पिछले कई वर्षों से बिहार मैट्रिक बोर्ड फाइनल परीक्षा में पूछे गए जैव प्रक्रम के अध्याय से सभी प्रश्नों को शामिल उसके उत्तर साथ नीचे दिया गया है तो आप सभी प्रश्नों को याद कर लें ताकि आप परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकें
पोषण(Nutrition)
| Quick Recap:– ● सजीवों के शरीर में होने वाले विभिन्न क्रियाकलापों के अध्ययन को शरीर क्रिया विज्ञान कहते हैं। ● जीवों के वे सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं। ● वह विधि जिनमें जीव पोषक तत्त्वों का ग्रहण कर जैव प्रक्रम हेतु उनका उपयोग करते हैं, पोषण कहलाता है। ● सजीवों में पोषण की मुख्य दो विधियाँ हैं- (i) स्वपोषण (Autotrophic nutrition) (ii) परपोषण (Heterotrophic nutrition) ● मनुष्य में पाचन की क्रिया मुखगुहा से प्रारंभ हो जाती है। ● उन समस्त जैव प्रक्रियाओं को जिनके द्वारा शरीर में ऊर्जा का उत्पादन होता है, सम्मिलित रूप से श्वसन कहते हैं। ● कोशिकीय श्वसन की दो अवस्थाएँ होती हैं- अवायवीय तथा वायवीय श्वसन। ● जंतुओं में मुख्यतः चार प्रकार के श्वसन अंग होते हैं- (क) त्वचा (ख) श्वासनली या ट्रैकिया (Trachea) (ग) क्लोम (Gills) (घ) फेफड़ा (Lungs) ● मनुष्य में श्वसन प्रश्वास (Inspiration) तथा उच्छ्वास (Expiration) दो चरणों में संपन्न होती है। दोनों अभिक्रियाएँ सम्मिलित रूप से श्वासोच्छ्वास (Breathing) कहते हैं। ● परिवहन तंत्र जीवों के शरीर में पदार्थों का परिवहन या स्थानांतरण के लिए विकसित तंत्र है। ● वाष्पोत्सर्जन पौधों के वायवीय भागों से जल का रंध्रों द्वारा वाष्प के रूप में निष्कासन होता है। ● रक्त तरल संयोजी उत्तक है जिसमें प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्त कोशिकाएँ एवं रक्त पट्टिकाणु हैं। ● हृदय मुख्य रूप से केंद्रीय पंप की तरह कार्य करता है जिसमें यह रक्त पर दबाब बनाकर उसका परिसंचरण पूरे शरीर में करता है। ● मनुष्य का हृदय चार वेश्मों (Chamber’s) का बना होता है। अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. सजीव की जीवित इकाई क्या है?[2017AI] उत्तर – सजीव की जीवित इकाई कोशिका है। 2. A.T.P. का पूरा नाम लिखें।[2017AI] उत्तर – Adenosine Triphosphate 3. विटामिन A की कमी से होने वाले रोग का नाम लिखें।[2017AI] उत्तर – विटामिन A की कमी से रतौंधी (आँख की बीमारी) नामक बीमारी होती है। 4. अमीबा में गति किस भाग से होती है?[2017AI] उत्तर – अमीबा में गति कूटपाद (Pseudopodia) के द्वारा होता है। 5. अमीबा का पाचन कैसे होता है?[2016AI] उत्तर – अमीबा के शरीर में पोषण के लिए कोई विशेष संरचना नहीं पाई जाती है। अमीबा में अंतः कोशिकीय पाचन होता है। भोजन रसधानी में पाचक इंजाइमों द्वारा भोजन का पाचन होता है। 6. कोशिका में ‘पावर हाउस’ किसे कहते हैं?[2015AI, 2016AI] उत्तर –. कोशिका में ‘पावर हाउस’ माइटोकॉन्ड्रिया को कहते हैं। 7. पौधे हरे क्यों होते हैं?[2016AI] उत्तर – पौधे में क्लोरोफिल नामक हरे रंग का वर्णक पाया जाता है। 8. परजीवी किसे कहते हैं?[2014AI] उत्तर – जीव को अपने भोजन एवं आवास के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं, परजीवी कहलाते हैं। जैसे-कवक (Fungi), जीवाणु (bacteria), अमरबेल (cuscuta) आदि। 9. प्रकाश संश्लेषण का समीकरण लिखें।[2013A] उत्तर –6CO₂ + 6H₂O → C6H₁₂O6 + 6O₂ 10. हरे पौधों में किस घटक के अभाव में प्रकाश-संश्लेषण संभव नहीं है?[2011A] उत्तर – हरे पौधों में हरित लवक (Chloroplast) के अभाव में प्रकाश-संश्लेषण लघु उत्तरीय प्रश्न 1. पोषण क्या है ? जीवों में होनेवाली विभिन्न पोषण विधियों का वर्णन करें। [2026AI] उत्तर – पोषण वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव वृद्धि, विकास और ऊर्जा के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को ग्रहण करते हैं और उनका उपयोग करते हैं। जीवों में पोषण की विभिन्न विधियाँ: 1. स्वपोषी पोषण– इस विधि में जीव अकार्बनिक स्त्रोतों (जैसे CO₂, जल) से प्रकाश या रसायनिक ऊर्जा की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। उदाहरण:- हरे पौधे, कुछ जीवाणु (प्रकाश संश्लेषण द्वारा) । 2. परपोषी पोषण– इस विधि में जीव अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पौधों या अन्य जीवों पर निर्भर करते हैं। उदाहरण:- सभी जानवर, कवक, जीवाणु और अमरबेल । 2. मृतजीवी पोषण क्या है? उदाहरण सहित उत्तर दें।[2023AI] उत्तर –जीव मृत जंतुओं और पौधों के शरीर से अपना भोजन, अपने शरीर की सतह से, घुलित कार्बनिक पदार्थों के रूप में अवशोषित करते है, इस प्रकार के पोषण को मृतजीवी पोषण कहते है। उदहारण-कवक, बैक्टीरिया तथा कुछ प्रोटोजोआ । 3. जीवों के लिए पोषण अनिवार्य है। क्यों?[2023AI] उत्तर – जीवन की उपापचयी क्रियाओं के संचालन के लिए निरंतर ऊर्जा का आपूर्ति तथा शरीर की वृद्धि तथा टूटे-फूटे ऊतको की मरम्मत के लिए जीव को भोजन की आवश्यकता होती है। भोजन में स्थित विभिन्न पोषक तत्व ये कार्य करते है। 4. परपोषण क्या है?[2023AII] उत्तर – इस प्रकार पोषण में जौव अपना भोजन स्वयं संश्लेषित न कर बल्कि पौधों या जन्तुओं पर निर्भर रहते है। इस प्रकार के पोषण को परपोषण कहते है। 5. मनुष्य में कितने प्रकार के दाँत होते हैं? उनके नाम तथा कार्य लिखें।[2021AI] उत्तर – मनुष्य में दाँत चार प्रकार के होते हैं- (i) कतर्नक या इंसाइजर (Incisor) (ii) भेदक या कैनाइन (Canine) (iii) अग्रचवर्णक या प्रीमोलर (Premolar) (iv) चुवर्णक या मोलर (Molar) दाँत के कार्य- (i) कर्तनक (Incisor) -यह भोजन को कुतरने या काटने का कार्य करता है। (ii) भेदक (Canine)- यह भोजन को चिड़ने तथा फाड़ने का कार्य करता है। (iii) अग्ग्रचवर्णक (Premolar) -यह भोजन को चबाने का कार्य करता है। (iv) चवर्णक (Molar) -यह भोजन को चबाने तथा पिसने का कार्य करता है। 6. हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?[2021AI, 2023AII, 2026AII] उत्तर – आमाशय में जठर ग्रंथि से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का स्राव होता है। यह अम्ल निष्क्रिय पेप्सिनोजेन को संक्रिय पेप्सिन नामक एंजाइम में परिवर्तित करता है जो भोजन के प्रोटीन पर प्रतिक्रिया कर उसे पेप्टोन (peptone) में बदल देती है। यह एक जीवाणुनाशक की तरह कार्य करता है तथा भोजन में उपस्थित बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है। 7. दीर्घरोम क्या है? इसके कार्य लिखें।[2021AII, 2023AII] उत्तर – दीर्घरोम ऊँगलीनुमा प्रवर्ध है जो Ileum (क्षुद्रांत) के आंतरिक सतह पर पाय जाता है। प्रत्येक आंत्रीय कोशिका में लगभग 3000 विलाई (दीर्घरोम) पाव जाता है। कार्य- (i) विलाई (दीर्घरोम) में रुधिर वाहिनियों का जाल फैला होता है। (ii) पंचा हुआ भोजन दीर्घरोम में दिवार द्वारा अवशोषित होकर रुधिर कोशिकाओं के रुधिर में मिल जाते हैं। (iii) अवशोषित भोजन रुधिर परिसंचरण तंत्र के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों में वितरित हो जाते हैं। 8. सजीव के मुख्य चार लक्षण लिखें।[2017ΑΙ, 2021AI, 2025AII] उत्तर – सजीव के मुख्य चार लक्षण निम्नलिखित हैं- (i) चलन या गति (ii) श्वसन (iii) प्रजनन (iv) उत्सर्जन (v) वृद्धि एवं विकास 9. पित्त क्या है? मनुष्य के पाचनतंत्र में इसका क्या महत्त्व है?[2016ΑΙ, 2021ΑΙ, 2023ΑΙ] उत्तर – पित्त गाढ़ा हरे रंग का क्षारीय द्रव है जिसका PH 8.9 होता है जो यकृत कोशिकाओं से स्त्रावित होता है। मनुष्य के पाचन क्रिया में महत्त्व (i) पित्त अम्लीय काइम को समाप्त कर क्षारीय बना देता है। (ii) पित्त के लवणों (bile salts) जैसे सोडियम ग्लाइकोलेट तथा सोडियम टॉटोकोलेट भोजन के जटिल वसा का विखण्डन तथा पायसीकरण (emul-sification) कर देते हैं। जिससे भोजन के वसा का पाचन होता है। 10. स्वपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है?[2019AI, 2023AII] उत्तर –स्वपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में निम्नलिखित अंतर है:- |
| स्वपोषी पोषण | विषमपोषी पोषण |
|---|---|
| (i) स्वपोषी पोषण में जीव अपने भोजन का संश्लेषण स्वयं करते हैं। | (i) विषमपोषी पोषण में जीव अपने भोजन स्वयं संश्लेषित नहीं करते हैं। |
| (ii) इसमें कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल की परस्पर संयोजन क्रिया से कार्बनिक पदार्थों का निर्माण होते है। | (ii) जंतु अपने भोजन के लिए पौधों पर तथा शाकाहारी प्राणियों पर निर्भर करते हैं। |
