| Quick Recap:– ● जनन (Reproduction) किसी जीव के उस जैविक प्रक्रम को कहते हैं जिसके द्वारा वे अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं। ● जीवों में जनन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन। ● नर एवं मादा लिंग जब एक ही जीव में उपस्थित रहते हैं तब ऐसे जीव उभयलिंगी कहलाते हैं। ● वह प्रक्रिया जिनके द्वारा जीवों के शरीर दो बराबर संतति जीवों में तथा कई संतति जीवों में विभक्त होत हैं क्रमशः द्विखण्डन तथा बहुविखंडन कहलाते हैं। ● मुकुलन एक प्रकार का अलैंगिक जनन है जिसमें जनकों के शरीर पर कई मुकुल (Bud) निकलते हैं, जो शरीर से अलग होकर नई संतति जीवों का निर्माण करते हैं। उदाहरणस्वरूप हाइड्रा, यीस्ट आदि। ● एक प्रारूपिक पुष्प में चार मुख्य भाग पाये जाते हैं- बाह्य दलपुंज, दलपुंज, पुमंग और जायांग। ● वृषण नर मानव का मुख्य जनन अंग है, जो वृषण कोष में शरीर के बाहर विद्यमान होते हैं। इसमें शुक्राणुओं का निर्माण होता है। ● मनुष्य का मादा जननांग के अंतर्गत, अंडाशय, फैलोपिअन नलिका (डिम्ब वाहिनी), गर्भाशय, योनि तथा भग (Vulva) पाये जाते हैं। ● मादाओं में अंडाशयों एवं गर्भाशयों में प्रतिमाह होने वाला परिवर्तन ही मासिक चक्रया ऋतुस्त्राव (Menstruation) कहलाता है। स्त्रियों में मासिक चक्र 28 दिनों का होता है। ● निषेचित अंडाणु परिवर्द्धित होकर युग्मनज का निर्माण करते हैं। ● यौन संबंध से होने वाले संक्रामक रोग लैंगिक जनन संचारित रोग या STD कहलाते हैं। ● एड्स (AIDS) अत्यन्त घातक रोग है जो यौन संक्रमण, संक्रमित रक्त और संक्रमित भ्रूण से होता है। ● जनसंख्या नियंत्रण में सहायता पहुँचाने वाले परिवार नियोजन की प्रमुख तीन विधियाँ है (क) प्राकृतिक विधि (ख) यांत्रिक विधि तथा (ग) रासायनिक विधि । ● यांत्रिक विधियों में कंडोम, डायफ्राम तथा सर्वाइकल कैप, इंट्रा यूटेराइन उपाय महत्त्वपूर्ण हैं। ● रासायनिक विधियों में गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग, नर में बंध्याकरण, मादा में बंध्याकरण तथा गर्भपात आदि महत्त्वपूर्ण है। अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 1. परागण किसे कहते हैं? परपरागण की परिभाषा दें।[2013AI, 2014ΑΙΙ, 2016ΑII, 2021AII, 2022AII, 2023AI, 2025AI] उत्तर- परागकणों का परागकोश से स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र (Stigma) पर पहुँचना परागण कहलाता है। पर-परागण यदि एक पौधे के पुष्प के परागकणों का प्रकीर्णन दुसरे पौधों पर स्थित पुष्प के वर्तिकाग्र तक हो तो ऐसे परागण को पर-परागण कहते हैं। पर-परागण की प्रक्रिया हेतु एक बाह्यकर्त्ता (agent) अनिवार्य है। 2. पुष्प में नर तथा मादा युग्माकों को क्या कहते हैं?[2014AII] उत्तर- पुष्प में नर युग्मक पुंकेसर तथा मादा युग्मक स्त्रीकेसर कहलाता है। 3. निषेचन किसे कहते हैं? [2014A] उत्तर- नर तथा मादा युग्मक का संगलन निषेचन कहलाता है। निषेचन के उपरांत अंडाणु युग्मनज में परिवर्तित हो जाता है, जो विभाजित होकर भ्रूण का निर्माण करता है । लघु उत्तरीय प्रश्न 1. पुनर्जनन क्या होता है?[2021AII] उत्तर- पुनर्जनन द्वारा अलैंगिक प्रजनन होता है। इस विधि में प्राकृतिक अथवा कृत्रिम कारणों से जीवों के शरीर का खंडन दो या दो से अधिक भागों में हो जाता है। खंडित भाग पुनः संपूर्ण रचनाओं का विकास कर लेता है तथा नये जीव में परिवर्तित होकर अपना स्वतंत्र जीवन व्यतीत करता है। जैसे-स्पाइरोगाइरा, हाइड्रा, प्लेनेरिया तथा फीताकृमि में इस पकार का जनन पाया जाता है। 2. द्विखंडन एवं बहुखंडन में दो अंतर लिखें।[2021AII] उत्तर- द्विखंडन एवं बहुखंडन में निम्नलिखित अंतर है:- |
| द्विखंडन | बहुखंडन |
|---|---|
| (i) जनक जीव दो एवं समान संतति जीव का निर्माण करता है। जिसमें संतति केंद्रक मौजूद रहता है। | (i) बहुखंडन में एक व्यष्टि के खंडित खंडित होने पर एक जैसे अनेक व्यष्टियों की उत्पत्ति होती है। |
