षेप यह बतलाता है कि चालक से धारा प्रवाहित करने पर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। अतः धारा के चुम्बकीय प्रभाव का स्पष्ट प्रदर्शन हो जाता है। 2. विद्युत मोटर क्या है? इसके सिद्धांत और क्रियाविधि का सचित्र वर्णन करें विभक्त वलय का क्या महत्व है?[2016AI, 2019AII, 2022AI] उत्तर– विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है, कि चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक रखने पर एक बल आरोपित होता है, जो चालक को किसी अक्ष पर घूमा सकता है। इसमें विद्युत ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है। कार्यविधि:– चुम्बक के दो ध्रुवों के बीच एक धारावाही कुण्डली है। जब धारा को प्रवाहित करना शुरू किया गया, तो कुण्डली क्षैतिज अवस्था में है आर्मेचर की कुण्डली में प्रवाहित धारा की दिशा ABCD है। कुण्डली पर आरोपित बल की दिशा फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम से ज्ञात कर सकते हैं कि कुण्डली के भाग AB पर बल ऊपर की ओर आरोपित होता है। इस प्रकार यह दो बराबर, विपरीत तथा समांतर बलों का युग्म बन जाता है, जो कुण्डली को घड़ी की सूइयों की दिशा में घूमता है। ![]() कुण्डली के आधे घूर्णन के पश्चात् दिक् परिवर्तन की ध्रुवता भी बदल जाती है, क्योंकि अब विभक्त सर्पीवलय Y का संबंध ब्रुश P के साथ हो जाता है तथा X का संबंध ब्रुश Q से हो जाता है। अतः अब भुजा CD पर बल ऊपर की ओर लगता है और इस तरह फिर से बलों का युग्म बन जाता है, जिससे कुण्डली घड़ी की सूइयों की दिशा में घूमता है। यह प्रक्रिया बार-बार दोहरायी जाती है और कुण्डली तब तक घूर्णन करता है, जब तक धारा प्रवाहित होती रहती है। आधे चक्कर में धारा की दिशा बदल जाती है। दिक् परिवर्तक का कार्य है कि घूर्णन के समय पर हर बार जब कुण्डली ऊर्ध्वाधर स्थिति में गुजरती है, तब कुण्डली से प्रवाहित धारा की दिशा उल्टा कर दें। विभक्त बलय दिक् परिवर्तक का काम करता है। 3. विद्युत चुंबक एवं स्थायी चुंबक में किस प्रकार का लोहा प्रयुक्त होता है? दोनों तरह के चुंबक में अंतर बतायें[2023AII] विद्युत चुंबक:– विद्युत चुंबक बनाने के लिए नरम लोहा का प्रयुक्त किया जाता है। स्थाई चुंबक:– स्थाई चुंबक बनाने के लिए इस्पात या कठोर चुंबकीय पदार्थ प्रयुक्त किया जाता है। विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक में अंतर उत्तर– विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक में निम्लिखित अंतर है। |
| S.N | विद्युत चुंबक | स्थाई चुंबक |
|---|---|---|
| 01. | यह विद्युत धारा के कारण चुंबकीय बनता है। | यह हमेशा चुंबकीय रहता है। |
| 02. | धारा बंद करने पर इसका चुंबकत्व समाप्त हो जाता है। | इसका चुंबकत्व लंबे समय तक बना रहता है। |
| 03. | इसकी चुंबकीय शक्ति को बढ़ाया या घटाया जा सकता है। | इसकी चुंबकीय शक्ति लगभग स्थिर रहती है। |
| 04. | इसमें नरम लोहा(Soft Iron) का उपयोग होता है। | इसमें इस्पात(Steel) का उपयोग होता है। |
| 05. | इसका उपयोग विद्युत घंटी, मोटर और क्रेन में होता है। | इसका उपयोग कंपास, लॉउडस्पीकर आदि में होता है। |
| 4. डायनेमो (विद्युत जनित्र) क्या है? इसके क्रिया सिद्धांत और कार्यविधि का सचित्र वर्णन करें[2012A, 2016AI, 2019A] उत्तर– डायनेमो ऐसी युक्ति है जिसके द्वारा यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। इसकी क्रिया विद्युत-चुंबकीय-प्रेरण के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें तार की एक कुण्डली ABCD होती है, जो एक प्रबल नाल-चुंबक के ध्रुवों के बीच क्षैतिज अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करती है। चित्र में घूर्णन की दिशा दक्षिणावर्ती दिखलायी गयी है। गतिशील चालक के प्रेरित धारा चालक गति की दिशा एवं चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के बीच के कोण की ज्या (sine) के समानुपाती होती है। घूर्णन के क्रम में कुण्डली जब चुम्बकीय क्षेत्र के लंबवत् रहती है, जिस कारण इसमें प्रेरित धारा शून्य होती है। किन्तु घूर्णन के क्रम में कुण्डली जब चुंबकीय क्षेत्र के समान्तर हो जाती है, तब इसकी AB भुजा की गति की दिशा चुंबकीय क्षेत्र दिशा के लंबवत् होती है, जिस कारण इसमें महत्तम धारा प्रेरित होती है। एक पूर्ण घूर्णन के क्रम में कुण्डली दो बार चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत् और दो बार समान्तर होती है, जिससे एक पूर्ण घूर्णन में AB भुजा में प्रेरित धारा दो बार शून्य होती है और दो बार महत्तम होती है। ![]() इस तरह प्राप्त हुई धारा परिपथ में एक ही दिशा में प्रवाहित होती है। यही कारण है कि इस विद्युत जनित्र में दिष्ट धारा जनित्र या डायनेमों के नाम से जाना जाता है। |
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