| (iii) अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक पदार्थ का संश्लेषण होता है । | (iii)कार्बनिक द्पदार्थों से कार्बनिक प्राप्त होता है। |
| 11. पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?[2019AI] उत्तर – पाचक एंजाइमों द्वारा भोजन का पाचन होता है। मनुष्य के पाचन तंत्र में विभिन्न ग्रंथियों से निम्नलिखित एंजाइम स्रावित होता है, जो भोजन के विभिन्न अवयवों का पाचन करता है। (i) लार ग्रंथि -टायलिन एंजाइम स्रावित होता है, जो स्टार्च को माल्टोस में बदल देता है। (ii) जठर ग्रंथि- पेप्सीनोजन, रेनिन, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा गैस्ट्रीक लाइपेज एंजाइम स्रावित होता है जो भोजन के प्रोटीन का पाचन करता है। (iii) यकृत-पित्त (Bile) एंजाइम भोजन में वसा का पाचन करता है। (iv) अग्नाशय- अग्न्याशयिक रस (ट्रिप्सिन, काइमो ट्रिप्सिन, एमाइलेज,लाइपेज तथा न्यूक्लियेज)। दिप्सिन–प्रोटीन पर क्रिया करके इसे पेप्टाइड्स में चदल देता है। एमाइलेज- स्टार्च का माल्टोज शर्करा में परिवर्तित करता है। लाइपेज–वसा पर क्रिया करके फैटीएसीड एवं ग्लिसरॉल में तोड़ता है। न्यूक्लियेज–न्यूक्लिक अम्ल को न्यूक्लियोटाइड्स में बदलता है। 12. प्रकाश संश्लेषण क्या है? इस क्रिया का रासायनिक समीकरण लिखें।[2022AII, 2024AII] उत्तर – प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) एक जटिल प्रक्रम है जो पौधे के हरे भागों द्वारा प्रकाशीय ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देता है। हरी पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल (Chlorophyll), सूर्य के प्रकाश से उत्पन्न विकिरण ऊर्जा वायुमंडल से सरल अकार्बनिक अणु कार्बन डायक्साइड (CO₂) तथा जल (H₂O) की सहायता से ग्लूकोज (कार्बोहाइड्रेट) का निर्माण होता है। इस क्रिया में अकार्बनिक यौगिक से कार्बनिक यौगिक ग्लूकोज (कार्बोहाइड्रेट) C₆H₁₂O₆ का निर्माण होता है। संपूर्ण प्रकाश संश्लेषण की अभिक्रिया निम्न रासायनिक समीकरण द्वारा दर्शाते हैं- ![]() 13. कोशिका के चार कोशिकांग का नाम लिखें।[2017ΑΙ, 2025AI] उत्तर – कोशिका में निम्नलिखित चार कोशिकांग पाये जाते हैं- (i) प्लाज्मा झिल्ली (ii) कोशिका द्रव (iii) राइबोसोम (iv) लवक (v) लाइसोसोम (vi) केंद्रक 14. विषमपोषी पोषण के आप क्या समझते हो?[2017AII] उत्तर – वैसे जीव जिसमें जीव अपना भोजन स्वयं संश्लेषित न कर किसी-न-किसी रूप में अन्य स्रोतों से प्राप्त करते हैं, विषम पोषी कहलाते हैं। सभी जंतु, जीवाणु एवं कवक विषमपोषी कहलाते हैं। विषमपोषी पोषण चार प्रकार के होते हैं- (i) प्राणिसय पोषण-इसमें जीव अपना भोजन ठोस या तरल के रूप में जंतुओं के भोजन ग्रहण करने की विधि द्वारा करते हैं। उदाहरण-अमीबा, मेढ़क, मनुष्य। (ii) मृतजीवी पोषण-इसमें जीव मृत जंतुओं एवं पदार्थों के शरीर से अपना भोजन कार्बनिक पदार्थों के रूप में अवशोषित करते हैं। उदाहरण-कवक, यीस्ट, मशरूम, बैक्ट्रीरिया इत्यादि। (iii) परजीवी पोषण-इसमें जीव दूसरे प्राणी के सम्पर्क में स्थायी एवं उपस्थायी रूप में रहकर उनसे अपना भोजन प्राप्त करते हैं। उदाहरण-कवक, जीवाणु, अमरबेल इत्यादि। (iv) परासरणी पोषण-इस प्रकार के पोषण में जंतु विसरण तथा परासरण द्वारा अपने शरीर के सतह से सरल कार्बनिक भोज्य पदार्थों का अवशोषण करते हैं। जैसे-ट्रिपैनोसोमा, फीताकृमि इत्यादि। 15. आमाशय में पाचक रस की क्या भूमिका है?[2016AII, 2026AI] उत्तर – आमाशय में पाचक रस जठर ग्रंथि द्वारा स्रावित होती है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI), म्यूकस या श्लेष्मा तथा निष्क्रिय पेप्सिनोजेन इत्यादि जठर रस के प्रमुख अवयव हैं। 16. भोजन के पाचन द्वारा किस प्रकार की अभिक्रिया हमारे शरीर में होती है?[2015AII] उत्तर – भोजन के पाचन द्वारा ऑक्सीकरण की अभिक्रिया हमारे शरीर में होती है। ![]() 17. हरित लवक के किस भाग में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है?[2012AII] उत्तर – हरित लवक में ग्रेना (grena) पाया जाता है। ग्रेना में थैलेकॉइड संरचना पाया जाता है। प्रकाश संश्लेषी वर्णक थैलेकॉइड में उपस्थित होते हैं। जहाँ सूर्य केप्रकाश की उपस्थित में प्रकाश संश्लेषी क्रियाएँ चलती रहती हैं। 18. कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदण्ड का उपयोग करेंगे।[2012A] उत्तर – सभी जीवधारियों में जीवन की एक निश्चित व्यवस्था रहती है जिससे जीवन संबंधी विभिन्न कार्यों का सम्पादन होता है। सजीवों में गति एक महत्त्वपूर्ण गुण है जिससे जीव स्थान परिवर्तन या अंगों की स्थिति में परिवर्तन करता है। जैव प्रक्रम सजीवों में होने वाली आधारभूत क्रियाएँ हैं जो जीवन के लिए आवश्यक है। ये निम्नलिखित हैं- (i) जीवद्रव्य (ii) उपापचय (iii) पोषण (iv) श्वसन (v) वृद्धि (vi) पदार्थों का परिवहन (vii) पदार्थों का आदान-प्रदान (viii) उत्सर्जन तथा (ix) उत्तेजनशीलता जीवों में सम्पन्न होने वाली इन जैविक प्रक्रियाओं से हमें पता चलता है कि वे सजीव हैं। 19. प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधे कहाँ से प्राप्त करते हैं?[2012A] उत्तर – पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से कार्बोहाइड्रेट (भोजन) का निर्माण होता है जिसके लिए निम्नलिखित चार वस्तु की आवश्यकता होती है- (i) कार्बन डाइक्साइड (CO₂)-पौधे इसे वायुमंडल से प्राप्त करते हैं। (ii) जल (H₂O)-पौधे इसे भूमि से जड़ों द्वारा प्राप्त करता है। (iii) पर्णहरित-यह पौधे की कोशिकाओं में हरितलवक में उपस्थित होता है। (iv) सूर्य का प्रकाश-पौधे सूर्य के प्रकाश से फोटोन ऊर्जा कणों के रूप में प्राप्त करते हैं। जो क्लोरोफिल में संचित होकर इस प्रक्रिया में आवश्यकतानुसार उपयोग करते हैं। 20. पोषण की परिभाषा दें।[2024AI] उत्तर – जैविक क्रियाओं का सफल संचालन हेतु प्रत्येक जीव की दो विशेष आवश्यकताएँ होती है- (i) निरंतर ऊर्जा की प्राप्ति जो जीवन की उपापचय क्रियाओं (Metabolic activities) के सफलतापूर्वक निष्पादन हेतु आवश्यक है तथा (ii) शरीर की वृद्धि एवं विघटित उत्तकों को पुनर्नियोजित करने के लिए जीवद्रव्य का निर्माण। अतः जैव प्रकम की वह विधि जिसमें जीव द्वारा पोषक तत्वों का अंतर्ग्रहण एवं उपभोग होता है पोषण (Nutrition) कहलाता है। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1. मनुष्य के आहार नाल का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।[2021AII] उत्तर – ![]() 2. पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का सचित्र वर्णन नामांकित के साथ करें।[2011A, 2014AI, 2021AI, 2025AI] उत्तर –प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) एक जटिल प्रक्रम है जो पौधे के हरे भागों द्वारा प्रकाशीय ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदल देता है। हरी पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल (Chlorophyll), सूर्य के प्रकाश से उत्पन्न विकिरण ऊर्जा, वायुमंडल से सरल अकार्बनिक अणु कार्बन डायक्साइड (CO₂) तथा जल (H₂O) की सहायता से ग्लूकोज (कार्बोहाइड्रेट) का निर्माण होता है। इस क्रिया में अकार्बनिक यौगिक से कार्बनिक यौगिक ग्लूकोज (कार्बोहाइड्रेट) C₆H₁₂O₆ का निर्माण होता है। संपूर्ण प्रकाश संश्लेषण की अभिक्रिया निम्न समीकरण द्वारा दर्शाते हैं- ![]() इस प्रकार प्रकाश संश्लेषण से हरे पौधे स्वयं भोजन बनाते हैं तथा स्वपोषो कहलाते हैं। ![]() 3. एक प्रयोग द्वारा दर्शाएँ कि प्रकाश-संश्लेषण के लिए क्लोरोफिल आवश्यक है?