| (ii) संतति जीव शारीरिक तथा आनुवांशिक गुणों में जनक जीव के समान होता है। जैसे-जीवाणु, अमीबा, पैरामि-शियम, शैवाल, यूग्लीना इत्यदि। | (ii) इस प्रकार से उत्पन्न संततियों को अनुजात कहते हैं क्योंकि विभाजन के उपरांत जनक जीव का शरीर पूर्णतः नष्ट हो जाता है। जैसे-प्लाज्मोडियम, अमीबा इत्यादि। |
| 3. स्वपरागण एवं परपरागण में क्या अंतर है?[2019AI, 2026AI] उत्तर- किसी भी पुष्प के परागकोश से परागकणों का उसी पुष्प अथवा उसी जाति । के दूसरे पुष्पों के वर्तिकाग्र तक प्रकीर्णन परागण कहलाता हैवा परागण दो प्रकार के होते हैं- (i)स्वपरागण – यदि एक पुष्प के परागकणों का स्थानान्तरण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे स्वपरागण (self pollination) कहते हैं। जैसे-सूर्यमुखी, बाल सम। (ii) पर-परागण – यदि एक पौधे के पुष्प के परागकणों का प्रकीर्णन दूसरे पौधों पर स्थित पुष्प के वर्तिकाग्र तक हो तो ऐसे परागण को पर-परागण कहते हैं। पर-परागण की प्रक्रिया हेतु एक बाह्यकर्ता (agent) अनिवार्य है। 4. कायिक प्रवर्धन को परिभाषा करें।[2019AII] उत्तर- पौधे के शरीर का कोई भी कायिक या वर्षीभाग जैसे जड़, तना, पत्ती आदि विलग और परिवर्धित होकर नये पौधे का निर्माण करता है, तो पादप जनन का यह प्रक्रम कायकि प्रवर्धन (vegetative propagation) कहलाता है। इसके द्वारा बनने वाले पौधे अपने जनक के प्रतिरूप होते हैं। जनक से अलग होने के उपरान्त पौधे स्वतंत्र जीवन व्यतित करते हैं। आर्किड, गुलाब, अंगूर, आलू, प्याज, लहसून, जलकुंभी, पुदीना, स्ट्रावेरी, लिलि इत्यादि में कायिक प्रवर्धन पाया जाता है। 5. एक-कोशिकीय एवं बहुकोशिकीय जीवों की जनन पद्धति में क्या अंतर है?[2018AI] उत्तर- एक-कोशिकीय जंतु में प्रायः अलैंगिक जनन होता है इसमें सिर्फ एक व्यष्टि की ही भागीदारी होता है। इसमें मुख्यतः विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन इत्यादि द्वारा जनन होता है। इसमें कोशिका विभाजन समसूत्री अथवा असमसूत्री विधि द्वारा होती है। बहुकोशिकीय जीवों में मुकूलन द्वारा अलैंगिक जनन की व्यवस्था होती है। जैसे-हाइड्रा। बहुकोशिकीय जीवों में लैंगिक जनन होता है जिसके लिए नर और मादा दोनों जीवों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के जनन में DNA की प्रतिकृति का निर्माण होता है तथा इससे विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं जो विकास में सहायक है। एक कोशिकीय जीवों की जनन पद्धति में विभिन्नताओं के उत्पन्न होने की संभावना कम होती है। 6. मुकुलन क्या ह?[2017AII] उत्तर- मुकुलन (budding) अलैंगिक जनन विधि है। इस विधि में जनक के शरीर की सतह से कलिका (bud) अथवा प्रवर्ध के निकलने से नई संतति का निर्माण होता है। सरल एककोशिकीय या बहुकोशिकीय जीव हाइड्रा में अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है। जनक शरीर के ऊपर मुकुल (bud) का निर्माण होता है। यह जनक शरीर से अलग हो जाता है तथा बढ़कर नये हाइड्रा का निर्माण होता है। उदाहरण-फजाई (Fungi), यीस्ट (Yeast), हाइड्रा इत्यादि। 7. एक प्ररूपी पुष्प के सहायक अंगों का वर्णन करें।[2022AI] उत्तर- ![]() एक पुष्प का अनुदैर्ध्य काट प्ररूपी पुष्प एक वृत्त (Pedicel) द्वारा तने से जुड़ा रहता है पुष्प के विभिन्न सहायक अंग एक निश्चित चक्र में विन्यस्त होते हैं। एक प्रारूपी पुष्प में चार सहायक अंग होते हैं- (i) वाह्य दल पुंज (Calyx) – पुष्प के बाहरी चक्र में लगे हुए हरी, पत्तीनुमा संरचना होती है जब पुष्प कली की अवस्था में होती है तो वाह्य दल इनकी सुरक्षा करते हैं। (ii)दल पूंज (Corolla) – वाह्य दल के भीतर की ओर जूड़ी हुई रंगीन पंखुड़ियाँ स्थित होती है। इनके मुख्य कार्य परागण के लिए कीटों को आकर्षित करना है। (iii)पुमंग (Androecium) – यह पुष्प का नर भाग होता है। इसमें पुंकेसर (Stamen) होते हैं। जो नर जनन अंग है पुंकेसर मे पराग कोष होता है जिसमें पराग कण का निर्माण होता है। (iv) जायांग (Ryonoecium)- यह पुष्प का मादा भाग होता है जो एक या एक से अधिक स्त्रीकेसर (Carpels) द्वारा निर्मित होता है प्रत्येक स्त्रीकेसर अंडाशय वर्तिका एवं वर्तिकाग्र का बना होता है। अंडाशय के भीतर बीजाण्ड में मादा युग्मक का विकास होता है। 