अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. दो तंत्रिकाओं के मध्य खाली स्थान को क्या कहते हैं?[2011A] उत्तर- दो तंत्रिकाओं के मध्य खाली स्थान को सिनैप्स (Synapes) कहते हैं। 2. किन्हीं चार पादप हार्मोन के नाम लिखें।[2013A] उत्तर- चार पादप हार्मान निम्नलिखित हैं- (i) ऑक्सिन (ii) जिब्बेरेलिन (iii) एब्सिरिक एसिड (iv) साइटोकाइनिन। लघु उत्तरीय प्रश्न 1. तंत्रिका तंत्र के क्या कार्य है?[2021AII] उत्तर- जंतुओं में तंत्रिका तंत्र न्यूरॉन के बने होते हैं। तंत्रिका तंत्र दो स्तर पर शरीर के विभिन्न कार्यों का समन्वय एवं नियंत्रण करता है। (i) यह विभिन्न प्रकार की आंतरिक संवेदना या उद्दीपनों (stimuli) जैसे-भूख, प्यास, तृष्णा एवं रोग इत्यादि तथा बाह्य संवेदना जैसे-भौतिक, रासायनिक एवं यांत्रिक या विद्युतीय प्रभावों आदि को ग्रहण कर उनका संवहन शरीर के विभिन्न भागों तक करता है। (ii) यह आंतरिक तथा बाह्य संवेदनाओं की प्रतिक्रिया हेतु शरीर के विभिन्न अंगों को प्रेरित करता है। 2. तंत्रिका ऊतक कैसे क्रिया करता है?[2018AII, 2018II] उत्तर- तंत्रिका तंत्र की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को न्यूरॉन कहते हैं। प्रत्येक न्यूरॉन के तीन भाग होते हैं-साइटॉन, एक्सॉन तथा डेन्ड्राइट्स। साइटॉन में एक बड़ा केंद्रक तथा कोशिका द्रव्य पाया जाता है। जिसमें अनेक निस्सस कणिकाएँ उपस्थित रहती हैं। एक्सॉन साइट्रॉन से निकलने वाला सबसे दीर्घ तंतु होता है। इसमें कोशिकाद्रव्य भरा रहता है। साइटॉन से निकलने वाले अन्य छोटे एवं शाखित प्रबंधों को डेन्ड्राइटस कहते हैं। इसका स्वतंत्र सिरा सदैव | शाखित होता है। संवेदी अंगों से ये संवेदनाओं को ग्रहण करते हैं तथा उन्हें । साइटॉन को प्रेषित करने का कार्य करता है। 3. न्यूरोट्रांसमीटर क्या है?[2022AII] उत्तर- न्यूरोट्रांसमीटर एक रासायनिक पदार्थ है जिसका स्त्राव तंत्रिकाक्ष (Axon) के अन्तिम सिरों के द्वारा होता है एसीटीलकोलिन (acetylcholine) तथा नॉरएड्रिनलिन (noradranaline) न्यूरोट्रांसमीटर रासायनिक पदार्थ है यह तंत्रिका आवेग को एक एम्सॉन से दूसरे न्यूरॉन की डेंट्राइट्स में पहुँचाता है जहाँ से संवेगो या आवेगो का संचार एक कोशिका से दूसरी न्यूरॉन कोशिकाओं, ग्रंथिल कोशिकाओं, पेशीकोशिकाओं या अन्य अंगों में होता है। तंत्रिक कोशिकाओं द्वारा सूचनाओं का संचार सिर्फ एक ही दिशा में होता है। 4. प्रतिवर्ती क्रिया एवं प्रतिवर्ती चाप में क्या अंतर है?[2022AII, 2026AI] उत्तर- प्रतिवर्ती क्रिया – उद्दीपनों या बाह्य उत्तेजना जैसे दर्द, ताप आदि के फलस्वरूप तत्काल एवं अविवेचित अनुक्रिया जिसमें मस्तिष्क की कोई भूमिका नहीं होती। है, प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहलाती है। यह मस्तिष्क की कोई भूमिका नहीं होती है, प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहलाती है। यह मस्तिष्क की इच्छा के बिना होनेवाली | अनैच्छिक क्रिया है। ये क्रियाएँ मेरुरज्जु (Spinalcord) के द्वारा नियंत्रित होती है परन्तु इन क्रियाओं की सूचना मस्तिष्क को भी पहुँचती है। यदि आप गर्म प्लेट या तबे को छूते हैं, तो ऊष्मा या ताप के कारण उत्पन्न दर्द को महसूस करते हैं। प्रतिवर्ती चाप–प्रतिवर्ती चाप में मेरुरज्जु के साथ-साथ मस्तिष्क भी शामिल होते हैं। प्रतिवर्ती क्रियाओं में ग्राही अंगो से सूचनाएँ संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा मेरुरज्जु तक जाती है। जैसे-जब तेज प्रकाश को एकाएक आपकी आँखो पर फोकस किया जाता है; तो आँखे स्वतः बंद हो जाती है अतः न्यूरॉन में आवेगों के संचरण का पथ प्रतिवर्ती चाप (Reflex are) कहलाता है। 