[2020AII] उत्तर – प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में क्लोरोफिल की अनिवार्यता निम्नलिखित प्रयोग द्वारा दर्शाते हैं। आवश्यक सामग्री-क्रोटन का पौधा, परखनली, एल्कोहॉल, आयोडीन का घोल, ड्रापर, स्प्रिट लैंप, स्टैण्ड। प्रयोग- (i) गमले में लगे क्रोटन के पौधे को लेते हैं जिसकी पत्तियाँ आंशिक रूप से हरी और आंशिक रूप से सफेद होती हैं। पत्ती के हरे भाग में क्लोरोफिल होता है परंतु सफेद भाग में क्लोरोफिल नहीं होता है। (ii) पौधे को स्टार्च रहित बनाने के लिए दो या तीन दिन अंधेरे स्थान में रखते हैं। (iii) स्टार्च रहित वाले पौधों को तीन या चार दिनों के लिए धूप में रखते हैं। (iv) पौधे के चित्तकवरी पत्ती को तोड़कर इसे अल्कोहॉल में उबालते हैं। क्लोरोफिल चूँकि अल्कोहॉल में घुलनशील होता है। क्लोरोफिल के निकल जाने से पत्ती रंगहीन हो जाता है। इसे जल से धो देते हैं। (v) रंगहीन पत्ती के ऊपर आयोडीन घोल डालते हैं और रंग परिवर्तन का निरीक्षण करते हैं। निरीक्षण- (i) पत्ती का सफेद भाग जहाँ क्लोरोफिल नहीं था किसी प्रकार का रंग परिवर्तन नहीं हुआ। (ii) पत्ती का हरा भाग नीले-काले रंग में परिवर्तित हो जाता है। निष्कर्ष–इस प्रकार दर्शाता है चूँकि हरी पत्तियों वाले भाग में क्लोरोफिल मौजूद था। इसलिए उस हिस्से में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया हुई और उसमें कार्बोहाइड्रेट का निर्माण हुआ, जिसके कारण वह भाग गाढ़े नीले-काले रंग का हो गया। परंतु सफेद पत्तियों वाले भाग नीला नहीं हुआ, क्योंकि इसमें क्लोरोफिल वर्णक मौजूद नहीं था। ![]() 4. मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाकर पाचन क्रिया को समझाइए।[2014AII, 2018AI, 2019AI, 2024AI] उत्तर – ![]() मानव में पाचन क्रिया:- मनुष्य में पाचन की क्रिया मुखगुहा से प्रारंभ होती है एवं छोटी आँत में समाप्त होती है। पाचन की क्रिया में आहारनाल से संबंध कुछ ग्रंथियाँ पाई जाती हैं, जिनसे पाचक रस स्त्रावित होता है, जिन्हें एंजाइम कहते हैं। ये भोज्य पदार्थ के रासायनिक घटकों-कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा तथा न्यूक्लिक अम्ल के वृहत अणुओं को तोड़कर रक्त में भेज देता है, जिससे स्वांगीकरण आसानी से हो सके। आहारनाल एवं भोजन का पाचन (i) मुखगुहा (Buccal cavity)- मनुष्य भोजन का अन्तर्ग्रहण हाथ की सहायता से मुख के द्वारा होता है। तीन जोड़ी लार ग्रंथियाँ मुखगुहा में खुलती हैं जिनके द्वारा लार (Saliva) स्त्रावित होता है। लार में उपस्थित एंजाइम टायलीन स्टार्च को माल्टोस में बदल देता है। स्टार्च + टायलिन → माल्टोस (ii) आमाशय-भोजन ग्रासनली से होते हुए क्रमाकुंचनगति से आमाशय में पहुँचता है। आमाशय में जठर ग्रंथि पाया जाता है। जिससे जठर रस स्त्रावित होता है। गैस्ट्रिक रस में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI), म्यूकस एवं पेप्सिन नामक इंजाइम पाये जाते हैं। ![]() (iii)छोटी आँत-छोटी आँत के दीवार से स्त्रावित होने वाले इंजाइम को आँत रस (Intestinal Juice) कहते हैं। आँत रस में उपस्थित इंजाइम के द्वारा भोजन का पाचन अंतिम रूप में होता है। ![]() इस प्रकार भोजन सरल एवं अवशोषित होने लायक अणुओं में विघटित हो जाते हैं। पचा हुआ भोजन क्षुदांत (ileum) में पाये जाने वाले विलाई (villi) के दीवार द्वारा अवशोषित होकर रक्त वाहिनियों में उपस्थित रुधिर में पहुँच जाता है। (iv) बड़ी आँत-अपचा हुआ भोजन इलिएम से कॉलन में होते हुए रेक्टम में पहुँचता है। अपचा भोजन, मल के रूप में रेक्टम में संचित रहता है, जो समय-समय पर मलद्वार के रास्ते बाहर निकल जाता है। 5. प्रायोगिक विवरण द्वारा बताएँ कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है।[2016AI] उत्तर – उद्देश्य- प्रयोग द्वारा यह दर्शाया गया है कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मेंऑक्सीजन गैस (O,) मुक्त होती है। आवश्यक उपकरण एवं सामग्री- एक बीकर, टेस्ट ट्यूब, फनेल (Funnel) और एक पौधा जैसे-हाइड्रिला। सिद्धांत- प्रकाश संश्लेषण एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें पौधे सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डायऑक्साइड (CO₂) और जल (H₂O) का उपयोग कर अपना भोजन का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया के अन्त में ऑक्सीजन (O₂) गैस मुक्त होती है। कार्यविधि- (i) एक बीकर में ⅔ भाग पानी लेते हैं। (ii) हाइड्रिला के पौधे को पानी में डालकर उसे Funnel से ढँक देते हैं। (ii) एक टेस्ट ट्यूब में पानी भरकर उसे Funnel के ऊपर उल्टा रख देते हैं। (iv) पूरे उपकरण को सूर्य की रोशनी में रख देते हैं। अवलोकन– (i) कुछ समय के बाद हम पाते हैं कि हाइड्रिला के पौधे से बुलबुले उठकर परखनली के ऊपरी सिरे में एकत्रित होते हैं तथा परखनली के पानी का तल नीचे की ओर गिरने लगता है। (ii) एकत्रित गैस ऑक्सीजन है अथवा नहीं इसे जानने के लिए जलती हुई माचिस की तीली ले जाते हैं तो हम पाते हैं कि तीली तेज से जलने लगती है। निष्कर्ष : अतः हम यह कह सकते हैं कि एकत्रित गैस ऑक्सीजन O₂ है। ![]() 6. अमीबा में पोषण की प्रक्रिया को चित्र के साथ समझाइए।[2014AI, 2022AII] उत्तर – अमीबा एककोशिकीय प्राणी है इसमें प्राणी समपोषी पाया जाता है जिसके अंतर्गत अमीबा ठोस भोज्य पदार्थों को ग्रहण करता है। ![]() (i) अन्तर्ग्रहण (Ingestion)- अमीबा के कोशिकीय सतह से हमेशा अँगुलीनुमा अस्थाई संरचनाएँ बनती रहती हैं, जिसे कूटपाद (Pseuodopodia) कहते हैं। अमीबा कूटपाद की सहायता से भोजन का अन्तर्ग्रहण करता है। कूटपाद भोजन को चारो ओर से घेरकर एक खाद्य-धानी (Food vacuole) बनाता है। भोज्य पदार्थों के लिए खाद्य-धानी अस्थाई आहार नाल की तरह होता है। (ii) पाचन (Digestion)- कोशिकाद्रव्य में उपस्थित पाचक इंजाइम खाद्य-धानी (Food-Vacuole) में प्रवेश करते हैं। इंजाइम की सहायता से भोजन छोटे-छोटे घुलनशील अणुओं में टूटते हैं। (iii) अवशोषण (Absorption)- पचा हुआ भोजन रिक्तिका से कोशिका द्रव्य में विसरित (diffuse) होता जाता है। यह क्रिया अवशोषण कहलाती है। (iv) स्वांगीकरण (Assimilation) – कोशिकाद्रव्य में अवशोषित भोजन का उपयोग ऊर्जा प्राप्ति, नये जीवद्रव्य के निर्माण या कोशिका की वृद्धि में किया जाता है, जिसे स्वांगीकरण कहते हैं। (v) बहिष्करण (Egestion) – रिक्तिका घूमते-घूमते कोशिका की सतह सेचिपककर फट जाते हैं। तब अनपचा भोजन कोशिका से बाहर निकल जाता है। इस प्रकार अमीबा में पोषण की प्रक्रिया संपन्न होती है। 7. यकृत के कार्यों को लिखें।[2025AII] उत्तर – यकृत शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है। यह उदर के ऊपर दाहिने भाग में अवस्थित होता है। यकृत शरीर का सबसे बड़ा निर्विषीकरण केंद्र (centre of detoxification) है। यह कई महत्वपूर्ण जैविक कार्य करता है। इसकेमुख्य कार्य निम्नलिखित हैं- (i) पित्त रस का उत्पादन- यकृत पित्त रस को स्रावित करता है। पित्त रस पिताशय में जमा होता है। यह वसा के पाचन एवं अवशोषण में मदद करता है। पित्त रस आंत में वसा को छोटे-छोटे टुकड़े में तोड़ देता है जिससे एंजाइम इसे आसानी से पचा पाते हैं। (ii) उपापचय को नियंत्रित करना- जब शरीर में ग्लूकोज अधिक होता है तो यकृत इसे ग्लाइकोजेन में परिवर्तित कर संग्रहीत करता है। जब शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है तो यह ग्लाइकोजेन को ग्लूकोज में बदलकर रक्त में छोड़ देता है। यकृत कोलेस्ट्रॉल एवं लिपिड का निर्माण एवं विघटन करता है। (iii) विषहरण का कार्य – यकृत शरीर में हानिकारक विषाक्त पदार्थों, शराब, दवाइयों और रसायनों को निष्क्रिय कर उन्हें उत्सर्जन योग्य बनाता है। (iv) विटामिन और खनिजों का भंडारण- यकृत रोगजनकों को नष्ट करने वाले मैक्रोफेजू कोशिकाओं को संग्रहित करता है , जो शरीर के लिए आवश्यक होते हैं। (v) प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना- यकृत रोगजनकों को नष्ट करने वाले मैक्रोफेज कोशिकाओं को संग्रहित करता है जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। |
श्वसन(Respiration)
| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. ऑक्सीजन की उपस्थिति में होने वाले श्वसन क्रिया को क्या कहते हैं?[2017AI] उत्तर – ऑक्सीजन की उपस्थिति में होने वाले श्वसन क्रिया को ऑक्सीश्वसन (वायवीय श्वसन) कहते हैं। 2. तिलचट्टा का श्वसन अंग क्या है?[2016AI] उत्तर – तिलचट्टा का श्वसन अंग ट्रैकिया या त्वचानांक है। 3. मछली किस अंग के द्वारा श्वसन करती है?[2014 AI, 2021 AII] उत्तर – मछली, क्लोम या गिलस के द्वारा श्वसन करती है। 4. ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में श्वसन क्रिया को क्या कहते हैं?[2015AI] उत्तर – ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में श्वसन क्रिया अनॉक्सी श्वसन अथवा अवायवीय श्वसन कहलाता है। 5. स्थलीय और जलीय जीव, श्वसन क्रिया के लिए किस प्रकार ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं?[2015AI] उत्तर – स्थलीय जंतु वायुमंडलीय हवा से फेफड़ों द्वारा ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं जबकि जलीय जंतु (aquatic animal) जल में घुले ऑक्सीजन गिल्स या क्लोम (gills) के द्वारा प्राप्त करते हैं। 6. किण्वन किस प्रकार का श्वसन है?[2014AI] उत्तर – किण्वन (Fermentation) अवायवीय श्वसन है। 7. श्वसन का मध्यवर्ती पदार्थ क्या है?[2013A] उत्तर – श्वसन का मध्यवर्ती पदार्थ पाइरुविक अम्ल है। 8. श्वसन कैसी रासायनिक अभिक्रिया है?[2011A] उत्तर – श्वसन ऊष्माक्षेपी और ऑक्सीकरण अभिक्रिया है। लघु उत्तरीय प्रश्न 1. श्वसन की परिभाषा दें।[2021AII, 2025AI] उत्तर – श्वसन एक विशेष प्रकार का जैव प्रक्रम है जिसमें बाहरी वातावरण से ऑक्सीजन शरीर की कोशिकाओं में पहुँचता है जहाँ इसका उपयोग कोशकीय ईंधन (ग्लूकोज) के ऑक्सीकरण में होता है। ऑक्सीकरण विशिष्ट इंजाइम की उपस्थिति में कई चरणों में संपन्न होता है जिसके फलस्वरूप जैव ऊर्जा (ATP) का उत्पादन होता है। इस अभिक्रिया में सह-उत्पादों के रूप में कार्बन डाईऑक्साइड (CO₂) तथा जल का निर्माण होता है।CO₂ श्वासोच्छ्वास की प्रक्रिया द्वारा बाहर निकाला जाता है। 2. मछली, मच्छर, केंचुआ और मनुष्य के मुख्य श्वसन अंगों के नाम लिखें।[2014AI, 2021AII, 2023AI] उत्तर – मुख्य श्वसन अंगों के नाम – (i) मछली- क्लोम अथवा गिल्स-यह क्लोम या गिल्स से जल के घुलित0₂ का उपयोग श्वसन में करते हैं। (ii) मच्छर – ट्रैकिया-यह वायुमंडलीय O₂ को ट्रैकिया के द्वारा ग्रहण करते हैं। (iii) केंचुआ– त्वचा-इसमें गैसीय आदान-प्रदान त्वचा द्वारा होता है। (iv) मनुष्य– फेफड़ा-गैसीय आदान-प्रदान के फेफड़ा के द्वारा होता है। 3. श्वसन एवं दहन में अंतर लिखें।[2014AI, 2020AII] उत्तर – श्वसन एवं दहन में निम्नलिखित अंतर है:- |
| श्वसन | दहन |
|---|---|
| (i) यह कोशिका में होता है। | (i) यह कोशिका में नहीं होता है। |
| (ii)) ऊर्जा चरणबद्ध ढंग से विमुक्त होती है। | (ii)) ऊर्जा अचानक रूप से विमुक्त होती है। |
| (iii) यह एंजाइम के द्वारा नियंत्रित होती है। | (iii) एंजाइम के द्वारा नियंत्रित नहीं होता है। |
| (iv) इसमें प्रकाश की उत्पत्ति नहीं होती है। | (iv) तेज लौ के साथ प्रकाश की उत्पत्ति होती है। |
| (v) कई उत्पादों का निर्माण होता है। | (v) किसी उत्पाद का निर्माण नहीं होता है। |
| 4. किण्वन क्या है? इसका समीकरण लिखें।[2019AII, 2022AI, 2026AI] उत्तर – कुछ जीवों में जैसे बैक्टीरिया तथा यीस्ट (yeast) में श्वसन की क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है। श्वसन में ऐल्कोहॉल का निर्माण होता। है। इस क्रिया को किण्वन या फरमेन्टेशन (Fermentation) भी कहते हैं। श्वसन में ग्लूकोज के अणु कार्बन डाइऑक्साइड, ईथाइल अल्कोहॉल एवं ऊर्जा में विघटित होते हैं। एक अणु ग्लूकोज ऑक्सीकृत होकर सिर्फ दो अणु ATP मुक्त करते हैं। ![]() 5. कुछ जीवों के नाम जिसमें अवायवीय श्वसन होता है। [2015 AI], 2018AI] उत्तर – कुछ जीवों के नाम निम्न है जिसमें अवायवीय श्वसन होता है 1. यीस्ट (खमीर) 2. लैक्टोबेसिलस 3. क्लॉस्ट्रिडियम 4. कुछ परजीवी कृमि 5. कुछ जीवाणु 6. वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है? [2015 AI, 2018AI] उत्तर – वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में निम्नलिखित अंतर है:- |
| वायवीय श्वसन | अवायवीय श्वसन |
|---|---|
| (i) यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। | (i) यह ऑक्सीजन की अनुपस्थित में होता है। |
| (ii) कोशिका के अंदर माइट्रोकॉण्ड्यिा में होता है। | (ii) माइट्रोकॉण्ड्रिया के बाहर कोशिका द्रव में होता है। |
| (iii) इसका अंतोत्पाद CO₂ और जल है। | (iii) इसका अंतोत्पाद इथेनॉल अमिवा लैक्टिक अम्ल है। |
| (iv) ATP ऊर्जा के 38 अणु बनते हैं। | (iv) ATP ऊर्जा के दो अणु बनते हैं। |
| (v) इसमें ऊर्जा की मात्रा अत्यधिक होती है। | (iv) ATP ऊर्जा के दो अणु बनते हैं। |
| 7. श्वसन एवं श्वासोच्छ्वास में क्या अंतर है?[2016AI] उत्तर – श्वसन एक जैव प्रक्रम है जिसमें बाहरी वातावरण से ऑक्सीजन अंतर्ग्रहित होकर शरीर की विभिन्न कोशिकाओं में पहुँचता है जहाँ इसका उपयोग कोशिकीय ईंधन (ग्लूकोज) के ऑक्सीकरण में होता है। ऑक्सीकरण विशिष्ट इंजाइम की उपस्थिति में कई चरणों में सम्पन्न होता है चूँकि ग्लूकोज अणुओं का ऑक्सीकरण कोशिकाओं में होता है। अतः इसे कोशिकीय श्वसन भी कहते हैं। श्वसन क्रिया को निम्नांकित समीकरण द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। श्वासोच्छ्वास-श्वसन की दो अवस्थाएँ प्रश्वास तथा उच्छ्वास सम्मिलितरूप से श्वासोच्छ्वास कहलाती है। ऑक्सीजन युक्त वायु को फेफड़ों में लेना प्रश्वास (inspiration) तथा इसके विपरीत कार्बन डाइऑक्साइड युक्त वायु को फेफड़ों से बाहर निकालने की क्रिया को उच्छवास (expiration) कहते हैं। यह क्रिया को कोशिका के बाहर होती है। 8. ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से विभिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए विभिन्न मार्ग क्या है?[2011A] उत्तर – —- ![]() 9. अत्यधिक व्यायाम के दौरान खिलाड़ी के शरीर में क्रैप होने लगता है, क्यों?[2011A] अथवा, लगातार दौड़ने से व्यक्ति की पेशियों में क्रैम्प क्यों होता है?[2025AII] उत्तर –अत्यधिक व्यायाम के दौरान खिलाड़ी के शरीर में ऑक्सीजन तथा पानी का अभाव हो जाता है जिससे पाइरुवेट का विघटन लैक्टिक अम्ल में हो जाता है, जिससे मांसपेशियों में दर्द की अनुभूति होती है तथा शरीर में क्रैप होने लगता है। 10. ग्लाइकोलिसिस क्या है?[2024AI] उत्तर – कोशिकीय ईंधन (ग्लूकोज) का ऑक्सीकरण ग्लाइकोलिसिस कहलाता है। ऑक्सीकरण विशिष्ट एंजाइम्स की उपस्थिति में कई चरणों में सम्पन्न होता है जिसके फलस्वरूप जैव ऊर्जा (ATP) का उत्पादन होता है। इस अभिक्रिया में उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है। यह क्रिया अवायवीय श्वसन में होता है जिसमें छः कार्बन वाले ग्लूकोज का आंशिक विखण्डन होता है। इसमें एक अणु ग्लूकोज दो अणु पाइरूवेट बनाते है। इस प्रक्रिया को ग्लाइकोलिसिस कहते है। यह अभिक्रिया कोशिका द्रव होती है जो दस चरणों में संपन्न होती है। 11. वाह्य श्वसन क्या है?[2024AII] उत्तर –(i) यह एक भौतिक प्रक्रिया है। (ii) यह श्वसन सतह पर होता है। (iii) इसमें भोजन का ऑक्सीकरण नहीं होता है जिससे कोई ऊर्जा की प्राप्ति नहीं होती है। (iv) इसमें कोई एंजाइम्स प्रयुक्त नहीं होता है। (v) गैसों का आदान-प्रदान वायुमंडल अथवा जलीय 0₂ एवं रक्त के CO₂ के मध्य होता है। उदाहरण-अधिकतर पौधे एवं जन्तु। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1. मानव श्वसन तंत्र का स्वच्छ नामांकित चित्र खींचे एवं इसके कार्यों का वर्णन करें।[2019 AI], 2023AI] अथवा, मनुष्य के श्वसनांगों का एक स्वच्छ नामांकित चित्र बनाएँ। (वर्णन की आवश्यकता नहीं है)[2025AII] उत्तर – ![]() मनुष्य के श्वसन में कई अंग भाग लेते हैं। सभी अंग आपस में मिलकर श्वसन तंत्र का निर्माण करते हैं। मनुष्य के श्वसन अंग हैं-नासिका, नासिका छिद्र, लैरिंक्स, ट्रैकिया तथा फेफड़ा। श्वसन की क्रिया विधि-फेफड़ों में वायु का लेना तथा फेफड़ों से वायु को बाहर निकालना साँस लेना (breathing) कहलाता है। इस क्रिया में डायफ्रॉम एवं पसलियों के बीच पाई जाने वाली पेशियाँ सहायक होती है। वायुमंडल में उच्च दाब होने के कारण ऑक्सीजनयुक्त वायु श्वसन मार्गों से होती हुई वायुकोष या ऐल्वुलाई में पहुँचती है। ऐल्वुलाई में ऑक्सीजन विसरण विधि के द्वारा प्रवेश करते हैं। ऑक्सीजन रुधिर में उपस्थित हीमोग्लोबिन से संयोजित होकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाते हैं। इसी समय रुधिर में उपस्थित हीमोग्लोबिन से संयोजित होकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाते हैं। इसी समय रुधिर परिसंचरण तंत्र के द्वारा ऑक्सीहीमोग्लोबिन ऊतकों में पहुँचते हैं। जहाँ ये ऑक्सीजन को मुक्त करते हैं तथा कार्बन डाईऑक्साइड के साथ कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बनाते हैं। ये ऐल्वुलाई तक पहुँचते हैं तो कार्बन डाईऑक्साइड का विसरण ऐल्वुलाई में हो जाता है। जब डायफ्रॉम एवं पसलियों के बीच पाये जाने वाली पेशियों रिलैक्स (ढीली) होती हैं, तो वक्ष गुहा का आयतन कम हो जाता है जिसके कारण फेफड़ों में उपस्थित वायु का दाब बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों से कार्बन डाईऑक्साइड युक्त वायु बाहर की ओर श्वसन मार्ग से होकर बाहर निकलते हैं। इस प्रकार ऑक्सीजनयुक्त वायु को फेफड़ों में लेना प्रश्वास (Inspiration) कहलाता है। इसके विपरीत कार्बन डाईऑक्साइड युक्त वायु को फेफड़ों से बाहर निकालने की क्रिया को उच्छवास (expiration) कहते हैं। 2. ऑक्सी एवं अनॉक्सी श्वसन में अंतर लिखें।[2013A] उत्तर – ऑक्सी एवं अनॉक्सी श्वसन में निम्नलिखित अंतर है:- |