8. कायिक जनन क्या है?[2022AI] उत्तर- जनन की वह प्रक्रिया जिसमें पादप-शरीर किसी कायिक या वर्षी भाग (जड़, तना, पत्ती आदि) विलग एवं परिवर्तित होकर नये पौधे का निर्माण करता है, उसे कायिक जनन या प्रर्वधन कहते हैं। इसके द्वारा बनने वाले पौधे अपने जनक के प्रतिरूप होते हैं। जनक से विलग होने से उपरान्त ये पौधे स्वतंत्र जीवन व्यतीत करते हैं। आर्किड, गुलाब, अंगूर एवं सजावटी पौधों इत्यादि में कायिक प्रवर्धन या जनन पाया जाता है। प्राकृतिक एवं कृत्रिम दोनों ही तरीकों से कायिक प्रवर्धन हो सकता है। 9. पुष्पों में दलपत्रों का क्या कार्य है?[2024AI] उत्तर- एक प्रारुपिक फूल (Typical flower) में चार विभिन्न प्रकार के पुष्पपत्रों का समायोजन होता है-(i) बाह्य दलपुंज (calyx) (ii) दलपुंज (Corolla) (iii) पुमंग (androecium) तथा (iv) जायांग (Gynoecium) इनमें से बाह्य दलपुंज तथा दलपुंज सहायक अंग है जिनका लैंगिक जनन में कोई योगदान नहीं होता है। दलपुंज (corolla) में कई दलपत्र (petal) होता है। दलत्र का मुख्य कार्य फूल को आकर्षित बनाना तथा आवश्यक जनन अंगों की रक्षा करना है। दलपत्र विभिन्न आकर्षक रंग तथा सुगन्धित होता है जो कीटों एवं पक्षियों को आकर्षित करता है एवं परपरागण में मदद करता है। 10. नाभि रज्जु का क्या कार्य है?[2023AII] उत्तर- भ्रूण अपरा से एक डोरी समान रचना से जुड़ा रहता है जिसे नाभि रज्जु /गर्भनाल /नाभि नाल (Umbilical cord) कहते हैं। भ्रूण का पोषण एवं इसका श्वसन और भ्रूण से उत्सर्जी पदार्थ का माँ के रक्त में विसर्जन नाभि नाल द्वारा ही होता है। भ्रूण को माँ के रूधिर से ही पोषण मिलता है। 11. लैंगिक जनन का क्या महत्त्व है?[2021AI] उत्तर- लैंगिक जनन – लैंगिक जनन नर एवं मादा निर्मित युग्मकों के संयुग्मन (Fusion of gametes) से संतति जीव का निर्माण होता है। महत्त्व – (i) सभी जीवों में गुणसूत्र (chromosome) की एक निश्चित संख्या होती है। (ii) लैंगिक जनन में नर तथा मादा युग्मकों में दो भिन्न जीवों से प्राप्त डी०एन०ए० का समावेश होता है। (iii) इस प्रक्रिया में अर्द्धसूत्री विभाजन तथा निषेचन होता है तथा जननांग का निर्माण होता है। (iv) कई पीढ़ियों तक इसके रूपान्तरण होने से भिन्नता उत्पन्न होती है तथा क्रम विकास से नई जाति (species) का निर्माण होता है। 12. अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन के क्या लाभ हैं?[2020AII] उत्तर- अलैंगिक जनन में संतान की उत्पत्ति में सिर्फ एक जनक भाग लेते हैं जिसे उत्पन्न संतानें आनुवांशिक गुणों में ठीक जनकों के समान होती है। उनमें किसी तरह की भिन्नता नहीं पाई जाती है। परंतु लैंगिक जनन में दो जनक भाग लेते हैं। नर एवं मादा युग्मक अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा बनते हैं। अर्द्धसूत्री विभाजन के समय क्रासिंग ओवर के कारण DNA में भिन्नता उत्पन्न होती है यही भिन्नता निषेचन के बाद युग्मज में समाहित होने से विभिन्नताएँ पैदा करती है। गुणसूत्रों के नए जोड़े बनते हैं जिससे जीवों में श्रेष्ठ गुण उत्पन्न होते हैं। अलैंगिक जनन की तुलना में लैंगिक जनन जीवों में विविधता एवं जैव विकास के ज्यादा अवसर प्राप्त होते हैं। 13. ऋतुस्त्राव क्यों होता है?