5. हॉर्मोन क्या है? दो पाइप हॉर्मोन का नाम लिखें।[2019AI, 2022AII, 2023AII, 2024AI] उत्तर- हॉर्मोन – पौधों में जटिल तंत्रिका तंत्र नहीं होता है। इसमें रासायनिक नियंत्रण ही होता है। पौधों की जैविक क्रियाओं के बीच समन्वय स्थापित करने वाला रासायन पदार्थ पादप हॉर्मोन (Phytohormones) कहलाता है। ये मूलतः विसरण की क्रिया द्वारा बहुत अल्प मात्रा में अपने संश्लेषण स्थल से पौधों के विभिन्न अंगों में पहुँचते हैं। जहाँ ये उनकी वृद्धि एवं कई उपापचयी क्रियाओं (Metabolic activities) का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं। दो पादप हॉमोन-(i) ऑक्सिन (ii) जिब्बेरेलिन । 6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?[2019AII] अथवा, प्रकाशानुवर्तन क्या है?[2025AI] उत्तर- पौधे के प्ररोह (तने का ऊपरी भाग) तथा पत्तियाँ प्रकाश की दिशा में गति करते हैं। पौधों की यह गति प्रकाशानुवर्तन (photoropism) कहलाती है। पौधे का तना प्रकाश के प्रति अनुक्रिया दिखाता है, जिसके कारण यह उसकी ओर मुड़ जाती है। प्रकाशानुवर्तन गतियाँ प्रायः ऑक्सिन हॉर्मोन की अधिकता एवं कमी के कारण होती है। पौधों की जड़ों में यह अनुक्रिया विपरीत दिशा में होती है। 7. दो पादप हॉर्मोनों का नाम लिखें एवं उनके एक-एक कार्य लिखें। [2019S] उत्तर- दो पादप हॉर्मोन निम्नलिखित हैं- (i) ऑक्सिन (ii) जिब्बेरेलिन। (i) ऑक्सिन के कार्य– यह कार्बनिक यौगिकों का समूह है जो पौधों में कोशिका विभाजन (cell division) तथा कोशिका दीर्घन (cell elongation) में भाग लेता है। (ii) जिब्बेरेलिन के कार्य– यह जटिल कार्बनिक यौगिक है जो तना की वृद्धि में सहायक है एवं वृहत आकार के फलों एवं फूलों का उत्पादन में भी सहायक होता है।| 8. जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?[2020AII] उत्तर- जंतुओं में रासायनिक समन्वय अंतः स्त्रावी ग्रंथियों से स्रावित होने वाले हॉर्मोन से होता है जिनके द्वारा शारीरिक क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय होता है। हॉर्मोन एक विशिष्टं प्रकार के कार्बनिक यौगिक है जो रक्त परिसंचरण के माध्यम से अपने लक्ष्य अंगों (Target organs) में पहुँचकर अंगों में कुछ विशिष्ट परिवर्तनों को प्रेरित करता है। विभिन्न प्रकार के हॉर्मोन विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करते हैं। मनुष्य के शरीर में कुछ ग्रंथियाँ अन्तः स्त्रावी तथा बाह्यस्त्रावी दोनों की तरह कार्य करते हैं। जैसे-अग्न्याशय, वृषण तथा अंडाशय। अग्न्याशय इंसुलिन हॉर्मोन स्त्रावित करता है जिसके द्वारा कार्बोहाइड्रेट का उपापचय नियंत्रित होता है जबकि बाह्य ग्रंथि के रूप में अग्न्याशयी रस को स्त्रावित करता है जिसके द्वारा भोजन पाचन को प्रेरित करता है। 9. मधुमेह से आप समझते हैं?[2019AII] उत्तर- अग्न्याशय में पाये जाने वाले लैंगर हैंस की द्वीपिकाएँ अन्तःस्रावी ग्रंथि का कार्य करती हैं। इसमें पाये जाने वाले बीटा कोशिकाएँ (B-cells) इंसुलिन नामक हॉर्मोन का निर्माण एवं स्राव करती हैं। इंसुलिन हॉर्मोन के द्वारा कार्बोहाइड्रेट के उपापचय को नियंत्रित किया जाता है। इंसुलिन रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है। इंसुलिन की कमी के कारण मधुमेह (Diabetes) नामक बीमारी उत्पन्न होती है। मधुमेह नामक रोग का उपचार इंसुलिन के इंजेक्शन द्वारा किया जाता है। 