| ऑक्सी श्वसन | अनॉक्सी श्वसन |
|---|---|
| (i) यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। | (i) यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। |
| (ii) कोशिका के अंदर माइटोकॉण्ड्रिया में होता है। | (ii) माइटोकॉण्ड्रिया के बाहर कोशिकाद्रव्य में होता है। |
| (iii) इसका अंतोत्पाद CO₂ और जल है। | (iii) इसका अंतोत्पाद इथेनॉल अथवा लैक्टिक अम्ल है। |
| (iv) ATP ऊर्जा के 38 अणु बनते हैं। | (iv) ATP ऊर्जा दो अणु बनते हैं। |
| (v) इसमें ऊर्जा की मात्रा अत्यधिक होती है। | (v) ऊर्जा की मात्रा कम होती है। |
| 3. अनॉक्सी श्वसन की क्रिया विधि लिखें।[2013A] अनॉक्सी श्वसन की क्रियाविधि–इस कोशकीय श्वसन में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में छः कार्बन वाले ग्लूकोज का आंशिक विखंडन होता है। इसमें एक अणु ग्लूकोज दो अणु पाइरुवेट बनाते हैं। इस प्रक्रिया को ग्लाइकोलिसिस अथवा इ०एम०पी० अनुक्रम कहते हैं। यह अभिक्रिया कोशिका द्रव में होती है। यहाँ ग्लूकोज का आंशिक विखंडन होता है। अतः निहित ऊर्जा का एक छोटा-सा भाग ही विमुक्त हो पाता है जबकि शेष ऊर्जा पाइरुवेट के बंधनों में ही संचित रह जाती है। जो निम्न रूप से होता है। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में पाइरुवेट इथेनॉल एवं कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में रूपांतरित हो जाता है तथा इस प्रक्रिया को किण्वन (Fermentation) कहते हैं। C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂ ↑ + 210kJ mol‾¹ ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कुछ अवायुजीवी जैसे फीताकृमि, गोलकृमि इत्यादि में पाइरुवेट का विघटन लैक्टिक अम्ल में होता है। अतः इसे लैक्टिक अम्ल किण्वन (Lactic acid fermentation) कहते हैं। C₆H₁₂O₆ → 2CH₃CHOHCOOH + ऊर्जा इथाइल अल्कोहल (c) ऑक्सीजन की उपस्थिति में पाइरुवेट का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है तथा क्रेब्स चक्र एवं इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र द्वारा CO, एवं जल का निर्माण होता है एवं ऑक्सीकृत फॉस्फोरालेशन द्वारा ए०टी०पी० का निर्माण होता है। |
परिवहन(Transportation)
| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. मानव हृदय कितने कोष्ठकों में विभक्त है?[2017AI] उत्तर- मानव हृदय चार कोष्ठकों में बंटे होते हैं (दो आलिंद एवं दो निलय)। 2. डेंगु रोगी में रक्त के किस घटक की कमी हो जाती है?[2017AI] उत्तर- डेंगु रोगी के रक्त में प्लेट्लेट्स की कमी हो जाती है। 3. पौधों में गैस का विनिमय किसके द्वारा होता है?[2017AI] उत्तर- पौधों में गैस का विनिमय पत्ती में पाये जाने वाले Stomata (स्टोमाटा) द्वारा होता है। 4.रक्तचाप की माप किस किस उपकरण के द्वारा की जाती है? [2016AI] उत्तर- रक्तचाप की माप स्काईग्मोमैनोमीटर यंत्र से की जाती है। 5. पौधे में जल परिवहन किस ऊतक द्वारा होता है?[2015AI, 2016AII] उत्तर- पौधे में जल परिवहन जाइलम संवहन ऊतक द्वारा होता है। 6. ‘रक्त’ किस तरह का ऊतक है?[2014AI] उत्तर-‘रक्त’ तरल संयोजी ऊतक है जिसके मुख्य घटक प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्तकोशिकाएँ एवं रक्त पट्टिकाणु हैं। 7.रक्त के जमने (थक्का) का क्या कारण है?[2012A] उत्तर- रक्त के जमने (थक्का) का मुख्य कारण-प्लाज्मा में उपस्थित प्रोटीन फाइब्रिनोजिन है। 8. मानव में वहन तंत्र के घटक कौन-से है?[2012A] उत्तर- मानव में वहनतंत्र के अंतर्गत निम्नलिखित अंग सम्मिलित हैं- (i) रुधिर या रक्त (blood) (ii) हृदय (Heart) तथा (iii) रक्त वाहिनियाँ (Blood Vessels)। लघु उत्तरीय प्रश्न 1. रक्त क्या है? इसका कौन-सा घटक गैसीय परिवहन में सहायक है।[2023AI] उत्तर- रक्त (Blood)-रक्त लाल रंग का एक गाढ़ा क्षारीय (pH = 7.4) तरल पदार्थ है। जो हृदय तथा रक्त वाहिनियों में प्रवाहित होता है। रक्त का घटक हिमोग्लोबीन को ऑक्सीजन का वाहक भी कहा जाता है। हिमोग्लोबीन लाल रक्त कोशिकाएँ में पाई जाती है। जो शरीर में श्वसन गैसों का परिवहन करती है। हिमोग्लोबीन ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर ऑक्सी हिमोग्लोबीन बनाता है। इसी रूप में रक्त का प्रवाह पूर्ण शरीर में होता है। 2. लसिका क्या है? इसके कार्यों का वर्णन करें।[2021AI] उत्तर- लसिका (Lymph) श्वेत संवहनी ऊतक है। श्वेत रक्त कोशिकाओं तथा रक्त प्लाज्मा को सम्मिलित रूप लसिका (Lymph) या ऊतक द्रव (Tissue fluid) कहलाता है। लसिका का कार्य – (i) लसिका द्वारा ऊतकों की कोशिकाओं में ऑक्सीजन, सरलतम भोज्य पदार्थों तथा हार्मोन का विसरण होता है। (ii) कोशिकाओं में उपापचयी क्रिया के फलस्वरूप बने कार्बन डायक्साइड जल तथा अपशिष्टों का भी विसरण कोशिकाओं से ऊतक द्रव में होता है। (iii) यह वसीय भोज्य पदार्थों को आंत से शिरीय रक्त में पहुँचाता है। 3. वाष्पोत्सर्जन एवं स्थानान्तरण में अंतर लिखें।[2021AI] उत्तर- वाष्पोत्सर्जन एवं स्थानान्तरण में निम्नलिखित अंतर है:- |
| वाष्पोत्सर्जन | स्थानान्तरण |
|---|---|
| (i) पौधों में जल का वायवीय भागों से छिद्रों द्वारा जलवाष्प के रूप निष्कासन वाष्पोत्सर्जन कहलाता है। | (i) पौधों में जल, खनिज लवण तथा खाद्य पदार्थों का एक निश्चित ऊँचाई तक संचालन, स्थानान्तरण कहलाता है। |
| (ii) यह एक शारीरिक क्रिया है जिसके द्वारा पौधे एक निश्चित मात्रा में जल का निष्कासन करते हैं। | (ii) यह फ्लोएम वाष्पोत्सर्जन द्वारा संभव होता है। |
| 4. रक्त के चार कार्य लिखें।[2020AI] उत्तर- रक्त के निम्नलिखित कार्य हैं- (1) पोषक पदार्थों के परिवहन में भोजन के पाचन के फलस्वरूप बने शर्करा, अमीनो अम्ल, मिनिरल तथा विटामिन का परिवहन रक्त के द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में होता है। (ii) ऑक्सीजन के परिवहन में ऑक्सीजन रुधिर के हीमोग्लोबिन के साथ साथ फेफड़ों से शरीर के विभिन्न भागों के ऊतकों तक ऑक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में पहुँचाते हैं। (iii) कार्बन डायक्साइड के परिवहन में-ऊतकों के कोशिकीय श्वसन के दरम्यान बने CO, रुधिर के हीमोग्लोबिन के साथ कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाते हैं एवं फेफड़ों में पहुँचते हैं। (iv) हॉर्मोन के परिवहन में-अन्तःस्रावी ग्रंथियों से स्रावित किये गये हॉर्मोन का स्राव सीधे रक्त में होता है। रक्त हॉर्मोन को अन्य अंगों तक पहुँचाते हैं। 5. मानव में परिवहन तंत्र के घटक कौन-कौन से हैं? किन्हीं दो घटकों के कार्य लिखें। [2020AII] उत्तर- मानव परिवहन तंत्र के निम्न घटक हैं- (i) हृदय (ii) रुधिर वाहिनियाँ (धमनियाँ, शिराएँ तथा रुधिर कोशिकाएँ) (iii) लसीका तंत्र। परिवहन तंत्र के घटक के कार्य- (i) हृदय-हृदय पेशियों द्वारा निर्मित संकुचनशील संरचना है, जो पूरे शरीर में रुधिर को पंप करने तथा वापस प्राप्त करने का काम करता है। (ii)रुधिर वाहिनियाँ- (a) धमनियाँ-शुद्ध तथा ऑक्सीजनित रुधिर को हृदय से शरीर के विभिन्न भागों में ले जाती है। (b)शिराएँ-अशुद्ध या विऑक्सीजनित रक्त को विभिन्न अंगों से हृदय की ओर ले जाता है। (c)रुधिर कोशिकाएँ (capillaries) -रुधिर कोशिकाएँ द्वारा ऊतकों एवंरुधिर के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान विसरण विधि द्वारा होता है। 6. ऑक्सी हीमोग्लोबिन क्या है?[2020AII] उत्तर- मनुष्य में रक्त में R.B.C. (लाल रक्त कणिकाएँ) पायी जाती हैं,इन लाल रक्त कणिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक वर्णक पाये जाते हैं। हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण लाल रक्त कोशिकाएँ फेफड़ों से ऑक्सीजन को ऊतकों तक तथा ऊतकों से कार्बन डायक्साइड को फेफड़ों तक ले जाने का महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ संयोग करके ऑक्सी हीमोग्लोबिन बनाता है तथा रक्त परिवहन तंत्र द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाता है। शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सी हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन अलग हो जाता है। ऑक्सीजन विसरण द्वारा कोशिकाओं में पहुँचकर कोशकीय श्वसन में भाग लेता है। 7. जाइलम तथा फ्लोएम में क्या अंतर है? [2014AII, 2015AII, 2020AI, 2025AI] उत्तर- जाइलम तथा फ्लोएम में निम्न अंतर है- |