[2018AI] उत्तर- मादा (बालिकाओं) में 28 दिनों का आर्तव चक्र (Menstruation cycle) होता है। मासिक चक्र के 14वें दिन अण्डोत्सर्ग की क्रिया होती है एवं 28वें दिन रक्त एवं म्यूकस, गर्भाशय की दीवार से अलग हुई टूटी कोशिकाओं तथा अंडाणु योनि से स्त्राव के रूप में बाहर निकल जाते हैं, जिसे मासिक स्राव, ऋतु स्रोव अथवा रजोधर्म कहते हैं। फैलोपियन नलिका में पहुँचने के 36 घंटे तक अंडाणु को शुक्राणु द्वारा निषेचित होने की क्षमता होती है। इस समयावधि बीतने के उपरांत यदि अंडाणु का शुक्राणु के साथ संयुग्मन नहीं होता है तब ये नष्ट हो जाते हैं। प्रोजेस्ट्रान का स्राव नहीं हो पाता है एवं गर्भाशय की दिवार का अंतःस्तर टूटने लगता है। गर्भाशय स्तर के टूटने से रुधर अन्य ऊतकों, मृत अंडाणु एवं म्यूकस के साथ रक्त स्त्राव के रूप में योनि द्वारा बाहर निकलता है। 14. अपरा (प्लैसेंटा) क्या है? इसका क्या कार्य है?[2022AII] उत्तर- गर्भाशय की भित्ति और भ्रूण के बीच विशेष प्रकार की उत्तक विकसित होते हैं, जिसे प्लैसेन्टा (Placenta) कहते हैं। यह एक तश्तरीनुमा (discs shaped) संरचना है, जो गर्भाशय की भित्ति में धँसा रहता है। भ्रूण को माँ के रूधिर से ही पोषण मिलता है। माँ से भ्रूण को अपरा (प्लैसेन्य) के द्वारा ही ग्लूकोज, ऑक्सीजन, एवं अन्य पदार्थों का स्थानान्तरण होता है। भ्रूण तथा माँ के बीच पोषक पदार्थों का अथवा अपशिष्ट पदार्थो का आदान-प्रदान प्लैसेन्टा के द्वारा होता है। 15. सजीवों में जनन के महत्व लिखें।[2024AII] उत्तर- सजीवों में जनन एक ऐसा जीव प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपनी संख्या में वृद्धि करते है। प्रजनन ही जीवों में एक विशिष्ट माध्यम है जिसके द्वारा सतता जीवन की निरंतरता कायम रहती है। जनन की प्रक्रिया द्वारा संतानों की उत्पत्ति होती है। ये वृद्धि एवं परिवर्धन द्वारा वयस्क बन जाते है तथा स्वयं जनन की प्रक्रिया द्वारा संतान उत्पन्न करने लगते हैं। पौधे एवं जन्तु जनन प्रक्रिया द्वारा निरंतर अपनी संख्या में वृद्धि करते रहते है। संतति के सृजन की परिकल्पना जनन के बगैर नहीं की जा सकती है। 16. मेनार्क एवं मेनोपॉज में क्या अंतर है?[2025AII] उत्तर- मेनार्क एवं मेनोपॉज दोनों ही महिलाओं के प्रजनन जीवन चक्र के महत्त्वपूर्ण चरण हैं। दोनों में निम्नलिखित अंतर हैं- |
| मेनार्क | मेनोपॉज |
|---|---|
| (i) जब किसी लड़की को पहली बार मासिक धर्म होता है तो उसे मेनार्क कहते हैं। | (i) जब किसी महिला का मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है, तो उसे मेनोपॉज कहते हैं। |
| (ii) यह आमतौर पर 10 से 15 वर्ष के बीच होता है। | (ii) यह आमतौर पर 45 से 55 वर्ष के उम्र के बीच होता है। |
| 17. गर्भनिरोधक गोलियों के बारे में बताएँ।[2021AI] उत्तर- परिवार नियोजन के लिए कई प्रकार की गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग किया जाता है। इन गोलियों में कृत्रिम प्रोजेस्टिन तथा एस्ट्रोजन का समन्वय होता है जो पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा (FSH) तथा LH के स्राव को रोक देता है जिससे अंडोत्सर्ग की क्रिया रूक जाती है तथा मासिक चक्र बाधित हो जाता है। [ 18 ]. मनुष्य में होने वाले लैंगिक संचारित रोगों के नाम लिखें।[2021AII] उत्तर- |
| रोग | कारक |
|---|---|
| (i) एड्स (AIDS) | (i) मानव HIV |
| (ii) क्लैमिडिओसिस | (ii) बैक्टीरिया |
| (iii) गोनोरिया | (iii) बैक्टीरिया |
| (iv) सिफलिस | (iv) बैक्टीरिया |
| (v) यूरेथ्राइटिस | (v) बैक्टीरिया |
| (vi) सर्वी साइटिस | (vi) बैक्टीरिया |
| (vii) हर्पिस | (vii) वायरस |
| (viii) हीपैटाइटिस बी | (viii) वायरस |
| (ix) ट्राइकोमोनिएसिस | (ix) प्रोटोजोआ |