10. आयोडिन की कमी से कौन-सी बीमारी होती है तथा कैसे?[2015AI, 2016AI] उत्तर- आयोडिन की कमी से घेघा या गलगंड नामक बीमारी होता है। थायराइड ग्रंथि से स्रावित हार्मोन थाइरॉक्सिन के संश्लेषण के लिए आयोडिन का होना आवश्यक है। यह शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा के सामान्य उपापचय को नियंत्रण करता है। जब मनुष्य में आयोडिन की कमी होती है, तो थायरॉक्सिन हार्मोन के निर्माण की गति बहुत ही धीमी हो जाती है। कभी-कभी थायराइड ग्रंथि इस हार्मोन के बनने की गति को बढ़ाने के प्रयास में काफी बढ़ जाता है जिसे घेघा रोग कहा जाता है। 11. मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इन्जेक्शन देकर क्यों की जाती है?[2026AII] उत्तर-अग्नाशय में पाए जाने वाले लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ अन्तः स्रावी ग्रंथि का कार्य करती है। इसमें पाए जाने वाली बीटा कोशिकाएँ इन्सुलिन नामक हॉर्मोन का निर्माण एवं स्त्राव करती है। इन्सुलिन हॉर्मोन के द्वारा कार्बोहाइड्रेट का उपापचय को नियंत्रित किया जाता है। इंसुलिन रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है। इंसुलिन की कमी से मधुमेह नामक बिमारी उत्पन्न होती है। मधुमेह नामक रोग का उपचार इंसुलिन के इंजेक्सन द्वारा किया जाता है। 12. मनुष्य में चीनी के पाचन में कौन हॉर्मोन सहायक है?[2011A] उत्तर- इंसुलिन यह हॉर्मोन अग्न्याशय से स्त्रावित होता है। यह रुधिर के स्तर को नियंत्रित करता है तथा चीनी का भी पाचन करता है। 13. पिट्यूटरी ग्रंथि को ‘मास्टर ग्रंथि’ क्यों कहा जाता है?[2022A II] उत्तर- यह मास्टर अंतःस्रावी ग्रंथि है जो शरीर के अन्य अन्तःस्रावी ग्रंथियों द्वारा निर्मित एवं स्रावित हार्मोन का नियंत्रण करती है। यह कपाल अथवा खोपड़ी की स्फेनॉइड हड्डी के एक गड्ढे सेला टर्शिका में स्थित होती है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं-अग्रपिंडक, मध्य पिंडक एवं पश्च पिंडक। 14. मनुष्य में पाई जाने वाली अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के नाम लिखें।[2025AII] उत्तर- मनुष्य में रासायनिक नियंत्रण एवं समन्वय स्थापित करने हेतु अंतःस्त्रावी ग्रंथियों की एक श्रृंखला गाई जाती हैं जिनमें प्रमुख है- (i) पीयुष ग्रंथि (ii) थायरॉयड ग्रंथि (iii) एड्रीनल ग्रंथि (iv) थायमस ग्रंथि (v) पाराथाइरॉइड ग्रंथि (vi) जनन ग्रंथियाँ, (vii) लैंगरहैन्स द्वीपिकाएँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1. मानव मस्तिष्क की संरचना का वर्णन करें।[2019AI] उत्तर- मानव तंत्रिका तंत्र के द्वारा शरीर के क्रियाओं के नियंत्रण और समन्वय में मस्तिष्क की अहम भूमिका होती है। मानव मस्तिष्क, खोपड़ी के नियल के अंदर अवस्थित होता है। यह तंतुमय संयोजी ऊतक की झिल्ली से घिरा होता है, जिसे मेनिंजीज कहते हैं। यह मस्तिष्क के बीच सेरीब्रोस्पाइल द्रव भरा होता है। यह मस्तिष्क को बाहरी आघातों से सुरक्षित रखने में मदद करता है। मानव मस्तिष्क को बाहरी आघातों से सुरक्षित रखने में मदद करता है। मानव मस्तिष्क को तीन प्रभागों में बांटा गया है- (i) अग्र मस्तिष्क (ii) मध्य मस्तिष्क (iii) पश्च