| जाइलम | फ्लोएम |
|---|---|
| (i) यह जल तथा घुलित खनिज लवण का परिवहन करता है। | (i) यह खाद्य पदार्थों का स्थानान्तरण करता है। |
| (ii) पौधों के जड़ से ऊपरी भागों की ओर एकदिशीय (Uni-directional) पथ में जल तथा खनिज लवणों के परिवहन हेतु एक स्वतंत्र विशेष तंत्र होता है। | (ii) खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण द्विद्विशीय (bidirectional) पथ में अर्थात् अधोमुखी अथवा ऊपरी मुखी होता है जिसके लिए दूसरा स्वतंत्र पथ होता है। |
| (iii) जाइलम को जल संवाहक ऊतक कहते हैं इसमें वाहिकाएँ (vessels) एवं वाहनिकाएँ (tracheids) पाई जाती हैं। | (iii) फ्लोएम भी संवहन ऊतक है फ्लोएम की चालन नलिकाएँ (Sieve tubes) जो सूक्ष्म छिद्र वाली प्लेट (Sieve plate) से जुड़ी रहती है, खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण करती हैं। |
| 8. पादप में भोजन स्थानान्तरण कैसे होता है? [2019AI, 2022AI, 2026AII] उत्तर- पादप में भोजन का स्थानान्तरण फ्लोएम संवहन ऊतक द्वारा होता है। इसमें चालनी नलिकाएँ पाई जाती है जो पौधों के एक निश्चित भाग में निर्मित भोज्य पदार्थों को दूसरे भागों तक पहुँचाती हैं। चालनी नलिकाओं में अनेक छिद्र होते हैं। जिनके द्वारा समीपस्थ चालनी नलिकाओं के जीवद्रव एक-दूसरे से संबंधित रहते हैं तथा एक कोशिका से दूसरी कोशिका के मध्य खाद्य पदार्थों का | संवहन करते हैं। 9. पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे करता है?[2019AII, 2026AII] उत्तर- पादप में जल तथा खनिज लवण का वहन जाइलम ऊतक द्वारा होता है। इसमें वाहिकाएँ एवं वाहिनिकाएँ पाई जाती हैं जो मूलतः जल एवं खनिज लवणों के स्थानांतरण के लिए उत्तरदायी है। वाहिकाएँ लंबी तथा बेलनाकार होती हैं तथा एक के ऊपर एक के रूप में विन्यस्त लंबी तथा बेलनाकार होती हैं । तथा एक के ऊपर एक के रूप में विन्यस्त रहती हैं। इन कोशिकाओं के बीच | की अनुप्रस्थ भित्ति घुल जाने के कारण पौधों के जड़ से लेकर पत्तियों तक | जल का एक अखंड स्तंभ बन जाता है। जल तथा खनिज लवणों का परिवहन एकदिशीय होता है। 10. परिसंचरण तंत्र से आप क्या समझते हैं?[2017AII] उत्तर- मनुष्य में पदाथों के परिवहन में भाग लेने वाले अंगों एवं ऊतक आपस में । मिलकर परिसंचरण तंत्र (circulatory system) का निर्माण करते हैं। । परिसंचरण तंत्र के अंतर्गत रुधिर, रुधिर वाहिनियाँ, हृदय तथा लसीका आते हैं। रक्त के परिवहन की दिशा- ![]() 11. पौधों में गैसों का आदान-प्रदान कैसे होता है?[2016AI, 2022AII] उत्तर- पौधों की कोशिकाएँ विसरण विधि के द्वारा श्वसन की क्रिया में ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं तथा कार्बन डायक्साइड को वातावरण में मुक्त करते हैं। दिन के समय श्वसन के दरम्यान उत्पन्न कार्बन डायक्साइड का उपयोग प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया में होता है। आवश्यकता से अधिक कार्बनडायक्साइड एवं ऑक्सीजन वातावरण में मुक्त होते हैं। बड़े एवं पुराने वृक्षों के तने में लेन्टीसेल (Lenticel) द्वारा गैसों का आदान-प्रदान होता है। जड़ों की कोशिकाओं में स्वतंत्र रूप से गैसों का विसरण मिट्टी के कणों के बीच उपस्थित वायु द्वारा होता है। पौधे में गैसीय आदान-प्रदान के लिए विशेष परिवहनतंत्र की आवश्यकता नहीं होती है। 12. रक्त और लसिका में अंतर लिखें।[2016AII, 2024AII] उत्तर-रक्त-रक्त एक प्रकार का तरल संयोजी ऊतक है जिसके मुख्य घटक प्लाज्मा, लाल-रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्त कोशिकाएँ एवं रक्त पट्टिकाणु है। लमिका – लसिका स्वेत संवहनी संयोजी ऊतक है। ऊतक कोशिकाओं के बीच स्थित श्वेत रक्त कोशिकाओं सहित रुधिर प्लाज्मा को लसीका कहते हैं। इसमें लाल रक्त कोशिकाएँ नहीं पाई जाती हैं। 13. रक्त का द्विगुण परिवहन क्या है?[2022AI] उत्तर- हृदय को दायें तथा बायें भाग में विभाजित होने के कारण फेफड़ो से पल्मोनरी शिरा द्वारा लाया गया ऑक्सीजनित रूधिर तथा पूरे शरीर से महाशिराओं द्वारा लाया गया कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त आपस में नहीं मिलते हैं। महाशिराओं द्वारा बायें आलिंद में लाया गया कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त निलय से पल्मोनरी धमनी में पहुँचता है। पल्मोनरी शिरा द्वारा लाया गया ऑक्सीजनित रूधिर तथा पूरे शरीर से महाशिराओं द्वारा लाया गया कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त आपस में नहीं मिलते हैं। महाशिराओं द्वारा बायें आलिंद में लाया गया कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त निलय से पल्मोनरी धमनी में पहुँचता है। पल्मोनरी धमनी रूधिर को फेफड़ों में ले जाती है जहाँ यह ऑक्सीजन से संयोग करके ऑक्सीजनित हो जाता है। यह रक्त पल्मोनरी शिराओं द्वारा वापस बायें आलिंद में आता है। बायें निलय द्वारा यह महाध मनियों से होता हुआ पूरे शरीर में विपरित होता है। इस प्रकार रक्त को पूरे शरीर में जाने के पहले हृदय से होकर दो बार गुजरना पड़ता है, जिसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं। 15. रक्त के जमने में पट्टिकाणुओं (Platelets) की क्या भूमिका है?[2022 AI, 2025AII] उत्तर- रक्त जमने की क्रिया में रक्त पट्टिकाणुओं (Blood Platelets) की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। शरीर के कटे-फटे स्थान से इनके द्वारा थ्रोम्बोप्लास्टीन नामक पदार्थ निकलता है, जो रक्त प्लाज्मा में उपस्थित प्रोथ्रोम्बीन को थ्रोम्बीन में बदल देता है, यह थ्रोम्बीन रक्त प्लाज्मा में उपस्थित घुलनशील प्रोटीन फाइब्रिनोजन को अघुलनशील फाइब्रिन में बदलकर RBC के साथ रक्त का थक्का बना लेता है और तब कटे-फटे स्थान से रक्त का बाहर निकलना रूक जाता है, इसे ‘रक्त का जमना’ कहते हैं। 16. साइनुऑरिकुलर नोड क्या है?[2024AI] उत्तर- शिरा-आलिंद छिद्र (Sinu auricular node) या एस०ए० नोड (S.A. Node) एक विशेष प्रकार के तंत्रिका उत्तक है जो दायें आलिंद की दीवार में अवस्थित होता है। इसे पेसमेकर भी कहा जाता है। यह हृदय की धड़कन के तालबद्ध संकुचन (rhythmic contraction) के लिए उत्तरदायी है। पेसमेकर के द्वारा एक अत्यन्त ही मंद विद्युत धारा उत्पन्न होती है जो हृदय पेशियों में संकुचन को प्रेरित करता है जिसे चित्र के द्वारा अंकित किया जा सकता है। यह रेखाचित्र विद्युत हदलेख (electrocardiogram) अथवा इ०सी०जी० (E.C.G.) कहलाता है। 17. रसारोहण क्या है?[2024AII] उत्तर- मृदा से जल मूलरोमों द्वारा अवशोषित होकर पौधों के शीर्ष तक व अन्य अंगों मैं तनु विलयन के रूप में पहुँचता है। जल के इस ऊपरिदिश स्थानान्तरण को रसारोहण (Ascent of sap) कहते है। जड़ों से पौधे के अन्य सभी भागों तक पानी और खनिज की आवाजाही को रसारोहण कहा जाता है। पौधों में जाइलम वाहिकाएँ पूरे पौधे में पानी और खनिजों के संचालन के लिए जिम्मेदार होता है। जल परिवहन की प्रक्रिया दबाव संचालित होती हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1. मनुष्यों में ऑक्सीजन कार्बनडायक्साइड का परिवहन कैसे होता है? [2012A, 2021AII] उत्तर- श्वसन की दो अवस्थाएँ प्रश्वास (inspiration) तथा उच्छ्वास (expira-tion) मिलकर श्वासोच्छ्वास (breathing) कहलाते हैं। प्रश्वास द्वारा वायुमंडलीय हवा नासिका तथा श्वसन से होती हुई फेफड़ों की वायु कोष्ठिकाओं में पहुँच जाती है। शरीर के विभिन्न भागों में अनॉक्सीकृत रक्त (deoxygenated blood) पहले हृदय में पहुँचता है जहाँ से इसे फेफड़े में भेज दिया जाता है। यह रक्त शिरीय रक्त (venous blood) भी कहलाता है। शिरीय रक्त फेफड़े की वायु कोष्ठिकाओं के चारों ओर स्थित रक्त कोशिकाओं में पहुँच जाता है। रक्त कोशिकाओं में शिरीय रक्त में वायुमण्डलीय हवा से जो कि वायु कोष्ठिकाओं में होता है, ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है। अतः यहाँ ऑक्सीजन का आंशिक दबाव बहुत अधिक होता है। जिसके फलस्वरूप ऑक्सीजन का विसरण (diffusion) वायु कोष्ठिकाओं से शिरीय रक्त में हो जाता है। यहाँ लाल रुधिर कोशिकाओं (RBC) के हीमोग्लोबिन (haemoglobin) ऑक्सीजन से संयोजन कर ऑक्सीहीमोग्लोबिन (oxyhaemoglobin) में परिवर्तित हो जाते हैं और यह रुधिर संचरण द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में स्थित कोशिकाओं में पहुँच जाते हैं। ऑक्सीहीमोग्लोबिन पुनः टूटकर हीमोग्लोबिन और ऑक्सीजन बनाता है। यह ऑक्सीजन भोजन अणुओं को ऑक्सीकृत कर ऊर्जा उत्पादन करता है। इधर उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड विसरण द्वारा कोशाओं से रुधिर कोशिकाओं के रक्त में पहुँचता है। यह रुधिर के हीमोग्लोबिन से संयोजन कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (carboxyhaemoglobin) बनाते हैं जो परिसंचरण द्वारा इसी रूप में फेफड़ों में पहुँचता पहुँचता है। फेफड़ों की शिरीय रुधिर कोशिकाओं में कार्बन डाइऑक्साइड के आंशिक दबाव अधिक होने के कारण इसका विसरण वायु कोष्ठिकाओं में हो जाता है । यहाँ से उच्छ्वास द्वारा इसे श्वासनली तथा नासिका द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है । —— ![]() 2. धमनी एवं शिरा में अंतर स्पष्ट करें।[2014AII, 2019AI, 2019AII, 2022AI] उत्तर- धमनी एवं शिरा में निम्नलिखित अंतर है:- |