| 19. गर्भ निरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?[2019AI] उत्तर- गर्भ निरोधक युक्तियाँ अपनाने का मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि को रोकना है। जनसंख्या विस्फोट के प्रभाव से प्राकृतिक संसाधनों का ह्रास हो रहा है। इसके कारण उत्पादित खाद्यान्नों की कमी, उपलब्ध संसाधनों के बीच अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, आवास की कमी, बेरोजगारी, भूखमरी, अपराध में वृद्धि तथा सामाजिक अवनयन आदि अनेक वैश्विक समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। ऐसी विषम परिस्थिति में किसी भी परिवार, समाज तथा देश में जनसंख्या को सीमित रखना अति आवश्यक है। परिवार में संतानों की निश्चित संख्या बनाये रखने के लिए एक विशेष योजना अपेक्षित है जिसे परिवार नियोजन (Family planning) कहते हैं। परिवार नियोजन के कुछ संभावित उपाय निम्नलिखित हैं- (i) संयम (ii) मैथुन क्रिया में अवरोध (iii) मैथुन की सामंजस्य अवधि (iv) कंडोम (v) गर्भनिरोधक गोलियाँ (vi) सर्जिकल विधि। 20. गर्भनिरोधक की विभिन्न विधियाँ कौन-सी हैं?[2022A] उत्तर- गर्भ निरोधक की विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित है (i)प्राकृतिक विधि -इस विधि में संभोग के समय का समंजन कर अंडणु निषेचन को रोककर गर्भाधान से बचा जाता है। (ii) यांत्रिक विधि -स्त्रियों एवं पुरुषों दोनों में अलग-अलग विधियाँ होती है पुरुषों के द्वारा कंडोम तथा स्त्रियों डायाफ्राम, कॉपर-T तथा लूप जैस साधनों प्रयोग किया जाता है। (iii)रासायनिक विधि – इस विधि में गर्भनिरोधक गोलियाँ अपनायी जाती है। (iv) सर्जिकल विधियाँ – इसके तहत पुरुष नसबंदी एवं स्त्री नसबंदी तथा MTP जैसे-शल्य क्रियाओं का उपयोग किया जाता है। 21. मुकुलन और खंडन में क्या अंतर है ?[2026AII] उत्तर-(i) मुकुलन (Budding):– यीस्ट, हाइड्रा एवं अन्य जीवों के शरीर पर एक उभार की तरह की संरचना बनती है जिसे मुकुल (Bud) कहते हैं। शरीर का केन्द्रक दो भागों में विभाजित हो जाता है और उनमें से एक केन्द्रक मुकुल में आ जाता है। मुकुल पैतृक जीव से अलग होकर वृद्धि करता है और पूर्ण विकसित जीव बन जाता है। (ii) खंडन (Fragmentation):– इस विधि में जीव दो या अधिक खंडों में टूट जाते हैं और ये खंड वृद्धि करके पूर्ण विकसित जीव बन जाते हैं। उदाहरण-स्पाइरोगायरा तथा चपटे कृमि दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1. ऊतक संवर्धन क्या है? यह कैसे संपन्न होता है?[2023AI] उत्तर- उत्तक संवर्धन कायिक जनन का एक आधुनिक तरीका है। इस विधि में स्वस्थ वांछित पौधे से उत्तक का एक छोटा टुकड़ा काटकर उसे किसी बर्तन में रखे पोषक पदार्थ के घोल में रखा जाता है। उपयुक्त तापमान, आर्द्रता एवं अन्य अनुकूल स्थितियों में उत्तक का एक टुकड़ा एक असंगठित पिंड बन जाता है। जिसे कैलस कहते है। इस कैलस का इस्तेमाल भावी विभाजन हेतु क्रिया जाता है। कैलस के एक छोटे भाग को पृथक कर अन्य हार्मोन युक्त माध्यम में रखा जाता है। जो यहाँ विकसित एवं विभेदित होकर पादपक बनाते है। इन पादपकों को जमीन या गमले में प्रतिरोपित करने से यह विकसित होकर स्वतंत्र व्यस्क पौधे बन जाता है। जो अपने जनक के समान होता है। 2. परागण किसे कहते हैं? परागण पर वर्षा होने का क्या प्रभाव पड़ता है?[2013A, 2014AII, 2016AI, 2021AII, 2024AI] उत्तर- किसी भी पुष्प के परागकोष से पराग कणों का उसी पुष्प अथवा उसी जाति के दूसरे पुष्पों के वर्तिकाग्र तक प्रकीर्णन परागण कहलाता है। परागण दो प्रकार की होती है। (i)स्वपुरागण -यदि एक पुष्प के परागकणों का स्थानान्तरण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे स्वपरागण (Self Pollination) कहते हैं। जैसे-सूर्यमुखी, वालसन। (ii)पराप्रागण – यदि एक पौधे के पुष्प के परागकणों का प्रकीर्णन दूसरे पौधों पर स्थित पुष्प के वर्तिकाग्र तक हो तो ऐसे परागण को परपरागण कहते हैं। पर-परागण की प्रक्रिया हेतु एक बाह्य कर्त्ता (agent) अनिवार्य है। परागण पुर वर्षा का प्रभाव- एक पुष्प से दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर परागकणों का स्थानान्तरण वायु, जल अथवा प्राणियों द्वारा होता है। वायु तथा जल परागण के अजैविक माध्यम (abiotic) है, जबकि कीट, पक्षी या अन्य जंतुएँ जैविक (Biotic) माध्यम हैं। वर्षा होने पर परागण की क्रिया मंद हो जाती है। 3. एकल जीवों में प्रजनन की विधि की व्याख्या करें।