मस्तिष्क। (i)अग्र मस्तिष्क– यह सेरीब्रम एवं डाइएनसेफलॉन में बँटा होता है। (a) सेरीब्रम– यह मस्तिष्क के2/3 भाग का निर्माण करता है। यह दो प्रमस्तिष्क गोलाद्धों द्वारा बना होता है एवं यह तंत्रिका ऊतकों से बनी कॉर्पस कैलोसम नामक रचना द्वारा आपस में जुड़ी होती है। (b) डाएनसेफलॉन – यह अग्रमस्तिष्क का बड़ा भाग है, जो प्रमस्तिष्क गोलार्डों द्वारा ढँका होता है। यह शरीर में तापमान का आभास तथा दर्द या रोने जैसी क्रियाओं का नियंत्रण करता है। (ii) मध्य मस्तिष्क– यह मस्तिष्क स्टेम का ऊपरी भाग है, जो संतुलन एवं ऑटन की पेशियों को नियंत्रित करता है। (iii) पश्च मस्तिष्क – यह मस्तिष्क का पृष्ठ भाग है। यह दो भाग का बना होता है- (a) सेरीबेलम (b) मस्तिष्क स्टेम। (a) सेरीबेलम– पश्च मस्तिष्क के द्वारा मुद्रा, समन्वय, संतुलन एवं ऐच्छिक पेशियों की गतियों का नियंत्रण करता है। (b) मस्तिष्क स्टेम– यह पॉन्स वैटालाई एवं मेडुल ऑब्लांगेटा भाग में बंटे होते हैं। (i) पॉन्स बैरोलाई – यह मेडुला के अग्र भाग में स्थित होता है एवं यह श्वसन क्रिया को नियंत्रित करता है। ( ii) मेड्डुला ऑब्लांगेटा – मस्तिष्क का सबसे पीछे का भाग है। इस भाग के द्वारा शरीर में होने वाली अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण होता है। जैसे-श्वसन दर, हृदय का धड़कना, आहार नाल की क्रमांकुचन गति, रक्त चाप इत्यादि। इसके अलावे प्रतिवर्त्ति क्रियाओं (reflex action) का भी नियंत्रण होता है। जैसे-छींकना, खाँसना, पाचक रसों का स्त्राव तथा वमन (vomiting) आदि। ![]() 2. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की नामांकित संरचना बनाइए तथा उनके कार्यों का वर्णन करें।[2018AII, 2019AII, 2022AI] उत्तर-तंत्रिका तंत्र की संरचना तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा होती है, जिसे न्यूरॉन कहते हैं। न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है, जो संवेगनाओं को ग्रहण कर संचारित करने का काम करती है। एक न्यूरॉन में तीन भाग होते हैं- ![]() (i) कोशिकाय (Cell body) या Cytone (सॉयटान) – कोशिकाय न्यूरॉन का अण्डाकार या नाशपाती आकार का भाग है। इसमें कोशिका द्रव (cytoplasm) तथा केंद्रक (nucleus) उपस्थित होते हैं। कोशिकाय को सायटॉन भी कहते हैं। (ii) दुमिकाएँ (Dendrites) – कोशिकाय के चारो तरफ तंतु के समान की संरचनाएँ निकलती हैं जिसे Dendrites कहते हैं। Dendrite संवेदनाओं को ग्रहण करके कोशिकाय (cell body) को देने का काम करती है। (iii) तंत्रिकाक्ष (Axon) – कोशिकाय से निकलने वाली लंबी तंतु तंत्रिकाक्ष या एकसाॉन कहलाता है। तंत्रिकाक्ष का अंतिम शिरा शारिवत होकर | घड़ीनुमा (knob like) संरचना में समाप्त होती है, जिसे साइनैप्टिक नॉव । (synapic knob) कहते हैं। तंत्रिकाक्ष (Axon) का अंतिम शिरा पेशी | कोशिकाओं, ग्रंथियों या दूसरे न्यूरॉन के (dendrites) के साथ (synapse) या अंतर्ग्रन्यन नामक संधि स्थल द्वारा जुड़ी तंत्रिकाक्ष के चारों ओर एक आवरण पाया जाता है। जिसे मायलिन आवरण (Myelin sheath) कहते हैं। आवरण द्वारा घिरे हुए तत्रिकाक्ष (Axon) को तंत्रिका तंतु nerve fibre कहते हैं। कई तंत्रिका तंतुएँ आपस में मिलकर तंत्रिका (nerve) का निर्माण करते हैं। मायलिन आवरण संकुचित होकर गाँठ के समान की संरचना बनाते हैं, जिसे रेनवियर की गाँठ (node) कहते हैं। तंत्रिकाक्ष (axon) अन्य कोशिकाओं को