| धमनी (Arteries) | शिरा (Veins) |
|---|---|
| (i) ये रुधिर को हृदय से विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। | (i) रुधिर को सभी अंगों से जमा करके हृदय में लाती है। |
| (ii) धमनियों में रक्त झटके के साथ अंगों की ओर बहता है। | (ii) शिराओं में रुधिर का बहाव धीरे-धीरे होता है। |
| (iii) इसमें ऑक्सीजन युक्त रुधिर प्रवाहित होती है। | (iii) पल्मोनरी शिरा को छोड़कर सभी शिराओं में कार्बन डायक्साइड युक्त रुधिर का बहाव होता है। |
| (iv) धमनियों की दीवार मोटी परंतु लचीली होती है। | (iv) धमनियों की भित्ति के अपेक्षाकृत पतली एवं कम लचीली होती है। |
| (v) धमनियाँ अधिकांशत मांसपेशियाँ की गहराई में स्थित होती हैं। | (v) ये शरीर की ऊपरी सतह पर पाई जाती हैं। |
| (vi) धमनियों में कपाट (value) नहीं होती है। | (vi) शिराओं में कपाट (value) की उपस्थिति के कारण रुधिर हमेशा एक ही दिशा में बहता है। |
| 3. रक्त क्या है? इसके घटकों का वर्णन करें।[2014ΑΙΙ, 2017AII] उत्तर- मनुष्य में रक्त लाल रंग का गाढ़ा, क्षारीय, श्यानता तरल पदार्थ है, जो मूल रूप से हृदय तथा रक्त वाहिनियों में प्रवाहित होता है। रक्त की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह अपने प्रवाह के दौरान शरीर के सभी ऊतकों का संयोजन भी करता है। यही कारण है कि इसे तरल संयोजी ऊतक भी कहते हैं। रक्त के दो प्रमुख घटक होते हैं- (i) तरल भाग या प्लाज्मा (Plasma) (ii) ठोस भाग, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्त कोशिकाएँ एवं रक्त पट्टिकाणु पाये जाते हैं। ![]() (1) प्लाज्मा (Plasma) –प्लाज्मा हल्के पीले रंग का चिपचिपा द्रव है जिसे आधात्री (Matrix) कहते हैं। यह कुल रुधिर का 50-55% तक होता है। इसमें कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थ होते हैं। प्लाज्मा में उपस्थित प्रोटीन प्लाज्मा प्रोटीन कहलाता है। ये प्रोटीन रक्त के थक्का बनाने में सहायक होते हैं। कार्य-सरल भोजन पदार्थों का परिवहन, कम मात्रा में गैसों का परिवहन, उत्सर्जी पदार्थों का परिवहन आदि। (a) लाल रक्त कोशिकाएँ-लाल रक्त कोशिकाएँ गोल, उभयावतल तथा केंद्रक रहित होता है। प्रत्येक लाल रक्त कोशिका में हीमोग्लोबिन वर्णक पाया जाता है जिसके कारण इसका रंग लाल होता है। हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण लाल रक्त कोशिकाएँ फेफड़ों से ऑक्सीजन को ऊतकों तक तथा ऊतकों से कार्बनडायक्साइड को फेफड़ों तक ले जाने का महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। (b) श्वेत रक्त कोशिकाएँ-श्वेत रक्त कोशिकाएँ अनियंत्रित आकार का केंद्रयुक्त कोशिकाएँ हैं जिसके केंद्रक की आकृति भिन्न-भिन्न होती है। श्वेत रक्त कोशिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं-(i) बोसियोफिल (ii) इसनिओफिल तथा (iii) न्यूट्रोफिल। श्वेत रूधिर कणिकाएँ शरीर की सुरक्षा, संक्रमण तथा बाहरी पदार्थों से करता है। इनकी कोशिकाएँ रोगाणुओं का भक्षण करती हैं, जिसेफैगोसाइटोसिस (Phagocytosis) कहते हैं। (c) प्लेटलेट्स (Platelates) – अस्थि मज्जा में कोशिकाओं के टूटने-फूटने से बनने वाले सूक्ष्म कण हैं, जिन्हें प्लेटलेट्स कहते हैं। कटने या चोट लगने पर रुधिर को बहने से रोकने के लिए प्लेटलेट्स रुधिर को थक्का बनाने में सहायक होते हैं। 4. वाष्पोत्सर्जन क्रिया का पौधों के लिए क्या महत्त्व है?[2015AII] उत्तर- वाष्पोत्सर्जन एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें जलवाष्प के रूप में जल पत्तियों में पाये जाने वाले स्टोमाटा द्वारा बाहर निकलते हैं वाष्पोत्सर्जन में पत्तियों के रंध्रों की समीपस्थ कोशिकाओं में सबसे सर्वाधिक परासरणी दाब होता है। जबकि जाइलम के समीप की कोशिकाओं में सबसे कम परासरणी दाब होता है। इसके कारण रंध्रों से पत्तियों के जाइलम तक एक निश्चित जल स्तंभ तक निर्माण हो जाता है जिसके कारण पत्तियों में जाइलम ऊतक से रंध्रों तक अनवरत जल का संचलन होता रहता है। यह पौधों के मूलरोम द्वारा खनिज लवणों के अवशोषण एवं जड़ से पत्तियों तक उनके परिवहन में सहायक होता है। जिसे रसाहोरण (acent of sap) कहते हैं। यह तापक्रम संतुलन बनाये रखने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। 5. मनुष्य में दोहरे रक्त संचरण की व्याख्या कीजिए तथा इसके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।[2011A] उत्तर- मानव में रुधिर प्रत्येक चक्र में हृदय से दो बार गुजरता है अर्थात् रुधिर से शरीर में एक बार पहुँचने के लिए मानव हृदय से दो बार गुजरता है। अतः इसे द्विवहन कहते हैं। इसके अंतर्गत आता है- (i) सिस्टमिक परिवहन तथा (ii) पलमोनरी परिवहन। ![]() (i) सिस्टमिक परिवहन- यह बायें आलिंद से बायें निलय में ऑक्सीजन रुधिर पहुँचता है जहाँ से यह शरीर के विभिन्न भागों में पम्प किया जाता है विऑक्सीजनित रुधिर शरीर के विभिन्न हिस्सों में शिरा द्वारा इकट्ठा करके महाशिरा में डाला जाता है और अन्त में यह रुधिर दायें आलिंदा से बायें निलय में जाता है। (ii) पलमोनरी परिवहन – विऑक्सीजनित रुधिर दायें निलय से ऑक्सीजनित होने के लिए फेफड़ों में भेजा जाता है। ऑक्सीजनित रुधिर फिर से मानव हृदय के दायें आलिन्द में आता है। बायें आलिंदा से बायें निलय में बायें निलय से महाधमनी में और फिर सिस्टमिक परिवहन द्वारा शरीर में जाता है। (iii) द्विपरिवहन का महत्त्व- मानव हृदय का दायां तथा बाया हिस्सा,ऑक्सीजनित व विऑक्सीजनित रुधिर को मिलने नहीं देते हैं। ऑक्सीजनित व विऑक्सीजनित रुधिर के अलग-अलग रहने से शरीर में ऑक्सीजन बहुत प्रभावी तरीके से पहुँचती है। मानव के लिए यह बहुत लाभप्रद है क्योंकि यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए निरंतर ऊर्जा देती रहती है। |
उत्सर्जन(Emissions)
| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. मानव में दो उत्सर्जी पदार्थों का नाम लिखें।[2017All] उत्तर- मानव में दो उत्सर्जी पदार्थ मल, मूत्र हैं। 2. वृक्क की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई किसे कहते हैं?[2015AI] उत्तर- वृक्क की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई नेफ्रॉन कहलाती है। 3. मनुष्य में वृक्क कौन-सा कार्य करता है?[2015AII] उत्तर- मनुष्य में वृक्क का मुख्य कार्य मूत्र का निर्माण तथा रक्त साफ करने में मदद करता है। 4. पौधों में टैनिन नामक पदार्थ कहाँ संचित रहता है?[2015AII] उत्तर- पौधों में टैनिन (Tannin) उत्सर्जी पदार्थ वृक्षों के छाल में संचित रहता है। 5. वृक्क किस तंत्र का एक भाग है?(2014AII] उत्तर- वृक्क एक उत्सर्जन तंत्र का भाग है। लघु उत्तरीय प्रश्न 1. डायलिसिस क्या है?[2023AI] उत्तर- जब वृक्क कार्य करना बन्द कर देता है तब रक्त से दूषित पदार्थों का उत्सर्जन एक कृत्रिम वृक्क से करवाया जाता है जैसे अधिक मात्रा में जल, खनिज या यूरिया, ये सब जहरीले पदार्थ शरीर में एकत्रित न हो इस प्रक्रिया को डायलिसिस कहते है। 2. उत्सर्जन की परिभाषा दें। उत्सर्जी पदार्थ क्या है?