[2018AI] उत्तर- एकल जीवों में प्रजनन में सिर्फ एक जनक भाग लेते हैं। अतः एकल जीव सिर्फ अलैंगिक जनन ही करते हैं। एकल जीवों में प्रजनन की विधि- (i) विखण्डन (Fission), (ii) मुकुलन (budding), (iii) बीजाणु निर्माण(spore formation), (iv) पुनर्जनन (regeneration), (v) खण्डन (Frag-mentation), (vi) कायिक प्रबंर्धन (Vegetative propagation) (i) विखण्डन (Fission) – यह एक कोशिकीय जीव में प्रजनन की मुख्य विधि है। उदाहरण-जीवाणु, अमीबा, पैरामिशियम आदि। विखण्डन दो प्रकार से होते हैं- (a) द्विखण्डन (Binary Fission)- इस विधि से जनक जीव दो एवं समान संतति जीवों का निर्माण करता है। जैसे-जीवाणु, अमीबा, पैरामीशियम इत्यादि। ——— ![]() (b) बहुखंडन या बहुविभाजन (Multiple fission):- एक व्यष्टि के खडित होने से एक जैसे अनेक व्यष्टियों की उत्पत्ति होता है। जैसे-प्लाज्मोडियम, अमीबा इत्यादि। ![]() (ii) भुकुलन (Budding):- इस विधि में जनक के शरीर की सतह से कलिका अथवा प्रवर्ध निकलते हैं, जिसे मुकूल (bud) कहते हैं। यह जनक से अलग होकर स्वतंत्र जीव के रूप में जीवन यापन प्रारंभ कर देते हैं। जैसे-फंजाई (Fungi) एवं यीस्ट तथा हाइड्रा। ![]() (iii) बीजाणु निर्माण (Spore Formation):- पौधों में बीजाणु निर्माण के द्वारा अलैंगिक प्रजनन होता है। जनक पौधों द्वारा प्रजनक इकाइयाँ उत्पन्न होती हैं, जिसे बीजाणु (spore) कहते हैं। बीजाणु का आवरण फटता है तथा प्रत्येक बीजाणु एक नये पौधे को जन्म देता है। जैसे-राइजोपस (Rizopus) म्यूकर(Mucor) इत्यादि। (iv) पुर्जनन (Regeneration):- इस विधि में प्राकृतिक अथवा कृत्रिम कारणों से जीवों के शरीर कई भाग में बंट जाता है। प्रत्येक भाग अपने खोये हुए भाग को पुनः प्राप्त कर लेता है। जैसे-हाइड्रा, प्लैनेरिया। (v) खंडन (Fragmentation) – सरल शारीरिक संरचना वाले बहुकोशिकीय जीवों में खंडन द्वारा प्रजनन होता है। जैसे-स्पाईरोगाइरा (Springrya), समुद्री फुल (Sea anemone) इत्यादि। ![]() (vi) कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation):- पादप शरीर का कोई भी कायिक या वर्षी भाग जैसे-जड़, तना, पत्ती आदि उससे अलग और परिवर्धित होकर नये पौधे का निर्माण करता है। तो यह प्रक्रम कायिक प्रवर्धन कहलाता है। जैसे-पत्थरचट्टा के पौधे, आलु, प्याज, लहसून, जलकुंभी, पुदीना, लिलि इत्यादि। ![]() 4. पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।[2014ΑΙ, 2017ΑII, 2018AII] उत्तर- —– ![]() 5. पुष्पी पौधों में निषेचन क्रिया का सचित्र वर्णन करें।[2017AI] उत्तर- पुष्पी पौधों में नर तथा मादा युग्मक का संयुग्मन (Fusion) निषेचन कहलाता है। निषेचन क्रिया-परागण के बाद परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, तो इनमें अंकुरण की क्रिया प्रारंभ होती है। परागकण से परागनलिका निकलती है जो वर्तिका (Style) से होती हुई अण्डाशय (Ovray) में स्थित बीजांड तक पहुँचती है। परागनली के अग्र सिरे पर दो नर युग्मक मौजूद होता है,परागनलिका बीजांड में एक सूक्ष्म छिद्र के द्वारा प्रवेश करते हैं, जिसे माइक्रोपाइल (Micropyle) कहते हैं। एक नर युग्मक बीजांड के भीतर स्थित मादा युग्मक या अंडाणु से संयोजित होकर युग्मक (Zygote) का निर्माण करते हैं। दूसरा नर केंद्रक का आपस में संयोजन होता है। इस प्रकार प्रत्येक बीजांड या भ्रूणकोष में दो प्रकार का संलयन (fusion) होता है। पहला नर युग्मक अण्डाणु (egg cell) से संयोजित होते हैं, जबकि दूसरा नर-युग्मक द्वि-ध्रुवीय केंद्रकों से संयोजित होते हैं। संयोजन की यह क्रिया दोहरा निषेचन (double fertilization) कहलाती है। युग्मनज से नये भ्रूण का विकास होता है, जबकि द्वि-ध्रुवीय केंद्रक से इण्डोस्पर्म (Endosperm) का विकास होता है। इण्डोस्पर्म में विकसित होने वाले भ्रण के लिए पोषक पदार्थ वहीं मौजूद होते हैं। निषेचन की क्रिया के बाद अंडाशय (ovary) फल में तथा बीजांड बीज (seed) में विकसित होते हैं। बीज के भीतर भ्रूण सुरक्षित होते हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में नये पौधों को जन्म देता है। बीजों में होने वाली यह क्रिया अंकुरण (germination) कहलाती है। 6. लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में पाँच अंतर लिखें। [2014AI, 2023AII] उत्तर- लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में निम्नलिखित पाँच अंतर हैं- |
| अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|
| (i) अलैंगिक जनन में एक कोशिका अथवा एक जनक भाग लेते हैं। | (i) लैंगिक जनन में दो कोशिकाओं अथवा दो युग्मकों जो एक जनन अथवा दो विभिन्न जनकों से उत्पन्न होता है। |
| (ii) जनक का पूरा शरीर अथवा एक कोशिका या प्रवर्ध जनन इकाई हो सकती है। | (ii) इसमें जनन इकाई को युग्मक कहते हैं जो एक कोशकीय तथा हैप्लायड होता है। |
| (iii) इस प्रक्रिया में केवल समसूत्री विभाजन ही होता है। | (iii) इस प्रक्रिया में अर्द्धसूत्री विभाजन तथा निषेचन अहम है। |
| (iv) इसमें जननांग का निर्माण नहीं होता है। | (iv) इसमें जननांग का निर्माण मुख्य रूप से होता है। |
| (v) इसका कोई क्रम विकासीय महत्त्व नहीं है। | (v) इसके द्वारा जातियों में विभिन्ता उत्पन्न होती है। अतः इसका महत्त्व है। |
| 7. मानव के मादा जनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाएँ।[2019AII, 2020AII] उत्तर- ![]() 8.मानव नर जननतंत्र का नामांकित चित्र बनाएँ एवं उसके कार्यों का वर्ण करें।[2018AI] उत्तर- ![]() नर जनन तंत्र क अंतर्गत निम्नलिखित अंग हैं-वृषण (testes), वृषणकोष (Scrotum), अधिवृषण (epididymis), शुक्रवाहक (vas deferens), शुक्राशय (seminal vesicles), प्रोस्टेट ग्रंथि (prostate gland), शिश्न (penis) इत्यादि। वृषण उदरगुहा से बाहर वृषण कोष (Scrotum) में स्थित होता है। वृषण की संख्या दो होती है। वृषण की कोशिकाओं द्वारा नर युग्मक अर्थात् शुक्राणुओं का निर्माण होता है। वृषण के द्वारा टेस्टोस्ट्रॉन (testoterone) हॉर्मोन स्रावित किये जाते हैं, जिसके द्वारा यौवनावस्था के लक्षणों का नियंत्रण होता है। वृषण के द्वारा उत्पन्न होने वाले शुक्राणु अधिवृषण से शुक्राणु अधिवृषण (epididymis) नामक कुण्डलित नली में पहुँचते हैं। अधिवृषण | से शुक्राणु लंबी नली शुक्रवाहिकाओं (vas deferens) में पहुँचते हैं। शुक्राशय (seminal vesicles) की नलिका से जुड़कर एक स्खलन नली का निर्माण करती है। दोनों स्खलन नलियाँ एक पुरस्थ ग्रंथि (Prostrate gland) में प्रवेश करती हैं। पुरस्थ ग्रंथि में दोनों नलियाँ मूत्राशय से आने वाली नली के साथ जुड़कर मूत्रमार्ग का निर्माण करती हैं। यह नीचे की ओर शिश्न के मध्य से होता हुआ शिश्न के सिरे पर मूत्र जनन छिद्र द्वारा बाहर की ओर खुलता है। शुक्राणु में एक छोर पर पूँछ (Tail) पाई जाती है। जिसकी सहायता ये मद के जनन अंग मे अंडाणु की ओर गति करते हैं | 9. जनन कितने प्रकार का होता है?[2017AI] उत्तर- जनन-यह एक ऐसा जीव प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं। प्रजनन ही जीवों में एक विशिष्ट माध्यम है जिसके द्वारा संतत जीवन की निरंतरता कायम रहती है। जनन की प्रक्रिया द्वारा संतानों की उत्पत्ति होती है। ये वृद्धि एवं परिवर्धन द्वारा व्यस्क बन जाते हैं तथा स्वयं जनन की प्रक्रिया द्वारा संतान उत्पन्न करने लगते हैं। जनन मुख्य रूप से दो प्रकार प्रकार के होते हैं- (i)अलैंगिक प्रजनन- अलैंगिक जनन में संतान की उत्पत्ति में सिर्फ एक जनक भाग लेते हैं अलैंगिक विधि के द्वारा प्रजनन मुख्य रूप से उन जीवों में होना है, जिनकी शारीरिक संरचना सरल होती है। जैसे-एक कोशिकीय प्राणियों, पौधों, सूक्ष्म जीवों तथा बहुकोशिकीय प्राणियों इत्यादि में अलैंगिक प्रजनन पाया जाता जाता है। (ii)लैंगिक जनन –लैंगिक जनन में दो जनक भाग लेते हैं जिसमें एक नर (male) तथा दूसरा मादा (Female) होती है। नर जनक के द्वारा नर युग्मक | (male gamete) तथा मादा जनक के द्वारा मादा युग्मक (female gamete) | का निर्माण होता हैं। दोनों युग्मक मिलकर युग्मनज (zygote) नामक नई कोशिका का निर्माण करते हैं। नई कोशिका के द्वारा एक नये जीव का निर्माण | होता है। उच्च वर्गीय जंतुओं एवं पौधों में लैंगिक विधि के द्वारा जनन होता है। 10.लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में पाँच अंतर लिखें।[2014AI] उत्तर- अलैंगिक तथा लैंगिक जनन में निम्नलिखित अन्तर हैं :- |