प्रेरित करता है। तंत्रिका कोशिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं- (a) संवेदी तंत्रिका कोशिकाएँ (Sensory neuron) – न्यूरॉन द्वारा ग्राही कोशिकाएँ आवेगों को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की ओर प्रेषित करती हैं। (b) प्रेरक तंत्रिका कोशिकाएँ आवेगों को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से पेशी | कोशिकाओं- (muscle cell) की ओर प्रेरित करती हैं। (c) अंतरात्र तंत्रिका कोशिकाएँ, प्रेरक तंत्रिका कोशिकाओं का संबंध संवेदी | कोशिकाओं (sensory neuron) के साथ करते हैं। 3. मानव मस्तिष्क का एक स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए। [2016AI] उत्तर- ![]() 4. नर तथा मादा जनन हॉर्मोनों के नाम एवं कार्य लिखें।[2016AII] उत्तर- नर जनन हॉर्मोन को एंड्रोजेन कहते हैं। यह नर में द्वितीय लैंगिक लक्षणों के परिवर्धन एवं यौन-आचरण को प्रेरित करता है। वृषण के द्वारा टेस्टोस्टेरोन (Testosterons) नामक लिंग हॉर्मोन बनते हैं, जो शुक्राणु का निर्माण के साथ-साथ किशोरावस्था में नर लैंगिक अंगों एवं लक्षणों जैसे-आवाज, दाढ़ी, मूँछ इत्यादि का विकास करता है। मादा में अंडाशय के द्वारा ऐस्ट्रोजन (Gestrogen) और प्रोजेस्ट्रॉरान (Pro-gesterone) हॉर्मोन का स्त्राव होता है। ऐस्ट्रोजन हॉर्मोन का कार्य मादा लैंगिक अंगों एवं लक्षणों के विकास को नियंत्रित करना है। जैसे-आवाज, स्तनों का विकास, कोमल त्वचा इत्यादि। प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन के द्वारा मासिक चक्र (Menstrual cycle) का नियमन एवं नियंत्रण होता है। इस दौरान गर्भाशय में होने वाले परिवर्त्तनों को नियमित एवं नियंत्रित करता है। 5. जब एड्रिनलीन हॉर्मोन रुधिर से मिल जाता है तो शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?[2011A] उत्तर-एड्रिनल ग्रंथियों के मेडुला भाग से स्रावित होने वाले हॉर्मोन एड्रिनलिन कहलाता है। एड्रिनलिन हॉर्मोन बजे आपातकालीन (Emergency) हॉमीन भी कहते हैं। क्योंकि यह संकटपूर्ण परिस्थितियों जैसे-क्रोध, डर, आवेश इत्यादि के दौरान शरीर को अधिक कार्य कुशलता से कार्य करने के लिए तैयार करता है। एड्रिनलीन हॉर्मोन के रुधिर में मिल जाने से हृदय की धड़कन, श्वसन दर, पेशियों में रुधिर का प्रवाह बढ़ जाता है। यकृत में संचित ग्लूकोज के द्वारा ढेर सारी ऊर्जा का उत्पादन होता है। जिससे विषम परिस्थितियों में लड़ने के लिए शरीर तैयार होता है। 6. मानव मस्तिष्क के मुख्य कार्यों का उल्लेख करें। [2026AII] उत्तर- (i) मस्तिष्क सभी संवेदी अंगों से आवेगों को ग्रहण करता है। (ii) मस्तिष्क में संवेदों/आवेगों का विश्लेषण होता है और उत्तर देने के लिए सूचनाओं को उचित कार्यवाही हेतु वह प्रेरक तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा पेशियों, ग्रंथियों आदि में भेजता है। (iii) विभिन्न संवेदी अंगों से प्राप्त आवेगों या उद्दीपनों का एवं विभिन्न शारीरिक क्रियाओं का समन्वय एवं नियंत्रण मस्तिष्क द्वारा ही होता है। (iv) मस्तिष्क में चेतना और ज्ञान सूचना के रूप में भंडारित रहते हैं। (v) पिछले अनुभवों के आधार पर व्यवहार में परिवर्तन मस्तिष्क द्वारा ही संभव होता है। (vi) मस्तिष्क सोच-विचार, बुद्धि और चेतना के अंग के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। |
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