[2020AII, 2026AI] उत्तर- सजीवों के शरीर में उपापचयी क्रिया से बने ठोस, द्रव तथा गैसीय अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से निकालने की क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। उत्सर्जी पदार्थ-कार्बनिक अणुओं के विखंडन से अमोनिया, यूरिया या यूरिक अम्ल जैसी उत्सर्जी पदार्थ का निर्माण होता है। 3. गर्मी में हमें पसीना क्यों आता है?[2024AII] उत्तर- गर्मी के मौसम में जब हमारे शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तो उसे सामान्य रखने के लिए शरीर में मौजूद पसीने की ग्रंथियाँ सक्रिय हो जाती है और इनके जरिए निकलने वाले तरल पदार्थ को पसीना कहा जाता है इससे शरीर का तापमान नियंत्रित हो जाता है। पसीना ग्रंथियों से पानी के रूप में त्वचा के जरिए बाहर निकलता है, जो इवोपरेट होता है। इससे शरीर को ठंडक मिलती है। इसी की वजह से हम गर्मी में लू से बचते है। 4. रंध्र तथा वातरंध्र की श्वसन में क्या भूमिका है?[2024AII] उत्तर- पौधों में मुख्य रूप से पत्तियों एवं रंध्र तथा तना एवं अन्य भागों में वातरंध्र पाया जाता है। रंध्र एवं वातरंध्र द्वारा विसरण की प्रक्रिया से गैसीय आदान-प्रदान होता है। इससे श्वसन क्रिया में विमुक्त कार्बन डाईऑक्साइड तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में विमुक्त ऑक्सीजन निष्कार्सित होता है। आवश्यकता से अधिक जल वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा मुख्यतः पत्तियों के रंध्रों द्वारा उत्सर्जित होता है। इस प्रकार पौधे से रंध्रों एवं वातरंध्रों द्वारा गैसीय उत्सर्जी पदार्थ (कार्बन डाईऑक्साइड एवं ऑक्सीजन) का निष्कासन होता है। 5. पौधों के कुछ उत्सर्जी पदार्थों का नाम लिखें।[2025AII] उत्तर- पौधे अपना उत्सर्जन मुख्य रूप से पत्तियों एवं रंध्र तथा तना एवं अन्य भागों से उत्सर्जी पदार्थ का निष्कासन करते हैं। उत्सर्जी पदार्थ-रेजिन, गोंद, टैनिन, लैटेक्स, इथिलीन गैस, कार्बन डाइऑक्साइड। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1. मानव मूत्र के निर्माण विधि का वर्णन करें।[2020AI] उत्तर- मूत्र के निर्माण में वृक्क में रक्त आपूर्ति महत्त्वपूर्ण होती है। वृक्क में रुधिर वृक्कीय धमनी (Urenal artery) के द्वारा प्रवेश करता है। वृक्क धमनी प्रवेश करने के बाद धमनिकाएँ (arterioles) में बँट जाती है। वृक्क धमनिकाएँ प्रत्येक नेफ्रॉन के वोमेन्स सम्पुट में प्रवेश करती है, जिससे अभिवाही धमनिका (afferent arteriole) कहते हैं। अभिवाही धमनिका विभाजिका होकर कोशिकाओं (Capallaries) का गुच्छा बनाती है, जिसे ग्लॉमेरुलस (glomerulus) कहते हैं। ये कोशिकाएँ पुनः संयोजित होकर अपवाही धमनिका (Efierent arteriole) का निर्माण करती है। अपवाही ध मनिका वोमेन्स संपुट से निकलकर महीन कोशिकाओं का जाल बनाती है जो नेफ्रॉन के समीपस्थ कुण्डलित नलिका, लूप ऑफ हेनले एवं दूरस्थ कुण्डलित नलिका के भागों को ढंके रहती है। वृक्क शिराकाएँ, वृक्क शिरा का निर्माण करती हैं। वृक्क शिरा के द्वारा रुधिर वृक्क से दूर हृदय में ले जाया जाता है। ग्लॉमेरुलस फिल्ट्रेशन-मूत्र का निर्माण ग्लॉमेरुलस द्वारा निस्पंदन(फिल्ट्रेशन के क्रिया द्वारा होता है) रुधिर का जितना आयतन अभिवाही धमनी में प्रवेश करता है उतना उपवाही धमनिका द्वारा बाहर नहीं निकल पाता है जिससे ग्लोमेरुलस में रक्त का दबाव बढ़ जाता है उच्च दाब के कारण कोशिकाओं से रुधिर को छानने की क्रिया होती है, जिसे अल्ट्राफिल्ट्रेशन कहते हैं। (ii) चयनात्मक पुनराव्शोषण-प्लाज्मा में उपस्थित लवण, यूरिया, यूरिकएसिड, जल, ग्लूकोज, मिनरल इत्यादि छन कर वीमेन्स संपुट में आते हैं जिसे ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेट कहते हैं। समीपस्थ कुंडलित नलिका की कोशिकाएँ ग्लूकोज, सोडियम, पोटैशियम लवण, जल आदि पदार्थों को अवशोषित कर लेती हैं। ये अवशोषित पदार्थ सामान्य परिवहन में पहुँच जाते हैं। (iii) ट्यूबलर स्रवण-इस क्रिया द्वारा रुधिर से उत्सर्जी पदार्थों को जैसे-यूरिया, यूरिक एसिड, क्रिटीनीन, अतिरिक्त लवण, K+ तथा Na+ को हटाया जाता है। इस प्रकार वृक्क नलिका में बचा हुआ फिल्ट्रेट मूत्र कहलाता है। दूरस्थ कुण्डलित नलिका के द्वारा मूत्र संग्राही वाहिनी में पहुँचता है। संग्राहक वाहिनी सभी नेफ्रॉन से मूत्र का जमा करके मूत्र वाहिनी में डालता है। मूत्रवाहिनी द्वारा मूत्र का जमा करके मूत्र वाहिनी में डालता है। मूत्रवाहिनी द्वारा मूत्र मूत्राशय में जमा होता है। यहाँ से मूत्र समय-समय पर मूत्र मार्ग द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। 2. नेफ्रॉन का नामांकित चित्र बनाएँ तथा उसके कार्यों को लिखें।[2012A, 2013A, 2016AI, 2019AII] उत्तर- नेफ्रॉन के कार्य – प्रत्येक वृक्क में सूक्ष्म लंबी कुण्डलित नलिकाओं का जाल होता है, जिन्हें नेफ्रॉन कहते हैं। प्रत्येक नेफ्रॉन में एक प्याले जैसी रचना होती है। जिसे बोमैन-संपुट कहते हैं। यह रचना कोशिकागुच्छ नामक रक्त कोशिकाओं के जाल को घेरता है, जिसे ग्लोमेरुलस कहते हैं। ग्लोमेरुलस एवं बोमैन-संपुट को सम्मिलित रूप से मैलीपीगिन कोष कहते हैं। नेफ्रॉन के कार्य में एक समीपस्थ एवं दूरस्थ कुंडलित भाग लेता है। समीपस्थ भाग नीचे आकार आरोही चाप एवं प्रांतस्थ भाग में जाकर अधिरोही चाप बनाता है। अवरोही एवं अधिरोही चापों के बीच एक विशेष भाग हेनले का चाप अवस्थित होता है। अधिरोही चाप आगे की ओर एक संग्राहक नलिका में खुलती है। इस नलिका में अनेक अन्य वृक्क नलिकाएँ खुलती हैं और सभी संग्राहक नलिका आपस में मिलकर सामान्य संग्राहक नली बनाते हैं। अनेक संग्राहक नलिकाएँ बेलनी नलिका के द्वारा रीनल पिरामिड से होते हुए अंत में मूत्रवाहिनी में प्रवेश कर जाती हैं। 3. उत्सर्जन क्या है? इसके दो प्रमुख अंगों का वर्णन करें।[2015AI, 2016A1, 2025AI] उत्तर- शरीर में होने वाली विभिन्न उपापचयी क्रियाओं के क्रम में निर्मित अगैसीय तथा नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से निकलने की क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। मनुष्य में विभिन्न अंगों द्वारा उत्सर्जी पदार्थ बाहर निकलते हैं जिसमें प्रमुख अंग है -(i) फेफड़ा,(ii) त्वचा,(iii) वृक्क। (i) फेफड़ा-मनुष्य में फेफड़ों द्वारा कार्बनडायक्साइड तथा जलवाष्प का उत्सर्जन होता है। छाती के अंदर बायीं ओर दो थैलियों से युक्त दायीं ओर एक बड़ी और दो छोटी थैलियों से युक्त लोब (lobe) पाये जाते हैं। ये स्पॉज के समान रचनाएँ हैं जिनमें अंदर सैकड़ों छोटे वायु प्रकोष्ठ या एलभिओलाई (Alveoli) पाए जाते हैं। श्वसन नलियों का आंतरिक भाग इन्हीं प्रकोष्ठों में समाप्त होता है। इन्हीं के अंदर गैसीय आदान-प्रदान होता है। (ii) वृक्क मानव उत्सर्जन तंत्र का निर्माण एक जोड़े वृक्क (Kidney) एक जोड़ी मूत्रवाहिनी नली (ureters), एक मूत्राशय (urinary bladdar) और एक मूत्रनली (urethra) से होता है। पुरूषों में यह मूत्र नली प्रजनन नली से जुड़कर मूत्र-सह-प्रजनन नली (Urino-genital duct) बनाती है और लिंग (Penis) नामक मांसल रचना के छोर पर खुलती है, लेकिन स्त्रियों में उत्सर्जन और प्रजनन मार्ग अलग-अलग बाहर खुलते हैं। 4. वृक्क का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन करें।[2015AII] उत्तर- मनुष्य में मुख्य उत्सर्जी अंग वृक्क है तथा उत्सर्जन से संबंधित महत्त्वपूर्ण रचनाएँ निम्नांकित हैं- (i) वृक्क- मनुष्य में दो वृक्क होते हैं, जो उदरगुहा की पृष्ठीय देहभिति से सटे हुए कशेरुकदंड के दोनों ओर स्थित हैं तथा वृक्कीय वसा से थ से होते हैं। प्रत्येक वृक्क, ठोस गहरे भूरे रंग के सेम के बीच के आकार की संरचना है। इसकी बाहरी सतह उत्तल तथा भीतरी सतह अवतल होता है। वृक्क के आंतरिक अवतल सतह को हीलम कहते हैं जहाँ से वृक्क धमनी का वृक्क में प्रवेश तथा वृक्क शिरा का वृक्क से निर्गमन होता है। ![]() (ii) मूत्रवाहिनी – प्रत्येक वृक्क के हीलम से एक 20-30 सेमी लंबी, पतली, मांसल, नलिकाकार संरचना निकलती है, जिसे मूत्रवाहिनी कहते हैं। प्रत्येक मूत्रवाहिनी ट्रांजिसनल एपीलिथियम द्वारा आच्छादित रहती है तथा मूत्राशय में खुलती है। (iii) मूत्राशय – यह उदरगुहा के श्रोणीय भाग पर नाशपाती के आकार की पतली दीवार वाली एक थैलीनुमा रचना होती है, जो उदरगुहा के पिछले भाग में रेक्टम के नीचे स्थित होती है। (iv) मूत्रमार्ग – मूत्राशय की ग्रीवा से एक मांसल नली निकलती है जिसे मूत्रमार्ग कहते हैं। यह मूत्रद्वार के द्वारा शरीर से बाहर की ओर खुलती है। |
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