| गुण | अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|---|
| (i) संलिप्तता | इस प्रक्रिया में एक कोशिका अथवा एक जनक ही भाग लेते हैं। | इस प्रक्रिया में दो कोशिकाओं अथवा दो युग्मकों, जो एक जनक अथवा दो विभिन्न जनकों से उत्पन्न हों, की साझेदारी होती है। |
| (ii) जनन इकाई | जनक का पूरा शरीर अथवा एक कोशिका या प्रवर्ध जनन इकाई हो सकती है। | इसमें जनन इकाई को युग्मक (gamete) कहते हैं जो एक कोशिकीय तथा हैप्लायड (haploid) होता है। |
| (iii) समानता | इस प्रक्रिया से उत्पन्न संतति आनुवंशिकी रूप से जनकों के समान होते हैं। | इनमें संतति प्रायः अपने जनकों जनकों से भिन्न होते हैं। |
| (iv) कोशिका विभाजन | इस प्रक्रिया में केवल समसूत्री विभाजन ही होता है। | इस प्रक्रिया में अर्द्धसूत्री विभाजन तथा निषेचन अहम् है। |
| (v) जननांग | इसमें जननांग का निर्माण नहीं होता है। | इसमें जननांग का निर्माण मुख्य रूप से होता है। |
| (vi) क्रमविकास | इसका कोई क्रमविकासीय महत्त्व नहीं है। | इसके द्वारा जातियों में विभिन्नता (variation) उत्पन्न होती है। अतः इसका महत्त्व है। |
| 11. मनुष्य के प्रमुख पाँच लैंगिक जनन संचारित रोग, उनके कारक रोगाणु एवं लक्षणों को लिखें।[2024AI] उत्तर-लैंगिक जनन संचारित रोग (sexually transmitted disease, STD) यौन संबंध से होने वाले संक्रामक रोग को कहा जाता है। यह रोग कई तरह के रोगाणुओं, जैसे-वैक्टीरिया, वायरस, परजीवी, प्रोटोजोआ, यीस्ट जैसे-सूक्ष्मजीवों द्वारा होते है मनुष्य में होने वाले पाँच प्रमुख रोग निम्नलिखित है। |
| रोग | कारक | लक्षण | समस्या |
|---|---|---|---|
| (i) एड्स (AIDS) | मानव HIV | बुखार, अत्यधिक कमजोरी, कैंसर संक्रमण | डीमेशिया एवं मृत्यु |
| (ii)क्लोमाइडिओसिस | क्लेमाइडिया क्टीरिया | दर्द से भरा मूत्र का स्राव, योनि से म्यूकस का स्त्राव | वातरोग, बांझपन, गठिया जोड़ों का दर्द |
| (iii) गोनोरिया | निसेरिया गोनोरिया बैक्टीरिया | नर में मूत्र परित्याग में तकलीफ | अर्धाइटिस, रैश, बांझपन |
| (iv) सिफलिस | ट्रेपोनिमा पैलिडम बैक्टीरिया | जननांगों पर घाव,अत्यधिक फुंसी तथा कई वर्षों के उपरांत हृदय ,यकृत, तंत्रिका एवं मस्तिष्क की क्षति | मृत्यु |
| (v) हेपेटाइटिस-बी | हेपेटाइटिस-बी वायरस | थकान, लगातार बुखार, उदर में दर्द | यकृत सिटाँसिस, यकृत कैंसर |
| 12. अलैंगिक जनन की तुलना में लैंगिक जनन से क्या लाभ है ?[2026AI] उत्तर –अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन अधिक श्रेष्ठ है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं- (i) लैंगिक जनन में शुक्राणु तथा अंडाणु के संयुजन के कारण डी. एन. ए. द्वारा पैतृक गुण वर्तमान पौढ़ी के सदस्य में हस्तान्तरित हो जाते हैं जो जीवित रहने के लिए अधिक शक्तिशाली होते हैं जबकि अलैंगिक जनन में एकल डी. एन. ए, होने के कारण जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। (ii) लैंगिक जनन में डी. एन. ए. की दोनों प्रतिकृतियों में कुछ-न-कुछ अंतर अवश्य होते हैं जिनके परिणामस्वरूप नई पीढ़ी के सदस्य जीव में भिन्नता अवश्य दिखाई देती है जबकि अलैंगिक जनन में भिन्नता नहीं दिखाई देती। यदि उसमें किसी कारण से भिन्नता आ जाती है तो जीव की मृत्यु हो जाती है। (iii) लैंगिक जनन उद्विकास में बहुत सहायक है जबकि अलैंगिक जनन उद्विकास में सहायक नहीं है। |
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